जय जय सियाराम क्या हम सब अपने भारतीय नववर्ष (संवत्सर) के स्वागत हेतु तैयार हैं,* अपने वर्तमान संवत्सर का नाम है *प्रमादी* *अंतरराष्ट्रीय कलेन्डर के अनुसार आगामी १३ अप्रैल सन २०२१ के ब्रम्हमुहूर्त से भारतीय नववर्ष/ नवसंवत्सर (आनन्द संवत्सर) प्रारम्भ हो रहा है, ब्रम्हमुहूर्त से लेकर सूर्यास्त तक हम अपने भारतीय नववर्ष का स्वागत गर्वपूर्वक कर सकते हैं।* अपने नववर्ष को गर्वपूर्वक मनाने के लिए भिन्न भिन्न प्रयास किये जा सकते हैं जैसे:- *घर के आंगन को रंग पोत कर साफ करिये | आंगन में तुलसी का पौधा नहीं है तो अभी लगायें।तुलसी माता का पूजन करने के साथ ही नववर्ष की बधाई देना प्रारम्भ करें*। *घर की छत या सबसे उपर के हिस्से पर एक मजबूत पोल या पाईप गडवा दीजिए, नये वर्ष पर ध्वज जो लगाना है।ध्यान रखें कि भगवा पताका अवश्य लगाएं सम्भव हो तो*। *घर के बाहर दरवाजे पर लगाने के लिए ऊँ व स्वास्तिक के अच्छे स्टिकर इत्यादि ले आईये, लगाइये।* *घर के आसपास नीम का पेड ढूंढ कर रखिए। नव वर्ष तक उसमें नई कोंपलें आ जायेंगी। नव वर्ष के दिन सुबह सुबह वे कोपलें मिश्री के साथ स्वयं भी खानी है और ओरों को भी बांटनी हैं | सूर्य की नई ऊर्जा के साथ खाने से शरीर निरोगी भी रहेगा।* *अच्छे शुभकामना संदेश ढूंढ कर रखिये, मित्रों को जो भेजने हैं। क्या कहा......? कार्ड भेजेगें । हां तो उसकी डिजाइन तैयार करने का समय आ गया है। सम्राट विक्रमादित्य, श्री राम जी, श्री कृष्ण जी आदि महापुरुषों के अच्छे चित्र ढूंढना प्रारंभ कर दीजिये। शुभ-कामनाएँ पोस्ट कार्ड पर भी भेजी जा सकती हैं। अपनापन लगता है।* *नव-वर्ष की पूर्व संध्या पर अपने गाँव, शहर, मोहल्ले, प्रतिष्ठान में सांस्कृतिक कार्यक्रम कवि सम्मेलन की योजना भी बनायी जा सकती है। नववर्ष के दिन घरों में, प्रतिष्ठानों में रोशनी करना नहीं भूलें।* *उस दिन सुबह प्रभात-फेरी भी निकाली जा सकती है। सम्भव हो तो टोली बनाकर सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के मांथे पर रोली चन्दन का टीका लगाना।सबसे श्रेष्ठ प्रयास की अपने अपने घर या पवित्र नदी तट पर सूर्यदेव भगवान की पहली किरण को अर्घ देना परिवार के साथ या समाज के साथ।* हाँ जी, इतने सारे काम .....??? *हमारा नव वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत- २०७८ इस वर्ष दिनांक १३ अप्रैल २०२१ मंगलवार को है।।* तैयार रहें!* हिन्दू होने पर गर्व करें!!! अपने नव वर्ष को गर्वपूर्वक मनाने का संकल्प लें ... *।भारत माता की जय।*

