संतवचन

🌳श्री राधावल्लभ 🌳 🌹 श्री हरिवंश 🌹 🌹श्री प्रेमानन्द गोविन्दशरण बाबा जी श्री राधा केलि कुंज से कहते है," *प्रभु को दैन्यता अत्यंत प्रिय है .. ज्यूँ ज्यूँ साधक में दैन्यता बढ़ती जाती है ठाकुर की अपने साधक पर रीझ भी बढ़ती जाती है । रसिक संतों का , अचार्यों का , भक्तों के चरित्र श्रवण करने का यही रहस्य है .. क्योंकि हम जब उनके दिव्य चरित्र का , उनके त्याग , उनकी साधना के बारे में सुनते है , तब हमें समझ में आता है कि हमारी तो कोई स्थिति भी नही है , हमारे लिए तो अभी बहुत पथ तय करना है, हमारी साधना तो अभी बहुत छोटी है । ऐसी ही स्थिति में दैन्यता में अगर हम प्रभु के विरह में आकुल व्याकुल हो क्रंदन होने लगा तो समझना कि आध्यत्म के रास्ते खुल रहें हैं। दैन्यता से देह का अभिमान भी गलता है , जो भक्ति की पुष्टि करता है* 🙏🏻 🙏🏻🌹 *वाचो वेगं को भी धैर्य से नियंत्रण करना सीखना चाहिये। जिस बात से हमें और किसी को लाभ नहीं ,वहां मौन धारण रखो । यह वार्ता अनर्थ की वार्ता है । सब इंद्रियों पर नियंत्रण रखो । एक बार सोच लो , क्या मुझे यह कहना चाहिए, क्या यह मुझे देखना चाहिये , यह बोलना चाहिए, यह सुनना चाहिए , यह छूना चाहिए, अगर हम एक बार यह सब सोचे कि क्या यह हमारे लिए भगवादिक है ? यह हमारी साधना को पुष्ट करेगा ? ऐसी सोच भी हृदय में आनी अच्छी है । एक दूषित इन्द्रिय भी हमारे पतन का कार्य कर सकती है । सो साधक को सदा सावधान रहना चाहिए* *जो साधक समस्त इन्द्रियों के वेग को , अग्नि को सहन कर लेते है तो प्रभु बहुत प्रसन्न हो जाते हैं ,उनकों इस बात का प्रमाण मिल जाता है कि यह साधक टूटा नहीं, बिखरा नहीं , हारा नहीं बल्कि समस्त इन्द्रियों की अग्नि का वेग सहन कर मुझे प्राप्त करना चाहते हैं। जो साधक यह अग्नि सहता है उसी के ह्रदय में प्रियालाल जी के विरह की अग्नि प्रज्वलित होती है । प्रेम लक्षणा भक्ति यहीं से उदय होती है* । 🌹🌳 *हर एक अंतर्मन में ठाकुर बैठा है , उसी तरह जैसे अर्जुन के सारथी श्री कृष्ण है उसी तरह तुम्हारे भी हृदय में तुम्हारा सारथी बैठा है , केवल तुम्हें सुनने का अभ्यास करना चाहिए* 🌹🌳 *जन संसर्ग से बचना चाहिए ,उन्ही से वार्ता करो , वही वार्ता करो जिससे तुम्हारी भक्ति पुष्ट हो। जिनके संग से हमारी साधना भंग होती है तो ऐसे संग दोष से बचना चाहिए । एकांतिक साधना करो । अगर एक रुचि के लोग हो , अपने इष्ट की गोष्ठी हो रही हो ,तो लाभप्रद है* 🌹🙏🏻 🌹🌳 *गुरुदेव के द्वारा दिये गए निर्देश में , उनकी वाणी श्रवण में , उनके द्वारा प्रदत्त जप में उत्साह होना चाहिए । गुरूदेव के वचनों में दृढ़ विश्वास होना चाहिए*

