"र नारी पूज्यन्ते तत्र देवता रमयन्ते" 💖:::::🍃🙏🍃::::::💖 आप सभी सम्मानित यूजर्स से इस (पोस्ट पर आपकी राय जानना चाहता हूं ।) जैसे ही वरमाला के कार्यक्रम के पश्चात दुल्हे ने दुल्हन के पांवों को छुआ तो सब हंसने लगे.... ये क्या कर रहे हो?.... दुल्हे ने कहा बिलकुल सही कर रहा हूँ आज से ये मेरी पत्नी ही नही मेरे घर परिवार की नींव है इसके व्यवहार से ही मेरी समाज में पहचान बनेगी, इसके हाथों ही मेरे माँ बाप को मान सम्मान मिलेगा, मेरी आने वाली पीढ़ी इसके ही खून पसीने से सींची जाएगी, मेरा पूरा जीवन अब इसके ही साथ ही जुड़ गया है तो मुझे इसकी इज्जत करनी चाहिए न कि इसे मेरी.... दुल्हे की बात सुनकर सब लोग तालीया बजाने लगे और एक नई परम्परा और सोच का जन्म हो गया... नयी सोच नयी पहल और ये सच भी है इसको हर मर्द को मानना चाहिए की पत्नी से ही उसकी पहचान पत्नी से ही बढ़ती समाज में उसकी शान

+185 प्रतिक्रिया 88 कॉमेंट्स • 206 शेयर

विष्णुपुराण की एक कथा के अनुसार जिस समय असुर संस्कृति शक्तिशाली हो रही थी, उस समय असुर कुल में एक प्रह्लाद नामक बालक का जन्म हुआ था। उसका पिता, असुरराज हिरण्यकश्यप देवताओं से वरदान प्राप्त कर अच्छा हो गया था। उसका आदेश था, कि उसके राज्य में कोई विष्णु की पूजा नही करेगा। परंतु प्रह्लाद विष्णु भक्त था और ईश्वर में उसकी अटूट आस्था थी। पुराणों के अनुसार दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय विष्णु भगवान के किसी अन्य को नहीं भजता, तो वह क्रुद्ध हो उठा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुक़सान नहीं पहुंचा सकती। किन्तु हुआ इसके ठीक विपरीत, होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ। इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है। होली का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं।होली की केवल यही नहीं बल्कि और भी कई कहानियां प्रचलित है आप सभी को मेरी ओर से होली की हार्दिक शुभकामनाएं.....

+235 प्रतिक्रिया 60 कॉमेंट्स • 26 शेयर