amarnath jangde Oct 16, 2019

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
amarnath jangde Oct 12, 2019

+7 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
amarnath jangde Oct 12, 2019

*जरा सोचिये हमने क्या किया* 🙏🏻एक बर ध्यान से पढ़े 🚩 *1.* चोटियां छोड़ी , *2.* टोपी, पगडी छोड़ी , *3.* तिलक, चंदन छोड़ा *4.* कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी , *5.* यज्ञोपवीत छोड़ा , *6.* संध्या वंदन छोड़ा । *7.* रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा , *8.* महिलाओं, लडकियों ने साड़ी छोड़ी , बिछिया छोड़े , चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी , मांग बिन्दी छोड़ी । *9.* पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है) *10.* संस्कृत छोड़ी , हिन्दी छोड़ी , *11.* श्लोक छोडे, लोरी छोड़ी । *12.* बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े , *13.* सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी , *14.* पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छुना छोड़े , *15.* घर परिवार छोड़े ( अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)। *अब कोई रीति या परंपरा बची है ?* ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो *कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैनें ऐसे जीवित रखा हैं* जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- *जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे।* *बौद्धों ने कभी सर मुंडाना नहीं छोड़ा!* *सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया!* *मुसलमान ने न दाढ़ी छोडी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना!* *ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है!* फिर *हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ ?* *कहाँ लुप्त हो गये* - *गुरुकुल की शिखा*, *यज्ञ*, *शस्त्र-शास्त्र*, *नित्य मंदिर जाने का संस्कार ?* *हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं।* *अपनी पहचान बनाओ! अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ!!!* *सप्ताह मे कम से कम एक दिन तो बच्चों के साथ मन्दिर जाना शुरु करो*।🙏🌹🙏

+11 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 4 शेयर
amarnath jangde Oct 11, 2019

+18 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
amarnath jangde Oct 10, 2019

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
amarnath jangde Oct 9, 2019

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर