शुभ मंगलवार

मित्रो आज शनिवार है, शनिमहाराजकी कृपा प्राप्त करने का सबसे सुगम और सटीक उपाय है, हनुमानजी महाराज की भक्ति। आज हम आपको इन्ही के बारे में कुछ बतायेंगे!!!!!!! आज हनुमानजी और शनि महाराज के एक प्रसंग का स्वाध्याय करेंगे, तुलसीदासजी कहते हैं- "संकट ते हनुमान छुड़ावें" शनि को हम संकट कहते हैं, एक बार हनुमानजी पहाड़ की तलहटी में बैठे थे तभी शनि महाराज हनुमानजी के सिर पर आ गये, हनुमानजी ने सिर खुजाया लगता है कोई कीड़ा आ गया, हनुमानजी ने पूछा तू है कौन? शनिदेव ने कहां- मैं शनि हूँ, मैं संकट हूँ, हनुमानजी ने कहा मेरे पास क्यो आये हो? शनि बोले मैं अब आपके सिर पर निवास करूँगा। हनुमानजी ने कहाँ- अरे भले आदमी, मैंने ही तुझे रावण के बंधन से छुड़वाया था और मेरे ही सिर पर आ गये, बोले हाँ क्यो छुड़ाया था आपने, इसका फल तो आपको भोगना पडे़गा, अच्छा कितने दिन रहना है? शनि बोला साढ़े सात साल और अच्छी खातिरदारी हो गयी तो ढाई साल और, हनुमानजी ने कहा भले आदमी किसी और के पास जाओं। मैं भला श्री रामजी का मजदूर आदमी, सुबह से शाम तक सेवा में लगा रहता हूँ, मुश्किल पड़ जाएगी, तुम भी दुःख भोगेगे और मुझे भी परेशान करोगे, शनिदेव ने कहा मैं तो नही जाऊंगा, हनुमानजी बोले कोई बात नही तुम ऐसे नही मानोगे, हनुमानजी ने एक बहुत बड़ा पत्थर उठाया और अपने सिर पर रखा, पत्थर शनिदेव के ऊपर आ गया, शनि महाराज बोले यह क्या कर रहे हो? बोले माँ ने कहा था कि चटनी बनाने के लिए एक बटना ले आना वह ले जा रहा हूँ, हनुमानजी ने जैसे ही पत्थर को उठाकर मचका दिया तो शनि चीं बोलने लगा, दूसरी बार किया तो बोले क्या करते हो? बोले चिन्ता मत करों, शनिदेव बोले- छोड़ो-छोड़ो, हनुमानजी बोले नहीं अभी तो साढ़े सात मिनट भी नहीं हुये है, तुम्हें तो साढ़े सात साल रहना है। जब दो-तीन मचके ओर दिये तो शनिदेव तिलमिला गये, शनिदेव ने कहा भैय्या मेरे ऊपर कृपा करो, बोले ऐसी कृपा नही करूँगा, बोले वरदान देकर जाओं, शनि का ही दिन था, हनुमानजी ने कहा कि तुम मेरे भक्तो को सताना बंद करोगे, तब शनि ने कहा कि हनुमानजी के जो भी भक्त शनिवार को आपका स्मरण करेगा आपके चालीसा का पाठ करेगा मैं उसके यहाँ नही, बल्कि उसके पडोसी के वहाँ भी कभी नही जाऊंगा, उसका संकट दूर हो जायेगा। फिर शनिदेव ने कहा कि हनुमानजी एक कृपा आप भी मुझ पर कर दीजिये, हनुमानजी बोले क्या? शनिदेव बोले- आपने इतनी ज्यादा मेरी हड्डियां चरमरा दी हैं, इसलिये थोड़ी तेल मालिश हो जाये तो बड़ी कृपा हो जायें, हनुमानजी ने कहा कि ठीक है मैं अपने भक्तो को कहता हूँ कि शनिवार के दिन जो शनिदेव को तेल चढ़ायेंगा उसके संकट मैं स्वयं दूर करूँगा। दूसरा संकट क्या है? त्रिताप ही संकट है, दैविक, दैहिक तथा भौतिक ताप यही संकट है और इसकी मुक्ति का साधन क्या है? केवल भगवान् का सुमिरन, "राम राज बैठें त्रैलोका, हरषित भये गये सब सोका" रामराज कोई शासन की व्यवस्था का नाम नही है, रामराज मानव के स्वभाव की अवस्था का नाम है, समाज की दिव्य अवस्था का नाम है। आज कहते हैं कि हम रामराज लायेंगे, तो भाई-बहनों फिर राम कहाँ से लायेंगे? नहीं-नहीं व्यवस्था नहीं, वह अवस्था जिसको रामराज कहते हैं, रामराज्य की अवस्था क्या है? "सब नर करहिं परस्पर प्रीती, चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती" यह रामराज्य की अवस्था है, व्यवस्था कैसी भी हो अगर, व्यक्तियों की और समाज की यह अवस्था रहेगी तो शासन में कोई भी बैठो राज्य राम का ही माना जायेगा, राम मर्यादा है, धर्म है, सत्य है, शील है, सेवा है, समर्पण है, राम किसी व्यक्तित्व का नाम नही है, राम वृत्ति का नाम है, स्वरूप का नाम राम नहीं है बल्कि स्वभाव का नाम राम है, इस स्वभाव के जो भी होंगे वे सब राम ही कहलायेंगे, वेद का, धर्म की मर्यादा का पालन हो, स्वधर्म का पालन हो, यही रामराज्य है। स्वधर्म का अर्थ हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध धर्म का पालन नही है, स्वधर्म का अर्थ है जिस-जिस का जो-जो धर्म है, पिता का पुत्र के प्रति धर्म, पुत्र का पिता के प्रति धर्म, स्वामी का धर्म, सेवक का धर्म, राजा का धर्म, प्रजा का धर्म, पति का धर्म, पत्नी का धर्म, शिक्षक का धर्म, शिष्य का धर्म। यानी अपने-अपने कर्तव्य का पालन, जैसे सड़क पर अपनी-अपनी लाईन में यदि वाहन चलेंगे तो किसी प्रकार की टकराहट नही होगी, संघर्ष नही होगा और जब आप लाईन तोड़ देंगे जैसे मर्यादा की रेखा जानकीजी ने तोड़ दी थी, आखिर कितने संकट में फँस गयी, कितना बड़ा युद्ध करना पड़ा जानकीजी को छुड़ाने के लियें। जरा सी मर्यादा का उल्लंघन जीवन को कितने बड़े संकट में फँसा सकता है, जो रामराज्य में रहेगा हनुमानजी उसके पास संकट आने ही नही देंगे, क्योंकि रामराज्य के मुख्य पहरेदार तो श्रीहनुमानजी महाराज हैं, तीनों कालों का संकट हनुमानजी से दूर रहता है, संकट होता है- शोक, मोह और भय से, भूतकाल का भय ऐसा क्यों कर दिया, ऐसा कर देता तो मोह होता है। वर्तमान में जो कुछ सुख साधन आपके पास हैं यह बना रहे, इसको पकड़कर बैठना यह मोह और भय होता है, भविष्यकाल में कोई छीन न ले कोई लूट न ले, भविष्य का भय की मेरा क्या होगा? भाई-बहनों आपको भविष्य की चिंता छोड देना, क्योंकि, हनुमानजी सब कालों में विधमान हैं, "चारों जुग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा" हनुमानजी तो अमर हैं। चारों युगों में हैं सम्पूर्ण संकट जहाँ छूट जाते हैं शोक, मोह, भय वह है भगवान् श्री रामजी की कथा, कथा में हनुमानजी रहते हैं, अगर वृत्तियाँ न छूटे तो हनुमानजी छुड़ा देंगे, बिल्कुल मानस के अंत में पार्वतीजी ने प्रमाणित किया है, "सुनि भुसुंडि के बचन सुहाये, हरषित खगपति पंख फुलाये" तीनों संकट अगर दूर चले जाते हैं, या छोड़ देते हैं, मनुष्य को तो वह श्रीराम की कृपा मिल जाती है, और उस कृपा से मोह का नाश होता है, बिनु सतसंग न हरि कथा, तेहि बिनु मोह न भाग। मोह गएँ बिनु राम पद, होय न दृढ़ अनुराग।। भगवत कथा, सत्संग यह मोह का नाश करती है, संत-मिलन संत-दर्शन शोक को दूर करता है "तोहि दैखि वेग शीतल भई छाती" जैसे हनुमानजी मिले तो जानकीजी का ह्रदय शान्त हो गया, शीतल हो गया, हनुमानजी के प्रति श्रद्धा रखियें, श्रद्धा से भय का नाश होता है, आपके मन में यदि भगवान् के प्रति श्रद्धा है तो आप कभी किसी से भयभीत नही होंगे। जय श्री रामजी जय श्री हनुमानजी

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Manoj manu Sep 15, 2020

🚩🙏🌹जय श्री राम जी 🌹🌿🙏 🌹🌿आपदामपहर्तारं दातारां सर्वसम्पदाम्। 🌿लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो-भूयो नामाम्यहम्॥ जीवन (जीवित प्राणियों) के सभी प्रकार के प्रतिकूल परिस्थितियों और पीड़ा को कौन निकालता है, जो सभी तरह के पक्ष, सम्मान और धन प्रदान करता है, जिन्हें देखकर दुनियाँ बहुत प्रसन्न महसूस करती है, उन श्रीराम के लिए, मैं बार-बार अपना सर झुकाता हूँ। 🌹रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। 🌿रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥ श्री रामभद्रा को, श्री रामचंद्र को, वेदों के स्वामी के लिए, रघु कबीले के प्रमुख को, सभी संसारों के स्वामी और सीता के भगवान के लिए, भगवान राम को मेरा नमस्कार है। 🌹.नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं। --सीतासमारोपितवामभागम। 🌿पाणौ महासायकचारूचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम॥ कमल की तरह नील रंग और कोमल कौन है, जिनके शरीर के अंग बहुत नरम हैं, जिनकी बाईंओर सीता जो उनकी अपनी प्रिय पत्नी है, जिनके हाथों में एक दिव्य तीर और एक सुंदर धनुष है, मैं उस राजवंश के भगवान श्री राम से प्रार्थना करता हूं।🌹🌿प्रभु श्री रामचंद्र जी सदा सहाय करें,सदा मंगल प्रदान करें जय सियाराम जी 🌹🙏

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Ajay Verma Sep 15, 2020

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Ajay Verma Sep 1, 2020

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