व्रतविधि

onkar singh sandu Jul 23, 2019

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Deepika Bhansali Jul 22, 2019

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Prince Trivedi Jul 22, 2019

*🚩🙏चतुर्मास  के चार महीनों में मथुरा और वृंदावन जाना सबसे अधिक फलदाई🌹🌍🌲* *💎अगर आप भी अगले 4 महीने के भीतर किसी तीर्थ यात्रा पर जाने का मन बनाए हुए हैं तो अपने विचार बदल दीजिए।कारण यह है कि इन दिनों किसी भी तीर्थ की यात्रा करने पर आपको तीर्थयात्रा का पुण्य नहीं मिलेगा। अगर आप तीर्थयात्रा से पुण्य पाना चाहते हैं तो बस एक तीर्थ ऐसा है जहां जाने पर सभी तीर्थों की यात्रा का पुण्य एक साथ मिल जाएगा।*  *🙏इसके लिए श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और वृंदावन जाना सबसे अधिक पुण्यकारी होगा।चतुर्मास में दुनिया के किसी भी तीर्थ पर जाने से ज्यादा पुण्य मथुरा और वृंदावन जाने का होता है। इस साल 12 जुलाई से चतुर्मास की शुरुआत है।🙏* *🌱वेद-पुराणों में ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का बहुत महत्व है, ब्रज भूमि भगवान श्रीकृष्ण एवं उनकी शक्ति राधा रानी की लीला भूमि है। इस परिक्रमा के बारे में वारह पुराण में बताया गया है कि पृथ्वी पर 66 अरब तीर्थ हैं और वे सभी चातुर्मास में ब्रज में आकर निवास करते हैं।* *🌞अगर आपकी धर्म-कर्म के कार्यों और तीर्थ यात्रा में रुचि है तो आपको पता होगा कि प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है , लेकिन श्रीगर्ग संहिता में एक प्रसंग आता है, जब स्वयं तीर्थराज प्रयाग मथुरामंडल का पूजन करते हैं।💎* *🌍श्रीगर्ग संहिता के अनुसार, पौराणिक काल में शंखासुर नाम का एक दैत्य था। एक बार शंखासुर ने उस समय ब्रह्माजी के वेदों को पोथी चुरा ली, जब वह गहन निद्रा में थे। वेद चुराकर शंखासुर समुद्र में जा छिपा। तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया और समुद्र में जाकर शंखासुर का वध कर दिया और प्रयाग पहुंचकर ब्रह्माजी को सारे वेद सौंप दिए। इसके साथ ही प्रयाग को तीर्थ राज की उपाधि भी दे दी।* *🍀श्रीहरि द्वारा प्रयागराज को तीर्थ बनान के बाद जंबू द्वीप के सभी तीर्थों ने प्रयागराज का पूजन किया। लेकिन मथुरा और वृंदावन वहां नहीं पहुंचे। एक दिन नारद जी ने आकर प्रयागराज से कहा कि सभी तीर्थों ने तुम्हारा पूजन किया लेकिन मथुरामंडल ने नहीं। अर्थात व्रज क्षेत्र ने तुम्हारा तिरस्कार किया है!* *🌹नारद मुनी की बात प्रयागराज के लग गई।इस पर तीर्थराज प्रयाग नाराज हुए और ब्रज पर सभी तीर्थों को लेकर आक्रमण कर दिया। तीर्थराज को हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद तीर्थराज सभी तीर्थों को लेकर भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा के पास गए और आप बीती सुनाई। इस पर भगवान विष्णु ने तीर्थराज प्रयाग को समझाया कि ब्रज पर आक्रमण करने वाले की हार निश्चित है।*   *🙏🌞वह भगवान श्रीहरि के पास पहुंचे और   तीर्थराज    बोले, भगवन आपने मुझे तीर्थराज बनाया है लेकिन व्रज भूमि के अंहकारी तीर्थों ने मेरा तिरस्कार किया है।इस पर श्रीहरि ने उत्तर दिया, मैंने तुम्हें पृथ्वी के सब तीर्थों का राजा अवश्य बनाया हैकिंतु अपने घर का राजा बना दिया है, ऐसा तो नहीं है। मथुरामंडल मेरा परम धाम है, उस दिव्य धाम का प्रलय में भी संहार नहीं होता।🙏🌱🔥* *🚩भगवान विष्णु के मुख से मथुरामंडल के विषय में ऐसी बातें सुनकर तीर्थराज प्रयाग ने स्वयं मथुरामंडल और व्रज भूमि का पूजन किया। इस कारण मथुरा और व्रज का महत्व प्रयागराज सेभी अधिक है। यह साक्षात विष्णु भगवान का प्रिय धाम है। ऐसे में चतुर्मास के दौरान किसी भी तीर्थ पर जाने से कहीं अधिक पुण्य मथुरा-व्रज धाम तीर्थ की यात्रा से प्राप्त होता है।*🚩🌲👍 *🌍🚗चतुर्मास के दौरान वर्षा ऋतु रहती है। वहीं हिंदू धर्म के अधिकांश तीर्थ पहाड़ी एरिया में स्थित हैं। बरसात के मौसम में पहाड़ी क्षेत्र की यात्रा करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं हैं। वहीं, मथुरा और व्रज क्षेत्र समतल भूमि पर स्थित तीर्थ है।सामाजिक दृष्टि से इसलिए भी चतुर्मास में मथुरा-वृंदावन की यात्रा को प्रमुखता दी जाती है।* *❌❌चतुर्मास के दौरान शादी, ग्रह प्रवेश और नए व्यवसाय का उद्घाटन जैसे कार्य करने की मनाही होती है, क्योंकि इन कार्यों के प्रारंभ में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और चतुर्मास में भगवान विष्णु सोए हुए होते हैं। इसलिए गृहस्थ और कारोबार संबंधी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।*❌❌ *🚫🚫इन चतुर्मास में भगवान विष्णु अपने भक्त राजा बलि के पास पाताल लोक में रहते हैं। इस समय भगवान विष्णु को पृथ्वी लोक में सोया हुआ माना जाता है। इसलिए शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस काल में पूजा-पाठ करना अतिशुभ माना जाता है।*🚫🚫 *॥ 🎄श्रीभागवतसूत्र 🎄॥*  *आदौ देवकिदेविगर्भजननं गोपीगृहे वर्धनम् मायापूतनजीवितापहरणं गोवर्धनोद्धारणम् ॥ कंसच्छेदनकौरवादिहननं कुंतीसुतां पालनम् एतद्भागवतं पुराणकथितं श्रीकृष्णलीलामृतम्* ॥  🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 *॥ 🎄गीतास्तव🎄 ॥*  *पार्थाय प्रतिबोधितां भगवता नारायणेन स्वयम् व्यासेनग्रथितां पुराणमुनिना मध्ये महाभारते अद्वैतामृतवर्षिणीं भगवतीमष्टादशाध्यायिनीम् अम्ब त्वामनुसन्दधामि भगवद्गीते भवेद्वेषिणीम्* ॥  🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *🌻सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः । पार्थो वत्सः सुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं महत्* ॥  *👍Jai Shree Mahakal🙏*

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