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📿संत - स्वभाव 🙇🏻‍♂️ एक संत कपड़े सीकर अपना निर्वाह करते थे। एक ऐसा व्यक्ति उस नगर में था जो बहुत कपड़े सिलवाता था और उनसे ही सिलवाता था, लेकिन सदा सिलाई के रूप में खोटे सिक्के ही देता था। संत चुपचाप उसके सिक्के ले लेते थे। एक बार वे संत कहीं बाहर गये थे। उनकी दुकान पर उनका सेवक था। वह व्यक्ति सिलाई देने आया। सेवक ने सिक्का देखा और लौटा दिया। महोदय ! 'यह सिक्का खोटा है दूसरा दीजिए।' संत लौटे तो सेवक ने कहा, 'अमुक व्यक्ति खोटे सिक्के देकर मुझे ठगने आया था।' संत बोले, 'तुमने सिक्का ले क्यों नहीं लिया। वह तो सदा मुझे खोटे सिक्के ही देता है और उन्हें लेकर में भूमि में गाड़ देता हूं। मैं नहीं लूं तो कोई दूसरा व्यक्ति ठगा जाएंगा।'

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*श्री स्वामी रामसुखदास जी महाराज* 🌷संतवाणी🌷 यह खयाल करनेकी बात है कि मनुष्य-शरीर मिल गया । अब भाई अपनेको नरकोंमें नहीं जाना है । चौरासी लाख योनियोंमें नहीं जाना है । नीची योनियोंमें क्यों जायें ? चोरी करनेसे, हत्या करनेसे, व्यभिचार करनेसे, हिंसा करनेसे, अभक्ष्य-भक्षण करनेसे, निषिद्ध कार्य करनेसे मनुष्य नरकोंमें जा सकता है । कितना सुन्दर अवसर भगवान्‌ने दिया है कि जिसे देवता भी प्राप्त नहीं कर सकते, ऐसा ऊँचा स्थान प्राप्त किया जा सकता है‒इसी जीवनमें । प्राणोंके रहते-रहते बड़ा भारी लाभ लिया जा सकता है । बहुत शान्ति, बड़ी प्रसन्नता, बहुत आनन्द‒इसमें प्राप्त हो जाता है । ऐसी प्राप्तिका अवसर है मानव-शरीरमें । इसलिये इसकी महिमा है । इसको प्राप्त करके भी जो नीचा काम करते हैं, वे बहुत बड़ी भूल करते हैं ।

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जय श्री राधे एक करोड़ रुपये जैसे मैं कहूं कि मेरे एक हस्ताक्षर से आपको एक करोड़ रुपए तुरंत प्राप्त हो जाएंगे तो इस वाक्य के रहस्य को समझना होगा इसके लिए आवश्यक है कि मेरा किसी बैंक में एक खाता हो दूसरी शर्त है कि उस खाते की चेक बुक हो तीसरी शर्त है कि उस खाते में एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि हो चौथी बात है कि मैं आपके नाम का एक करोड़ रुपए का सही-सही चेक बनाऊं और उस पर हस्ताक्षर करूं । तब ही आपको एक करोड़ रुपए प्राप्त हो पाएंगे ऐसे ही जब शास्त्रों में कहा गया है कि एक कृष्ण नाम सर्व पाप को क्षय कर देता है उसके पीछे भी यही रहस्य है कि कृष्णनाम कि इतनी पूंजी हो । संख्या अनुशासन सहित हमारी नाम के प्रति श्रद्धा हो नाम की हमने आराधना करके इतना नाम पुंजीभूत कर लिया हो । तभी एक कृष्ण नाम सर्व पाप को क्षय कर देता है शास्त्र के वाक्यों में रहस्य होता है वह रहस्य हम साधारण जीवों को समझ नहीं आता है संत वैष्णव और ऐसे विज्ञानी संतो का संग करने से उन्हें जो रहस्य पता चले हैं उन रहस्यों का हमें भी पता चलता है इसलिए संत । विशेषकर विज्ञानी संत का संग करके ऐसे वाक्यों के रहस्य को अवश्य समझना चाहिए । जय श्री राधे जय निताई समस्त वैष्णव जन को राधा दासी का प्रणाम

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