विष्णु-लक्ष्मी

Babita Sharma Oct 13, 2020

साँस-साँस पर कृष्ण भज, वृथा साँस मत खोय। ना जाने या साँस को आवन होय, न होय।। अधिकमास की परम एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें।श्री हरि सर्व जगत का कल्याण करें।हरि ॐ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे आज है अधिक मास का आखिरी एकादशी व्रत, जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त: अधिक मास की आखिरी एकादशी परम एकादशी के नाम से जानी जाती है। परम एकादशी परम पावन है। मान्यता है कि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है जो भी व्यक्ति एकादशी की तिथि पर व्रत रखता है वह भगवान विष्णु के प्रिय भक्तों की श्रेणी में शामिल हो जाता है। इसलिए अधिक मास में आने वाली एकादशी का महत्व और भी अधिक माना गया है। परम एकादशी शुभ मुहूर्त: शुभ मुहूर्त – 13 अक्तूबर, मंगलवार – रात 8 बजकर 40 मिनट से रात 10 बजकर 10 मिनट तक एकादशी तिथि आरंभ – 12 अक्तूबर, सोमवार – दोपहर 4 बजकर 38 मिनट से एकादशी तिथि समाप्त – 13 अक्तूबर, मंगलवार – दोपहर 2 बजकर 35 मिनट तक परम एकादशी की कथा (Parama Ekadashi Ki Katha) काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ निवास करता था। ब्राह्मण बहुत धर्मात्मा था और उसकी पत्नी पतिव्रता स्त्री ‍थी। यह परिवार बहुत सेवाभावी था। दोनों स्वयं भूखे रह जाते, परंतु अतिथियों की सेवा हृदय से करते थे। धन के अभाव के कारण एक दिन ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहा- धनोपार्जन के लिए मुझे परदेश जाना चाहिए। क्योंकि इतने कम धनोपार्जन से परिवार चलाना अति कठिन काम है। ब्राह्मण की पत्नी ने कहा- मनुष्य जो कुछ पाता है, वह अपने भाग्य से ही पाता है। हमें पूर्व जन्म के कर्मानुसार उसके फलस्वरूप ही यह गरीबी मिली है अत: यहीं रहकर कर्म कीजिए, जो प्रभु की इच्छा होगी वही होगा।पत्नी की बात ब्राह्मण को जंच गई और उसने परदेश जाने का विचार त्याग दिया। एक दिन संयोगवश कौण्डिल्य ऋषि उधर से गुजर रहे थे, जो ब्राह्मण के घर पधारे। ऋषि कौण्डिल्य को अपने घर पाकर दोनों अति प्रसन्न हुए। उन्होंने ऋषि की खूब सेवा की। उनका सेवाभाव देखकर ऋषि काफी खुश हुए और पति-पत्नी द्वारा गरीबी दूर करने का प्रश्न पूछने पर ऋषि ने उन्हें मलमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली पुरुषोत्तमी एकादशी करने की प्रेरणा दी। व्रती को एकादशी के दिन स्नान करके भगवान विष्णु के समक्ष बैठकर हाथ में जल एवं फूल लेकर संकल्प करना चाहिए। इसके पश्चात भगवान की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा देकर विदा करने के पश्चात व्रती को स्वयं भोजन करना चाहिए उन्होंने कहा कि इस एकादशी का व्रत दोनों रखें। यह एकादशी धन-वैभव देती है तथा पापों का नाश कर उत्तम गति भी प्रदान करने वाली होती है। धनाधिपति कुबेर ने भी इस एकादशी व्रत का पालन किया था जिससे प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें धनाध्यक्ष का पद प्रदान किया। ऋषि की बात सुनकर दोनों आनंदित हो उठे और समय आने पर सुमेधा और उनकी पत्नी ने विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत रखा जिससे उनकी गरीबी दूर हो गई और पृथ्वी पर काफी वर्षों तक सुख भोगने के पश्चात वे पति-पत्नी श्रीविष्णु के उत्तम लोक को प्रस्थान कर गए। अत: हे नारद! जो कोई मनुष्य विधिपूर्वक इस व्रत को करेगा, भगवान विष्णु निश्‍चित ही कल्याण करते हैं। जय श्री कृष्ण 🙏⚘⚘ हरि ॐ नमो नारायण 🙏

