प्रेम से बोलो जय माता की 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 नवरात्रि स्पेशल: जौ के रंग से जानें अपना भविष्य! 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही बड़े नवरात्र भी शुरू होते हैं। हिंदु धर्म में पुराणों के अनुसार ये नौ दिन माता को प्रसन्न करने का विशेष समय माना जाता है,नवरात्र को कुल देवी देवताओं की पूजा का विशेष समय माना गया है, आज के भागमभाग भरी लाइफ में अधिकांश लोग कुल देवी देवताओं को भूल जाते हैं। जब कि ये शाश्वत सत्य है कि नवरात्रि ही एक ऐसा पर्व है जिसमें मां की अराधना कर आने वाली हर मुसीबतों से बचा जा सकता है। नवरात्रि में देवी की उपासना से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं उन्ही में से एक है नवरात्रि पर घर में जवारे या जौ लगाने की।नवरात्रि पर जौ लगाने की परम्परा आदिकाल से चली आ रही है हमने अक्सर अपने घर में पंडित को या बडों को कलश स्थापना के समय जौ बोते हुए देखा है, कलश के नीचे बालू रखकर उस पर जौ उगाया जाता है फिर जौ घड़े की नमी से अपने आप दूसरे तीसरे दिन अंकुरित होकर पत्तियां निकलने लगती हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पीछे कारण क्या है| नवरात्रि पर घर में जौ लगाने के धार्मिक कारण- दरअसल नवरात्रि में जवारे इसलिए लगाते हैं क्योंकि मान्यता है कि जब सृष्टी की शुरूआत हुई थी तो पहली फसल जौ ही थी। इसलिए इसे पूर्ण फसल कहा जाता है। यह हवन में देवी-देवताओं को चढ़ाई जाती है यही कारण है कि इसे हविष्य अन्न भी कहा जाता है। वसंत ऋतु की पहली फसल जौ ही होती है। जिसे हम माताजी को अर्पित करते हैं। कहा जाता है जौ उगाने से भी भविष्य से संबंधित भी कुछ बातों के संकेत मिलते हैं | जौ बोने के दो या तीन दिन बाद अंकुरित होकर जयंती निकल जाती हैं। 1-जैसे यदि जौ तेजी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि तेजी से बढ़ती है। 2-अगर जौ हल्के रंग के हों तो भविष्य में घर की समृद्धि में किसी तरह की वृद्धि होती है 3-और यदि ये जौ मुरझाए हुए या इनकी वृद्धि कम हुई हो तो भविष्य में कुछ अशुभ घटना का संकेत मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार जौ से ही चावल उत्पन्न हुए हैं। लेकिन इस मान्यता के पीछे मूल भावना यही है कि माताजी के आर्शीवाद से पूरा घर वर्षभर धनधान्य से भरा रहे। 4-अगर जयंती का रंग लाल हो जाता है तो यह संकेत होता है कि आपको शुत्रओं और रोग से कष्ट होने वाला हैं। 5– अगर जयंती का रंग नीचे से पीला और उपर से हरा हो तो माना जाता है कि वर्ष की शुरुआत खराब होती हैं। 6-इसके उलट अगर जयंती का रंग नीचे से हरा और उपर से पीला हो वर्ष की शुरुआत अच्छी होती है, लेकिन बाद में परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। 7– वहीं ऐसा भी माना है कि अगर आपकर जयंती पुष्ट, हरा व सफेद रंग की है तो पूरा वर्ष अच्छा होगा। यदि जयंती अशुभ संकेत दे रही है तो मां से विपदा दूर करने की प्रार्थना करें और दसवीें तिथि को नवग्रह के नाम पर 108 बार हवन करें।मां के बीच मंत्र को बोलते हुए 1008 बार हवन करें। हवन के बाद मां की आरती करें। हवन की भभूत से रोज तिलक करना ना भूलें।

