हरियाली_तीज

🙏🌹जय भोलेनाथ 🌹🙏सभी भाई बहनो 👨‍👩‍👧‍👦 को प्यार भरा राम राम 🙏🌷🌷 श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज पर्व मनाया जाता है। सावन मास में आने के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। क्योंकि सावन के महीने में हर जगह हरियाली छाई रहती है। इस मौके पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और खुशियां मनाती हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए इस व्रत का खास महत्व होता है। हरियाली तीज का हिंदू धर्म में काफी महत्व होता है। क्योंकि इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। अच्छे वर की प्राप्ति के लिए अविवाहित लड़कियों द्वारा भी इस व्रत को रखा जाता है। व्रत रखने वाली विवाहित महिलाएं इस दिन दुल्हन की तरह सजती हैं। अत: सोलह श्रंगार करती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन भोजन और पानी ग्रहण नहीं करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन को देवी पार्वती ने महिलाओं के लिए शुभ घोषित किया और कहा कि जो भी इस दिन कुछ अनुष्ठान करेगा, उसे सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होगा। पौराणिक कथा अनुसार देवी पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थी। भगवान शिव को प्रभावित करना एक कठिन कार्य था। जिसके लिए माता पार्वती ने कई कठिनाइयों का सामना किया। लंबे समय तक भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की। मां पार्वती की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शंकर ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया और श्रावण मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को मां पार्वती से विवाह कर लिया। जिस कारण से इस दिन विवाहित महिलाएं देवी पार्वती का आशीर्वाद लेती हैं और कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की कामना के लिए देवी पार्वती से आशीर्वाद लेती हैं।

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Babita Sharma Aug 3, 2019

हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं। मां पार्वती का आशीर्वाद सदा आपके साथ बना रहे। 🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀 🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿 शिव और पार्वती के पुनर्मिलाप के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले हरियाली तीज के त्योहार के बारे में मान्यता है कि मां पार्वती ने 107 जन्म लिए थे भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए। अंतत: मां पार्वती के कठोर तप और उनके 108वें जन्म में भगवान ने पार्वतीजी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से मां पार्वती प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती है। इस तीज व्रत में मां पार्वती के अवतार तीज माता की उपासना की जाती है। पौराणिक जानकारी के अनुसार मां पार्वती ही श्रावण महीने की तृतीया तिथि को देवी के रूप में (तीज माता के नाम से) अवतरित हुई थीं। श्रावण महीना भगवान शिव को अधिक प्रिय होने के कारण एवं देवी पार्वती भगवान शिव की पत्नी हैं अत: इसी वजह से श्रावण के महीने में भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए माता पार्वती के अवतार तीज माता की उपासना की जाती है। माँ पार्वती आप पर अपनी कृपा हमेशा बनाए रखें। ॐ नमः शिवाय 🔱

