🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷 🕉️🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🕉️🇮🇳 🌹🙏 *ॐ नमो नारायण* 🙏🌹 🌿🌷🌻 *शुभ~दिवस* 🌻🌷🌿 🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳 *साभार ऑडियो ~ @Kamini Agarwal* *बरषा भये तैं जैसे बोलत भंभीरी सुर,* *खंड न परत कहुं नेकहु न जांनिये ॥* *जैसैं पूंगी बाजत अखंड सुर होत पुनि,* *ताहू मैं न अंतर अनेक राग गांनिये ॥* *जैंसें कोऊ गुडी कौं चढ़ावत गगन मांहि,* *ताहू की तौ धुनि सुनि वैंसैं ही बखांनिये ॥* *सुन्दर कहत तैंसे काल कौ प्रचंड बेग,* *रात दिन चल्यौ जाइ अचिरज मांनिये ॥२१॥* जैसे वर्षा ॠतु में झींगुर कीट(=भंभीरी) निरन्तर नाद करता रहता है, उसमें किंचित् भी व्यवधान(अन्तर) नहीं होने देता ! या जैसे पूंगी(एक वाद्यविशेष) बाजाने वाला पूंगी से निरन्तर ध्वनि निकालता रहता है, उसमे कोई भेद नहीं आने देता; या जैसे कोई पतंगबाज अपनी पतंग को आकाश में निरन्तर आगे बढ़ाता रहता है, उस की गति में कोई विघ्न नहीं आने देता । श्री सुन्दरदास जी कहते हैं - उसी तरह, इस काल की तीव्र गति भी ऐसी ही है, यह रात दिन आगे से आगे ही बढ़ता रहता है - इस में आश्चर्य नहीं मानना चाहिये ॥२१॥ *(सवैया ग्रंथ ~ काल चितावनी को अंग)* https://youtu.be/iBsvnR4ZfO0 https://youtu.be/iBsvnR4ZfO0

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷 🕉🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🕉🇮🇳 🌹🙏 *ॐ नमो नारायण* 🙏🌹 🌿🌷🌻 *शुभ~दिवस* 🌻🌷🌿 🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳 *साभार ऑडियो ~ @Kamini Agarwal* *काल सौ न बलवंत कोउ नहिं देखियत,* *सब कौ करत अंत काल महा जोर है ।* *काल ही कौ डर सुन भाग्यौ मूसा पैगंबर,* *जहां जहां जाइ तहां तहां वाकौ गोर है ॥* *काल ही भयानक भैभीत सब किये लोक,* *स्वर्ग मृत्यु पाताल मैं काल ही कौ सोर है ।* *सुन्दर काल को भी काल एक ब्रहम है अखंड,* *बासौं काल डरैं जोई चल्यौ उहि वोर है ॥२०॥* इस संसार में मृत्यु से बढ़ कर कोई बलवान् नहीं है । यह ऐसा महाबलशाली है कि यह कभी न कभी सभी का अन्त कर ही देता है । इस काल का भय मान कर ही हजरत मूसा पैगम्बर स्वात्मरक्षा हेतु इधर उधर छिपने के लिये भागते रहे; परन्तु वे जहाँ भी गये, उन्हें अपने लिये कब्र ही खुदी हुई दिखायी दी । यह काल इतना भयप्रद है कि इसने सब को भयभीत कर रखा है । स्वर्गलोक, मृत्युलोक या पाताल लोक कहीं भी जाइये, सर्वत्र इस काल की बलवत्ता की ही चर्चा सुनायी देती है । परन्तु महात्मा सुन्दरदास जी कहते हैं - यह अखण्ड ब्रह्म उस काल का भी काल(मृत्यु = नाशक) है । उस(ब्रह्म) से काल भी डरता है कहीं वह(ब्रह्मज्ञानी) इसे(काल को) नष्ट न कर दे ॥२०॥ *(सवैया ग्रंथ ~ काल चितावनी को अंग)* https://youtu.be/B8KjSP5vLY4 https://youtu.be/B8KjSP5vLY4

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