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चैत्र नवरात्र में प्रथम दिन से नवमी तक मां दुर्गा को इन चीजों का लगाए भोग चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है। प्रथम दिन से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। इन नौ दिनों आप अगर मां दुर्गा की विशेष कृपा अपने परिवार पर चाहते हैं तो आपको प्रत्येक दिन माता को अलग—अलग भोग लगाना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पं. राजीव शर्मा बता रहे हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा को किस दिन किस मिठाई, पकवान या वस्तु का भोग लगाने से हमें क्या फल मिलता है। 1. नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करना चाहिए, इससे आरोग्य की प्राप्ति तथा शरीर निरोगी रहता है। 2. दूसरे दिन मां को शक्कर का भोग लगाएं और घर के सभी सदस्यों को दें। इससे आयु में वृद्धि होती है। 3. तीसरे दिन दूध से बनी मिठाई का भोग मां को लगाकर ब्राह्यणों को दान दें, इससे दुःखों से मुक्ति के साथ-साथ परम आनन्द की प्राप्ति होती है। 4. चौथे दिन मां को मालपुए का भोग लगाकर मन्दिर में ब्राह्यणों को दान देने से बुद्धि का विकास होता है एवं निर्णय शक्ति बढ़ती है। 5. पांचवे दिन माता रानी को केले का नैवेद्य चढ़ाने से शरीर स्वस्थ रहता है। 6. छठे दिन दुर्गा मां को शहद का भोग लगाने से आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है। 7. सातवें दिन माता को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने के बाद ब्राह्यणों को दान देने से आकस्मिक संकटो से रक्षा होती है। 8. आठवें दिन दुर्गा मां को नारियल का भोग लगाने से सन्तान संबंधी परेशानियों से छूटकारा मिलता है। 9. नवमी के दिन माता रानी को तिल का भोग लगाने से अनहोनी की आशंका खत्म होती है।

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🌹🌹🌹जय माता की 🌹🌹🌹 चैत्र नवरात्रि के प्रत्येक दिन के लिए विशेष एक रंग । यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र, ६ अप्रैल से प्रारंभ है और समापन १४ अप्रैल को है। नवरात्रि में माँ भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के रूपों की साधना की जाती है। नवरात्रि का त्यौहार नौ दिनों तक चलता है जिसमे प्रति दिन माँ दुर्गा जी के नौ स्वरूपो की पूजा अर्चना की जाती है मगर क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में रंगो के अनुसार कपड़े पहनने पर देवी माँ प्रसन्न होती हैं. यदि आपने नवरात्रि के शुरुआती दिनों में इन रंगो के कपड़े नही पहने हैं तो आखिरी दिनों में भी ऐसे वस्त्र धारण कर सकते हैं जिससे देवी माँ की कृपा आप पर बनी रह सकती है. प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के पहले दिन से आखिरी दिन तक का रंग निर्धारण किया जाता है इसके बाद बाकि आठ दिनों के रंगो के क्रम का चक्र चलता है. नवरात्रि के दौरान हर रंग का अलग अलग महत्व होता है. नवरात्रि के नौ दिनों के नौ विशेष रंग – प्रत्येक दिन के अनुसार रंगो की सूची नवरात्रि का प्रथम दिवस – प्रतिपदा इस दिन पर घटस्थापना, चंद्र दर्शन और माँ शैलपुत्री की विशेष पूजा की जाती है अतः इस दिन हरे रंग के कपडे पहनने चाहिए । नवरात्रि का दूसरा दिवस – नवरात्रि का दूसरा दिन सिंधारा दौज और माता ब्रह्मचारिणी की विशेष पूजा की जाती है अतः इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए । नवरात्रि का तीसरा दिवस – नवरात्रि के तीसरे दिन गौरी तीज या सौजन्य तीज के रूप में मनाया जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान माँ चन्द्रघण्टा की पूजा है अतः इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए । नवरात्रि का चौथा दिवस – नवरात्रि का चौथा दिन वरद विनायक चौथ के रूप में भी जाना जाता है इस दिन का मुख्य अनुष्ठान माँ कुष्मांडाकी पूजा है अतः इस दिन नारंगी रंग के कपड़े पहनने चाहिए । नवरात्रि का पांचवा दिवस – नवरात्रि के पांचवे दिन को लक्ष्मी पंचमी कहा जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान नाग पूजा और स्कंदमाताकी पूजा की जाती है अतः इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए । नवरात्रि का छठा दिवस – नवरात्रि के छठे दिन यमुना छट या स्कन्द सष्ठी के रूप में जाना जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है अतः इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए नवरात्रि का सातवां दिवस – नवरात्रि के सातवें दिन को महा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है और देवी माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है अतः इस दिन बैंगनी रंग के कपड़े पहनने चाहिए । नवरात्रि का आठवां दिवस – नवरात्रि के आठवें दिन को अष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है और इसे अन्न पूर्णा अष्टमी भी कहा जाता है इस दिन विशेष माँ महागौरी की पूजा और संधि पूजा की जाती है अतः इस दिन गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए । नवरात्रि का नौंवा दिवस – नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन राम नवमी के रूप में मनाया जाता है और इस दिन विशेष माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है अतः इस दिन सुनहरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

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