शनिदेवजी

शनि के तीन पौराणिक, आसान परन्तु अत्यधिक प्रभावशाली उपाय *********************************************** १. #भविष्यपुराण के अनुसार राज्य नष्ट हुए राजा नल को शनिदेव ने स्वप्न में अपने एक प्रार्थना मंत्र का उपदेश दिया था। उसी नाम-स्तुति से उन्हें पुनः राज्य उपलब्ध हुआ था। उस स्तुति से शनि की प्रार्थना करनी चाहिए। सर्वकामप्रद वह स्तुति इस प्रकार है ॐ क्रोडं नीलाञ्जनप्रख्यं नीलवर्णसमस्रजम्। छायामर्तण्डसंभूतं नमस्यामि शनैश्चरम्॥ नमोऽर्कपुत्राय शनैश्चराय नीहारवर्णाञ्जमेचकाय। श्रुत्वा रहस्यं भवकामदश्च फलप्रदो मे भव सूर्यपुत्र​॥ नमोऽस्तु प्रेतराजाय कृष्ण्देहाय वै नमः। शनैश्चराय क्रूराय शुद्धबुद्धिप्रदायिने॥ य एभिर्नामभिः स्तौति तस्य तुष्टो भवाम्यहम्। मदीयं तु भयं तस्य स्वप्नोऽपि न भविष्यति॥ २. शिवपुराण #शतरूद्रसंहिता के अनुसार 'गाधि' (विश्वामित्र के पिता), पिप्पलाद व कौशिक (विश्वामित्र) इस त्रयी का स्मरण करने से शनि पीड़ा नहीं होती। ३. #पद्मपुराण, उत्तरखण्ड तथा #स्कन्दपुराण, प्रभासखण्ड में वर्णित दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ नमः कृष्णाय नीलाय शितिकंठनिभाय च | नमः कालाग्नि रूपाय कृतान्ताय च वै नमः || नमो निर्मोसदेहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च | नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते || नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णे च वै पुनः | नमो दीर्घाय शुष्काय कालद्रंष्ट नमोस्तुते|| नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरिक्ष्याय वै नमः| नमो घोराय रौद्राय भीषणाय करालिने || नमस्ते सर्व भक्षाय बलि मुख नमोस्तुते| सूर्य पुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च || अधोदृष्टे नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोस्तुते| नमो मंद गते तुभ्यम निंस्त्रिशाय नमोस्तुते || तपसा दग्धदेहाय नित्यम योगरताय च| नमो नित्यम क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः|| ज्ञानचक्षुर्नमस्ते ऽस्तु कश्यपात्मजसूनवे | तुष्टो ददासि वै राज्यम रुष्टो हरसि तत्क्षणात || देवासुर मनुष्याश्च सिद्धविद्याधरोरगा | त्वया विलोकिताः सर्वे नाशं यान्ति समूलतः|| प्रसादं कुरु में देव वराहोरऽहमुपागतः ||

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर