शुभ----शुक्रवार

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*🔥ॐ श्री दुर्गादेव्यै नमः🔥* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* ⛅ *दिनांक 08 मई 2020* ⛅ *दिन - शुक्रवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - ग्रीष्म* ⛅ *मास - ज्येष्ठ (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार वैशाख)* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - प्रतिपदा दोपहर 01:01 तक तत्पश्चात द्वितीया* ⛅ *नक्षत्र - विशाखा सुबह 08:38 तक तत्पश्चात अनुराधा* ⛅ *योग - वरीयान् दोपहर 12:57 तक तत्पश्चातम परिघ* ⛅ *राहुकाल - सुबह 10:46 से दोपहर 12:24 तक* ⛅ *सूर्योदय - 06:06* ⛅ *सूर्यास्त - 19:04* ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - देवर्षि नारदजी जयंती* 💥 *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* 🌷 *सौभाग्य-रक्षा और सुख-शांति व समृद्धि बढ़ाने हेतु* 🌷 👩🏻 *माताएँ-बहनें रोज स्नान के बाद पार्वती माता का स्मरण करते-करते उत्तर दिशा की ओर मुख करके तिलक करें और पार्वती माता को इस मंत्र से वंदन करें :* 🌷 *“ॐ ह्रीं गौर्यै नम: |”* 👩🏻 *इससे माताओं –बहनों के सौभाग्य की रक्षा होगी तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ेगी |* 🙏🏻 *ऋषिप्रसाद – मई २०१९ से* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* 🌷 *ज्येष्ठ मास* 🌷 🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्। ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।।” जो एक समय ही भोजन करके ज्येष्ठ मास को बिताता है वह स्त्री हो या पुरुष, अनुपम श्रेष्ठ एश्‍वर्य को प्राप्त होता है।* 🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार ज्येष्ठ में तिल का दान बलवर्धक और मृत्युनिवारक होता है।* 🙏🏻 *ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन मूल नक्षत्र होने पर मथुरा में स्नान करके विधिवत् व्रत-उपवास करके भगवान कृष्ण की पूजा उपासना करते हुए श्री नारद पुराण का श्रवण करें तो भक्ति जन्म-जन्मान्तरों के पाप से मुक्त हो जाता है। माया के जाल से मुक्त होकर निरंजन हो जाता है। भगवान् विष्णु के चरणों में वृत्ति रखने वाला संसार के प्रति अनासक्त होकर फलस्वरूप जीव मुक्ति को प्राप्त करता हुआ वैकुंठ वासी हो जाता है।* 🙏🏻 *धर्मसिन्धु के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को तिलों के दान से अश्वमेध यज्ञ का फल होता है।* 🙏🏻 *ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी का व्रत किया जाता है।* 🙏🏻 *ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार शनि देव जी का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रात के समय हुआ था।* 🙏🏻 *ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा का पवित्र त्यौहार मनाया जाता है।* 🙏🏻 *ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है।* 🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 109 के अनुसार ज्येष्ठ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके जो भगवान त्रिविक्रम की पूजा करता है, वह गोमेध यज्ञ का फल पाता और अप्सराओं के साथ आनन्द भोगता है ।* 🌷 *विष्णुपुराण के अनुसार* *यमुनासलिले स्त्रातः पुरुषो* *मुनिसत्तम!* *ज्येष्ठामूलेऽमले पक्षे द्रादश्यामुपवासकृत् ।। ६-८-३३ ।।* *तमभ्यर्च्च्याच्युतं संम्यङू मथुरायां समाहितः ।* *अश्वमेधस्य यज्ञस्य प्राप्तोत्यविकलं फलम् ।। ६-८-३४ ।।* 🙏🏻 *ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी को मथुरापुरी में उपवास करते हुए यमुना स्नान करके समाहितचित से श्रीअच्युत का भलीप्रकार पूजन करने से मनुष्य को अश्वमेध-यज्ञ का सम्पूर्ण फल मिलता है।* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* *देवी पूजि पद कमल तुम्हारे*। *सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे*॥ *सुनु सिय सत्य असीस हमारी*। *पूजिहि मन कामना तुम्हारी*॥ 🕉🕉🎪🔥🚩🙏🙏🚩🔥🎪🕉🕉