+8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

*ये जानकारी सबको पता होगी फिर भी सही तरह से पता नहीं होगा लेख आखरी तक पढ़े और सबको शेयर करे* पाँच वस्तुऐ ऐसी हे ,जो अपवित्र होते हुए भी पवित्र है उच्छिष्टं शिवनिर्माल्यं वमनं शवकर्पटम् काकविष्टा ते पञ्चैते । पवित्राति मनोहरा॥ *1) उच्छिष्ट - गाय का दूध* गाय का दूध पहले उसका बछड़ा पीकर उच्छिष्ट करता है। फिर भी वह पवित्र ओर शिव पर चढ़ता है । *2) शिव निर्माल्यं - गंगा का जल* गंगा जी का अवतरण स्वर्ग से सीधा शिव जी के मस्तक पर हुआ। नियमानुसार शिव जी पर चढ़ायी हुई हर चीज़ निर्माल्य है पर गंगाजल पवित्र है। *3) वमनम् उल्टी – शहद मधुमख्खी जब फूलों का रस लेकर अपने छत्ते पर आती है, तब वो अपने मुख से उस रस की शहद के रूप में उल्टी करती है, जो पवित्र कार्यों मे उपयोग किया जाता है। *4) शव कर्पटम् - रेशमी वस्त्र धार्मिक कार्यों को सम्पादित करने के लिये पवित्रता की आवश्यकता रहती है, रेशमी वस्त्र को पवित्र माना गया है, पर रेशम को बनाने के लिये रेशमी कीड़े को उबलते पानी में डाला जाता है ओर उसकी मौत हो जाती है उसके बाद रेशम मिलता है तो हुआ शव कर्पट फिर भी पवित्र है । *5) काक विष्टा - कौए का मल* कौवा पीपल पेड़ों के फल खाता है ओर उन पेड़ों के बीज अपनी विष्टा में इधर उधर छोड़ देता है जिसमें से पेड़ों की उत्पत्ति होती है, आपने देखा होगा की कही भी पीपल के पेड़ उगते नही हे बल्कि पीपल काक विष्टा से उगता है, फिर भी पवित्र है।

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

अप्रैल फुल का अर्थ है - हिन्दुओं का मूर्खता दिवस "अप्रैल फूल" किसी को कहने से पहले इसकी वास्तविक सत्यता जरुर जान लें .!! पावन महीने की शुरुआत को मूर्खता दिवस कह रहे हो, पता भी है क्यों कहते है अप्रैल फूल (अप्रैल फुल का अर्थ है - हिन्दुओं का मूर्खता दिवस).?? ये नाम अंगजो की देन है .. हिन्दू कैसे समझें "अप्रैल फूल" का मतलब बड़े दिनों से बिना सोचे समझे चल रहा है यह अप्रैल फूल ...!! इसका मतलब क्या है .?? दरअसल जब अंग्रेजो द्वारा हमें 1जनवरी का नववर्ष थोपा गया तो उस समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार 1अप्रैल से अपना नया साल बनाते थे, जो आज भी सच्चे हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है, आज भी हमारे बही खाते और बैंक 31 मार्च को बंद होते है और 1 अप्रैल से शुरू होते है लेकिन उस समय जब भारत गुलाम था तो अंग्रेजो ने विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते हुए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस अप्रैल फूल का नाम दे दिया ताकि हमारी भारतीय सभ्यता मूर्खता लगे.... अब आप ही सोचो अप्रैल फूल कहने वाले कितने सही हो आप.? याद रखे अप्रैल माह से जुड़े हुए इतिहासिक दिन और त्यौहार-- 1. हिन्दुओं का पावन महिना इस दिन से शुरू होता है (शुक्ल प्रतिपदा) 2. हिन्दुओं के रीति-रिवाज़ सब इस दिन के कलेण्डर के अनुसार बनाये जाते है। आज का दिन दुनिया को दिशा देने वाला है। अंग्रेज हिन्दुओं के विरुद्ध थे इसलिए हिन्दू के त्योहारों को मूर्खता का दिन कहते थे और आप हिन्दू भी बहुत शान से वही कह रहे हो.!! गुलाम मानसिकता का सुबूत ना दो, अप्रैल फूल लिख के.!! अप्रैल फूल सिर्फ भारतीय सनातन कलेण्डर, जिसको पूरा विश्व फॉलो करता था उसको भुलाने और मजाक उड़ाने के लिए बनाया गया था ..!! 1582 में पोप ग्रेगोरी ने नया कलेण्डर अपनाने का फरमान जारी कर दिया जिसमें 1जनवरी को नया साल का प्रथम दिन बनाया गया। जिन लोगो ने इसको मानने से इंकार किया, उनको 1 अप्रैल को मजाक उड़ाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे 1 अप्रैल नया साल का नया दिन होने के बजाय मूर्ख दिवस बन गया..!! आज भारत के सभी लोग अपनी ही संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए अप्रैल फूल डे मना रहे है...!! जागो हिन्दू जागो सावधान भारत