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*🕉🔥ॐ श्री विष्णुवे नमः🔥🕉* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* ⛅ *दिनांक 08 अक्टूबर 2020* ⛅ *दिन - गुरुवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - दक्षिणायन* ⛅ *ऋतु - शरद* ⛅ *मास - अधिक अश्विन* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - षष्ठी शाम 04:36 तक तत्पश्चात सप्तमी* ⛅ *नक्षत्र - मॄगशिरा रात्रि 10:50 तक तत्पश्चात आर्द्रा* ⛅ *योग - वरीयान् 09 अक्टूबर रात्रि 01:44 तक तत्पश्चात परिघ* ⛅ *राहुकाल - दोपहर 01:54 से शाम 03:23 तक* ⛅ *सूर्योदय - 06:33* ⛅ *सूर्यास्त - 18:18* ⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण* - 💥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* 🌷 *नौकरी की समस्या या घर में परेशानी* 🌷 ➡ *नौकरी की परेशानी हो तो ५ बत्तीवाली दिया मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी की मूर्ति के सामने जलाएं | संकल्प करें कि हमारी ये समस्या है,प्रभु दूर हो जाये| जरुर दूर होगी |* 🏡 *घर में ज्यादा कष्ट और परेशानियाँ हो तो घर में पूजा की जगह प़र रोज ५ बत्ती वाली दिया जलाएं और संकल्प करें कि हमारी ये समस्या दूर हो जाये|* 🙏🏻 *श्री सुरेशानंदजी, किशनगढ़(शाम) १९ दिसम्बर २०१०* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* 🌷 *आँवला रस* 🌷 🍏 *यह कान्ति, नेत्रज्योति व वीर्य वर्धक, त्रिदोषशामक तथा दाहनाशक है | यह दीर्घायु, स्फूर्ति, ताजगी तथा यौवन प्रदाता है | पाचनतंत्र को मजबूती तथा ह्रदय व मस्तिष्क को शक्ति देनेवाला है | आँखों व पेशाब की जलन, अम्लपित्त, श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर, बवासीर आदि में लाभदायी है | यह हड्डियाँ, दाँत व बालों की जड़ें मजबूत एवं बालों को काला बनाता है |* 🙏🏻 *स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* 🌷 *स्वप्नदोष, धातु सम्बंधित तकलीफें* 🌷 👉🏻 *जिसको स्वप्नदोष, धातु सम्बंधित तकलीफें हैं, उनके लिए सरल उपाय हैं, सूर्य-अस्त क बाद अँधेरा होने क पहले, पश्चिम (west) में एक ही तारा होता हैं- शुक्र का तारा , वहा चमकता हैं। उसको यह मंत्र बोले:* 🌷 *हेमकुंदमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् |* *सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्‍यहम् ||* 🌷 *ॐ शुक्राय नमः* 🔥 *अगर घर पर हो तो दीपक भी दिखा दें नहीं तो सिर्फ़ मंत्र बोले. स्वप्नदोष, धातु की तकलीफों में बहुत लाभ होता हैं, शरीर में शुक्र मजबूत होता हैं ।* 👉🏻 *कोई खर्चा नहीं हैं.कोई भी दिन कर सकते हैं। शुक्रवार को करो तो और अच्छा हैं ।* 🙏🏻 *-श्री सुरेशानंदजी 30th Jan09, Mumbai* *🕉🎪हिन्दू पंचांग🎪🕉* *बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा*। *सुरुचि सुबास सरस अनुरागा*॥ *अमिअ मूरिमय चूरन चारू*। *समन सकल भव रुज परिवारू*॥ *🙏🎪🔥🚩⛳हरि ॐ⛳🚩🔥🎪🙏*

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B.G.Agrawal Sep 24, 2020

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