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Mahesh Bhargava Aug 3, 2019

हरियाली तीज का पर्व हिन्‍दू धर्म को मानने वाली महिलाओं के लिए बेहद खास है. तीज पर्व को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की याद में मनाया जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए दिन-भर व्रत-उपवास रखती हैं. यही नहीं अच्‍छे पति की कामना के लिए अविवाहित लड़कियां भी इस व्रत को रखती हैं. मान्‍यता है कि हरियाली तीज का व्रत रखने से विवाहित स्त्रियों के पति की उम्र लंबी होती है, जबकि अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवन साथी मिलता है. हरियाली तीज का त्‍योहार मुख्‍य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में मनाया जाता है. हरियाली तीज और नाग पंचमी, अगस्त के पहले हफ्ते में मनाए जाएंगे ये दो खास पर्व 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 हरियाली तीज कब है . इस बार हरियाली तीज 3 अगस्‍त को मनाई जाएगी. हरियाली तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त हरियाली तीज की तिथि: 03 अगस्‍त 2019 हरियाली तीज की तिथि आरंभ: 03 अगस्‍त 2019 की सुबह 07 बजकर 06 मिनट से. हरियाली तीज की तिथि समाप्‍त: 04 अगस्‍त 2019 की सुबह 03 बजकर 36 मिनट तक. हरियाली तीज का महत्‍व हरियाली तीज को 'छोटी तीज' और 'श्रावण तीज' के नाम से भी जाना जाता है. सावन में पड़ने वाली यह तीज सुहागिन स्त्रियों के लिए बेहद महत्‍वपूर्ण है. हिन्‍दू धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार यह त्‍योहार पति के प्रति पत्‍नी के समर्पण का प्रतीक है. मान्‍यता है कि इस दिन गौरी-शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सुहागिनों के पति दीर्घायु होते हैं और लड़कियों को मनचाहा वर मिल जाता है. आपको बता दें कि सुहागिन महिलाओं के बीच तीज पर्व का खास महत्‍व है. मान्‍यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्‍त करने के लिए पूरे तन-मन से करीब 108 सालों तक घोर तपस्‍या की. पार्वती के तप से प्रसन्‍न होकर शिव ने उन्‍हें पत्‍नी के रूप में स्‍वीकार कर लिया. तीज पर्व पार्वती को समर्पित है, जिन्‍हें 'तीज माता' कहा जाता है. 🕉🕉🕉 कैसे मनाते हैं हरियाली तीज? हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं दिन भर व्रत-उपवास करती हैं. साथ ही इस दिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं, जिनमें हरी साड़ी और हरी चूड़‍ियों का विशेष महत्‍व है. दिन-भर स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं. हरियाली तीज पर झूला झूलने का भी विधान हैं. स्त्रियां अपनी सहेलियों के साथ झूला झूलती हैं. कई जगह पति के साथ झूला झूलने की भी परंपरा है. शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है. इस दिन सुहागिन स्त्रियों को श्रृंगार का सामान भेंट किया जाता है. खासकर घर के बड़े-बुजुर्ग या सास-ससुर बहू को श्रृंगार दान देते हैं. हरियाली तीज के दिन खान-पान पर भी विशेष ज़ोर दिया जाता है. हालांकि इस दिन स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन फिर भी बिना मिठाइयों के त्‍योहार कैसा? तीज के मौके पर विशेष रूप से घेवर, जलेबी और मालपुए बनाए जाते हैं. रात के समय खाने में पूरी, खीर, हल्‍वा, रायता, सब्‍जी और पुलाव बनाया जाता है.🌿🌿🕉🕉🕉 हरियाली तीज के लिए जरूरी पूजा और श्रृंगार सामग्री हरियाली तीज के दिन व्रत रखा जाता है और पूजा के लिए कुछ जरूरी सामान की आवश्‍यकता होती है. पूजा के लिए काले रंग की गीली मिट्टी, पीले रंग का कपड़ा, बेल पत्र, जनेऊ, धूप-अगरबत्ती, कपूर, श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, तेल, घी,दही, शहद दूध और पंचामृत चाहिए . वहीं, इस दिन पार्वती जी का श्रृंगार किया जाता है और इसके लिए चूड़‍ियां, आल्‍ता, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, कंघी, शीशा, काजल, कुमकुम, सुहाग पूड़ा और श्रृंगार की अन्‍य चीजों की जरूरत होती है.🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 हरियाली तीज की पूजा विधि - सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद मन में व्रत का संकल्‍प लें. - सबसे पहले घर के मंदिर में काली मिट्टी से भगवान शिव शंकर, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति बनाएं. - अब इन मूर्तियों को तिलक लगाएं और फल-फूल अर्पित करें. - फिर माता पार्वती को एक-एक कर सुहाग की सामग्री अर्पित करें. - इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र और पीला वस्‍त्र चढ़ाएं. - तीज की कथा पढ़ने या सुनने के बाद आरती करें. - अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर अर्पित कर भोग चढ़ाएं. - प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें.🕉🕉🕉 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 हरियाली तीज व्रत की एक पौराणिक कथा है। जिसके अनुसार भगवान शिव एक दिन माता पार्वती को अपने मिलने की कथा सुनाते हैं। भगवान शिव माता पार्वती को बताते हैं कि तुमने मुझे अपने पति के रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया, लेकिन तुम मुझे अपने पति के रूप में एक भी बार नही पा सकी। फिर जब 108वीं बार तुमने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया तो तुमने मुझे अपने वर के रूप में पाने के लिए हिमालय पर घोर तपस्या की। और उस तपस्या के दौरान तुमने अन्न-जल का भी त्याग कर दिया था। और सूखे पत्तों चबाकर तुम पूरा दिन बिताती थी। बिना मौसम की परवाह किए हुए तुमने निरंतर तप किया। तुम्हारे पिता तुम्हारी ऐसी स्थिति देखकर बहुत दुखी व नाराज थे। लेकिन फिर भी तुम वन में एक गुफा के अंदर मेरी आराधना में लीन रहती थी। भाद्रपद के महीने में तृतीय शुक्ल को तुमने रेत से एक शिवलिंग बनाकर मेरी आराधना की जिससे खुश होकर मैने तुम्हारी मनोकामना पूरी की। जिसके बाद तुमने अपने पिता से कहा कि 'पिताजी, मैंने अपने जीवन का काफी लंबा समय भगवान शिव की तपस्या में बिता दिया है। और अब भगवान शिव ने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे स्वीकार भी लिया है। इसलिए अब मैं आपके साथ तभी चलूंगी जब आप मेरा विवाह भगवान शिव के साथ ही करेंगे। जिसके बाद पर्वतराज ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर लिया और तुम्हें घर वापस ले गए। कुछ समय बाद ही उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ हमारा विवाह करा दिया। शिव जी कहते हैं कि हे पार्वती! भाद्रपद शुक्ल तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था यह उसी का परिणाम है जो हम दोनों का विवाह संभव हो सका। शिव जी ने पार्वती जी से कहा कि इस व्रत का महत्त्व यह है कि इस व्रत को पूरी निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मैं मनवांछित फल देता हूँ। इतना ही नही भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि जो भी स्त्री इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग की प्राप्ति होगी। हरियाली तीज के मंत्र  1. गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया। मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।। 2.श्री भगवते साम्ब शिवाय नमः 3.उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये 4.देवि देवि उमे गौरी त्राहि माम करुणा निधे, ममापराधा छन्तव्य भुक्ति मुक्ति प्रदा भव।

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