શિવ

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 *भगवान शिव और नारायणी माँ पार्वती संवाद* *श्री गुरुगीता* *|| अथ प्रथमोऽध्यायः||* *अचिन्त्याव्यक्तरूपाय निर्गुणाय गुणात्मने |* *समस्त जगदाधारमूर्तये ब्रह्मणे नमः ||* जो ब्रह्म अचिन्त्य, अव्यक्त, तीनों गुणों से रहित (फिर भी देखनेवालों के अज्ञान की उपाधि से) त्रिगुणात्मक और समस्त जगत का अधिष्ठान रूप है ऐसे ब्रह्म को नमस्कार हो | (1) ऋषयः ऊचुः *सूत सूत महाप्राज्ञ निगमागमपारग |* *गुरुस्वरूपमस्माकं ब्रूहि सर्वमलापहम् ||* ऋषियों ने कहा : हे महाज्ञानी, हे वेद-वेदांगों के निष्णात ! प्यारे सूत जी ! सर्व पापों का नाश करनेवाले गुरु का स्वरूप हमें सुनाओ | (2) *यस्य श्रवणमात्रेण देही दुःखाद्विमुच्यते |* *येन मार्गेण मुनयः सर्वज्ञत्वं प्रपेदिरे ||* *यत्प्राप्य न पुनर्याति नरः संसारबन्धनम् |* *तथाविधं परं तत्वं वक्तव्यमधुना त्वया ||* जिसको सुनने मात्र से मनुष्य दुःख से विमुक्त हो जाता है | जिस उपाय से मुनियों ने सर्वज्ञता प्राप्त की है, जिसको प्राप्त करके मनुष्य फ़िर से संसार बन्धन में बँधता नहीं है ऐसे परम तत्व का कथन आप करें | (3, 4) *गुह्यादगुह्यतमं सारं गुरुगीता विशेषतः |* *त्वत्प्रसादाच्च श्रोतव्या तत्सर्वं ब्रूहि सूत नः ||* जो तत्व परम रहस्यमय एवं श्रेष्ठ सारभूत है और विशेष कर जो गुरुगीता है वह आपकी कृपा से हम सुनना चाहते हैं | प्यारे सूतजी ! वे सब हमें सुनाइये | (5) *क्रमशः.......* 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

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prahladbhai Jul 15, 2019

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Kalpna Panchal Jul 16, 2019

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yogesh R Choksi Jul 15, 2019

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