संतवचन

🔔 श्रील सच्चिदानंद भक्ति विनोद ठाकुर जी के आविर्भाव दिवस पर विशेष.... श्रीरूप मंजरी की अनुगत कमल मंजरी ही श्रीभक्तिविनोद ठाकुर जी के रूप में अवतरित हुई है। श्रील नरोत्तम ठाकुर जी आदि कई अन्य वैष्णावों के अप्रकट हो जाने के बाद गौड़ीय जगत में अंधकार छा गया था । श्रीचैतन्य महाप्रभु जी के विशुद्ध प्रेमधर्म के तात्पर्य को समझने में असमर्थ होने के कारण बहुत से अपसम्प्रदायों का जन्म हो गया था । बंगाल के शिक्षित , प्रतिष्ठित व्यक्ति इन सम्प्रदायों के घृणित आचरण देखकर श्रीमन् महाप्रभु जी के प्रेम धर्म को अनपढ़, नीच जाति और चरित्रहीन व्यक्तियों का धर्म समझकर उसके प्रति श्रद्धा खो बैठे थे। जीवों की इस दुरावस्था को देखकर श्रीमन् महाप्रभु जी का हृदय दया से भर गया और उन्होंने जीवों के मंगल के लिए अपने निजजन श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी को इस जगत में भेजा । पृथ्वी ते यत आछे देश - ग्राम । सर्वत्र संचार हई वेक मोर नाम ।। ..........ठाकुर श्रीभक्ति विनोद जी ने श्रीमन् महाप्रभु जी की इस वाणी की सार्थक किया । मानव जाति का सर्वोत्तम पारमार्थिक कल्याण करने में श्रीभक्ति विनोद ठाकुर जा का अवदान अतुलनीय है। आज उनकी इस तिथि पर उनके चरणों में दंडवत् प्रणाम करते हुए उनकी कृपा प्रार्थना करते हैं।

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जय श्री राधे एक करोड़ रुपये जैसे मैं कहूं कि मेरे एक हस्ताक्षर से आपको एक करोड़ रुपए तुरंत प्राप्त हो जाएंगे तो इस वाक्य के रहस्य को समझना होगा इसके लिए आवश्यक है कि मेरा किसी बैंक में एक खाता हो दूसरी शर्त है कि उस खाते की चेक बुक हो तीसरी शर्त है कि उस खाते में एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि हो चौथी बात है कि मैं आपके नाम का एक करोड़ रुपए का सही-सही चेक बनाऊं और उस पर हस्ताक्षर करूं । तब ही आपको एक करोड़ रुपए प्राप्त हो पाएंगे ऐसे ही जब शास्त्रों में कहा गया है कि एक कृष्ण नाम सर्व पाप को क्षय कर देता है उसके पीछे भी यही रहस्य है कि कृष्णनाम कि इतनी पूंजी हो । संख्या अनुशासन सहित हमारी नाम के प्रति श्रद्धा हो नाम की हमने आराधना करके इतना नाम पुंजीभूत कर लिया हो । तभी एक कृष्ण नाम सर्व पाप को क्षय कर देता है शास्त्र के वाक्यों में रहस्य होता है वह रहस्य हम साधारण जीवों को समझ नहीं आता है संत वैष्णव और ऐसे विज्ञानी संतो का संग करने से उन्हें जो रहस्य पता चले हैं उन रहस्यों का हमें भी पता चलता है इसलिए संत । विशेषकर विज्ञानी संत का संग करके ऐसे वाक्यों के रहस्य को अवश्य समझना चाहिए । जय श्री राधे जय निताई समस्त वैष्णव जन को राधा दासी का प्रणाम

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