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

बहुत सालों बाद देश में ऐसी "होली" आ रही है जब एक भी हिन्दू विरोधी ऐड नहीं आया,और ना ही पानी बचाने वाला ज्ञान... *कारण आप लोग हैं* *ये नया भारत है.. आईये इस #होली पर पानी सोते हुए हिंदुओं पर डाल उन्हें जाग्रत करने का प्रयास करें, शायद जाग ही जाए, क्योंकि अभी भी देर नहीं हुई है ! *जागो_हिन्दू_जागो* *होली की हर्षित बेला पर,* *खुशियां मिले अपार |* *यश,कीर्ति, सम्मान मिले,* *और बढे सत्कार ||* *शुभ-शुभ रहे हर दिन हर पल,* *शुभ-शुभ रहे विचार |* *उत्साह. बढे चित चेतन में,* *निर्मल रहे आचार ||* *सफलतायें नित नयी मिले,* *बधाई बारम्बार |* *मंगलमय हो काज आपके,* *सुखी रहे परिवार ||* *"होली की हार्दिक शुभकामनाएं !"* 🙏🏻 *जय जय श्री राधेकृष्ण*🙏🏻

+10 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 0 शेयर

🙏🏻जय जय सियाराम🙏🏻 *नित्य जो प्रभु गुण गाता है* *वह शीघ्र मोक्ष फल पाता है* 🌾🎋🌴🌴🎋🌾 🧘🏾‍♀️🧘🏽‍♂️🧎🏿‍♂️🧎🏽‍♀️🧘🏽‍♂️🧘🏾‍♀️🪴🪴🪴🪴🪴🪴 *ज्ञातासी द्रष्टासी परात्मरूपो,* *अखण्डरूपोसि गुणालयोसि ।* *जितेंद्रीयस्त्वं त्यज मान मुद्रा ,* *तू अतींद्रिय प्रत्यक्ष है ।।* 🍄🍄🍄🍄🍄🍄 🌸💥🔥🔥💥🌸 *हे जीव, परमात्मा का जो अनन्तरूप है वहीं तेरा स्वरुप है । तू अपने स्वरुप को इस दशा में देह और आत्मा भिन्न समझ, वह अखंड है । तू सब गुणों का स्वामी है । तूने सब इन्द्रियों को जीत लिया है । तू शरीर का गर्व छोड़ । वैभव और यौवन पर गर्व मत कर । तू महान है । द्रष्टा है ।* 〰️〰️🌱🌱〰️〰️ 🙏🏻जय जय श्री राधेकृष्ण🙏🏻 *धर्मात्मा -* *वो नही जो धर्म की पुजा करता हो* *वो नही जो धर्म की बातें करता हो* *वो नही जो धर्म के मत मतांतरों में भेद करने की बात कर उलझाता हो* *सच्चा धर्मात्मा वो है जो मर्यादपुर्षोतम भगवान श्रीराम व भगवान श्रीकृष्ण के कहे सिध्दांतों को आचरण में ला कर* *मन, वचन, काया की एकता स्वरुप जीवन में शुद्ध व्यवहार करें ।*

+30 प्रतिक्रिया 15 कॉमेंट्स • 0 शेयर