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Shivani May 1, 2020

🙏🙏🙏 ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः 🙏 ॐ विष्णुप्रियायै नमो नमः 🙏 ॐ धनप्रदायै नमो नमः 🙏 ॐ विश्वजनन्यै नमो नमः 🙏🌺🌷🌼🌻🥀🏵️💮🌸💐🌹🙏🙏🙏 . *एक प्रयास... मुसाफिर कल भी था, मुसाफिर आज भी हूँ; कल अपनों की तलाश में था, आज अपनी तलाश में हूँ। न जाने कौन सी शोहरत पर आदमी को नाज है, जबकि आखरी सफर के लिए भी आदमी औरों का मोहताज है... आप सभी को सुबह का सादर नमस्कार 🙏 एक खूबसूरत मुस्कान के साथ आपका दिन मंगलमय हो 🍂G ⭕ ⭕ D 🍃 🍂〽⭕➰N❗NG🍃 हमे मनुष्य जीवन मिला है परहित की कामना के लिए।स्वयं का पेट मनुष्य के अतिरिक्त अन्य योनियो का भी भर जाता है।दुसरो की भलाई के लिए धन दौलत की नही, केवल समर्पण और दृढ़ इच्छा की जरूरत होती है।पढिये जीवन को सकारात्मक की ओर बढाने की कथा। जीवन चलने का नाम..... .एक अस्पताल में दो रोगी एक कमरे में दाखिल हुए। एक रोगी को खिड़की के पास बिस्तर मिला तो दुसरे को उससे कुछ दूरी पर। .दोनों का रोग चरम सीमा पर था इसलिए उस कमरे में दोनों के अतिरिक्त ओर कोई नही था।खिड़की के पास वाले रोगी को खिड़की से बाहर झाकते देखकर दुसरे रोगी को मन ही मन इर्ष्या होती थी... .किन्तु बीमारी की दशा में वह क्या तर्क वितर्क करे। यह सोचकर चुप रह जाता था। .बिस्तर में लेटे लेटे एक दिन जब वह बहुत उकता गया तो उसने अपने साथी रोगी से कहा... .“मित्र ! तुम्हारा बिस्तर तो खिड़की के समीप है अत: तुम मुझे खिड़की के बाहर क्या क्या हो रहा है देखकर जरा बताओ। ऐसा करने से मेरा मनोरंजन होगा”.. .“ठीक है सुनो” कहते हुए दुसरे रोगी ने बाहर के दृश्यों का सजीव वर्णन करना आरम्भ कर दिया। .बाहर एक लॉन है जिसमे चार गुलाब है.. उनमे से एक बड़ा गुलाबी रंग का है। लॉन के पास ही एक बच्चा हल्के हल्के कदमो से चल रहा है। .उसने अपनी माँ की उंगली पकड़ रखी है.. लो वह गिर पड़ा.. अब उसकी माँ ने उसे उठा लिया है तथा खूब प्यार कर रही है। बच्चा फिर से मुस्कुरा रहा है.. वह रोगी बोलता जाता। .इतना रोचक और सजीव वर्णन सुनते सुनते दुसरे रोगी को नीदं आ जाती। वह आराम से बिना दवाई लिए भी सो जाता था.. .जबकि घटना सुनाने वाले रोगी को बड़ी मुश्किल से नींद आ पाती थी।जागने पर बाते सुनने वाला रोगी फिर से फरमाइश करता कि उसका साथी ओर कुछ रोचक वर्णन करे। .उसका अनुरोध उसका साथी कभी नही टालता था। वह उसे नये नये दृश्यों का आँखों देखा हाल सुनाता रहता। .पहले रोगी की बाते सुनकर दुसरे रोगी का मनोरंजन तो खूब होता किन्तु वह अपनी ईर्ष्यालु प्रवृति के कारण फिर मन ही मन कुढ़ता कि उसका बिस्तर खिड़की के पास नही है। अत: असली आनन्द तो उसका साथी ले रहा है और जो सब कुछ देख भी पा रहा है.. उसे तो केवल सुनने को ही मिल रहा है.. इसे अपना दुर्भाग्य मानकर वह सोचता है कि “काश उसका पलंग उस खिड़की के पास होता ” .एक दिन रात को दृश्य का वर्णन करने वाले रोगी की स्थिति बहुत खराब हो गयी और वह चल बसा.. .अस्पताल के कर्मचारी उसे ले गये। अब पीछे केवल वह दूसरा रोगी ही कमरे में था.. जो एकदम अकेला रह गया था। उसे खिड़की के पास वाले पलंग पर लिटाने की व्यवस्था कर दी गयी। .मन ही मन रोगी अब सोच रहा था अब वह स्वयं आनन्द से उन दृश्यों को देखेगा जिसको वह केवल पहले वर्णन ही सुना करता था.. .जैसे ही उसने खिड़की के बाहर नजर डाली तो वह दंग रह गया..!! .खिड़की के बाहर तो कुछ भी नही था केवल एक लम्बी ऊँची दीवार थी जो अस्पताल की अंतिम दीवार थी। अस्पताल का विस्तार वहा खत्म था। .उसे सच्चाई समझते देर न लगी कि उसका उदार साथी इतना महान था.. .कि केवल उसका मन बहलाने के लिए अपनी कल्पना से ही, सुंदर सुंदर दृश्यों और घटनाओं का वर्णन सुनाया करता था। .वह जानता था कि मृत्यु कभी भी आ सकती है किन्तु इसके लिए विलाप करना आवश्यक नही माना.. वरन अन्तिम सांस तक सकारात्मक रहा व उसे निराश होने से रोकता रहा..... 🙏♥️🌹ॐ महालक्ष्मी नमो नमः🌹♥️🙏

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