"प्रायः हमने स्वजनों से ये सुना है की पूजा पाठ बड़े ही विधि विधान से संयम के साथ करना चाहिए... परन्तु महापुरुषों का विचार है कि अच्छे कर्म या परमात्मा की भक्ति किसी भी रूप या किसी भी स्थिति में स्वीकार्य और पुण्यमयी है...कलियुग में तो परमेश्वर का नाम या उनके मार्ग पर चलना ,जीवन को सार्थक बनाने का सरलतम उपाय है,और प्रभु उसका फल हमें अवश्य देताहै...गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी स्पष्ट रूप से हरि कीर्तन की महिमा का वर्णन किया है.... तुलसी मेरे राम को रीझ भजो या खीज । भूमि पड़ा जामे सभी उल्टा सीधा बीज ॥ अर्थात् : भूमि में जब बीज बोये जाते हैं तो यह नहीं देखा जाता कि बीज उल्टे पड़े हैं या सीधे पर फिर भी कालांतर में फसल बन जाती है, इसी प्रकार नाम सुमिरन कैसे भी किया जाये उसके सुमिरन का फल अवश्य ही मिलता है...जब नाम की महिमा इतनी गहरी है तो आइये प्रत्येक क्षण हम कर्मलीन होते हुए भी भगवान् के नाम का सुमिरन करते हुए जीवन गुजारें... हे प्रभु हम कभी भी आपको भूलें नहीं.." *आज इसी अलौकिक प्रार्थना के साथ सुबह की राम राम*🙏 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 जय श्री राम जय हनुमान

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