विष्णुमंत्र

Gayatri Kulkarni Dec 30, 2020

॥श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् विष्णुपुराणान्तर्गतम्॥ श्रीगणेशाय नमः। श्रीपराशर उवाच सिंहासनगतः शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुनः। देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां ततः॥ १॥ इन्द्र उवाच नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्जसम्भवाम्। श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥ २॥ पद्मालयां पद्मकरां पद्मपत्रनिभेक्षणाम् वन्दे पद्ममुखीं देवीं पद्मनाभप्रियाम्यहम्॥ ३॥ त्वं सिद्धिस्त्वं स्वधा स्वाहा सुधा त्वं लोकपावनी। सन्ध्या रात्रिः प्रभा भूतिर्मेधा श्रद्धा सरस्वती॥ ४॥ यज्ञविद्या महाविद्या गुह्यविद्या च शोभने। आत्मविद्या च देवि त्वं विमुक्तिफलदायिनी॥ ५॥ आन्वीक्षिकी त्रयीवार्ता दण्डनीतिस्त्वमेव च। सौम्यासौम्यैर्जगद्रूपैस्त्वयैतद्देवि पूरितम्॥ ६॥ का त्वन्या त्वमृते देवि सर्वयज्ञमयं वपुः। अध्यास्ते देवदेवस्य योगचिन्त्यं गदाभृतः॥ ७॥ त्वया देवि परित्यक्तं सकलं भुवनत्रयम्। विनष्टप्रायमभवत्त्वयेदानीं समेधितम्॥ ८॥ दाराः पुत्रास्तथाऽऽगारं सुहृद्धान्यधनादिकम्। भवत्येतन्महाभागे नित्यं त्वद्वीक्षणान्नृणाम्॥ ९॥ शरीरारोग्यमैश्वर्यमरिपक्षक्षयः सुखम्। देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्॥ १०॥ त्वमम्बा सर्वभूतानां देवदेवो हरिः पिता। त्वयैतद्विष्णुना चाम्ब जगद्व्याप्तं चराचरम्॥ ११॥ मनःकोशस्तथा गोष्ठं मा गृहं मा परिच्छदम्। मा शरीरं कलत्रं च त्यजेथाः सर्वपावनि॥ १२॥ मा पुत्रान्मा सुहृद्वर्गान्मा पशून्मा विभूषणम्। त्यजेथा मम देवस्य विष्णोर्वक्षःस्थलाश्रये॥ १३॥ सत्त्वेन सत्यशौचाभ्यां तथा शीलादिभिर्गुणैः। त्यज्यन्ते ते नराः सद्यः सन्त्यक्ता ये त्वयाऽमले॥ १४॥ त्वयाऽवलोकिताः सद्यः शीलाद्यैरखिलैर्गुणैः। कुलैश्वर्यैश्च पूज्यन्ते पुरुषा निर्गुणा अपि॥ १५॥ सश्लाघ्यः सगुणी धन्यः स कुलीनः स बुद्धिमान्। स शूरः सचविक्रान्तो यस्त्वया देवि वीक्षितः॥ १६॥ सद्योवैगुण्यमायान्ति शीलाद्याः सकला गुणाः। पराङ्गमुखी जगद्धात्री यस्य त्वं विष्णुवल्लभे॥ १७॥ न ते वर्णयितुं शक्तागुणाञ्जिह्वाऽपि वेधसः। प्रसीद देवि पद्माक्षि माऽस्मांस्त्याक्षीः कदाचन॥ १८॥ श्रीपराशर उवाच एवं श्रीः संस्तुता सम्यक् प्राह हृष्टा शतक्रतुम्। शृण्वतां सर्वदेवानां सर्वभूतस्थिता द्विज॥ १९॥ श्रीरुवाच परितुष्टास्मि देवेश स्तोत्रेणानेन ते हरेः। वरं वृणीष्व यस्त्विष्टो वरदाऽहं तवागता॥ २०॥ इन्द्र उवाच वरदा यदिमेदेवि वरार्हो यदिवाऽप्यहम्। त्रैलोक्यं न त्वया त्याज्यमेष मेऽस्तु वरः परः॥ २१॥ स्तोत्रेण यस्तवैतेन त्वां स्तोष्यत्यब्धिसम्भवे। स त्वया न परित्याज्यो द्वितीयोऽस्तुवरो मम॥ २२॥ श्रीरुवाच त्रैलोक्यं त्रिदशश्रेष्ठ न सन्त्यक्ष्यामि वासव। दत्तो वरो मयाऽयं ते स्तोत्राराधनतुष्ट्या॥ २३॥ यश्च सायं तथा प्रातः स्तोत्रेणानेन मानवः। स्तोष्यते चेन्न तस्याहं भविष्यामि पराङ्गमुखी॥ २४॥ श्रीपाराशर उवाच एवं वरं ददौ देवी देवराजाय वै पुरा। मैत्रेय श्रीर्महाभागा स्तोत्राराधनतोषिता॥ २५॥ भृगोः ख्यात्यां समुत्पन्ना श्रीः पूर्वमुदधेः पुनः। देवदानवयत्नेन प्रसूताऽमृतमन्थने॥ २६॥ एवं यदा जगत्स्वामी देवराजो जनार्दनः। अवतारः करोत्येषा तदा श्रीस्तत्सहायिनी॥ २७॥ पुनश्चपद्मा सम्भूता यदाऽदित्योऽभवद्धरिः। यदा च भार्गवो रामस्तदाभूद्धरणीत्वियम्॥ २८॥ राघवत्वेऽभवत्सीता रुक्मिणी कृष्णजन्मनि। अन्येषु चावतारेषु विष्णोरेखाऽनपायिनी॥ २९॥ देवत्वे देवदेहेयं मानुषत्वे च मानुषी। विष्णोर्देहानुरुपां वै करोत्येषाऽऽत्मनस्तनुम्॥ ३०॥ यश्चैतशृणुयाज्जन्म लक्ष्म्या यश्च पठेन्नरः। श्रियो न विच्युतिस्तस्य गृहे यावत्कुलत्रयम्॥ ३१॥ पठ्यते येषु चैवर्षे गृहेषु श्रीस्तवं मुने। अलक्ष्मीः कलहाधारा न तेष्वास्ते कदाचन॥ ३२॥ एतत्ते कथितं ब्रह्मन्यन्मां त्वं परिपृच्छसि। क्षीराब्धौ श्रीर्यथा जाता पूर्वं भृगुसुता सती॥ ३३॥ इति सकलविभूत्यवाप्तिहेतुः स्तुतिरियमिन्द्रमुखोद्गता हि लक्ष्म्याः। अनुदिनमिह पठ्यते नृभिर्यैर्वसति न तेषु कदाचिदप्यलक्ष्मीः॥ ३४॥ ॥ इति श्रीविष्णुपुराणे महालक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

+44 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 23 शेयर

🎎🌲🔯श्रावण माह विशेष🔯🌲🎎 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🚩🐚🌹ॐ विष्णु देवाय नमः 🌹🐚🚩 ☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️ 🚩🌿🔱 ॐ नमः शिवाय🔱🌿🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🌺🍀🐚 शुभ गुरुवार🐚🍀🌺 🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎 🥀🌲🌻सुप्रभात 🌻🌲🥀 🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅 👏आपको सपरिवार पवित्र श्रावण माह के कामदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🎭आप और आपके पूरे परिवार पर श्री हरि विष्णु जी मां लक्ष्मी जी महादेव जी की आशिर्वाद हमेशा बनी रहे और सभी मनोकमनाएं पूर्ण हो🌸 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 🎭आपका गुरुवार का दिन शुभ अतिसुन्दर💐 🌹 शांतिमय और मंगल ही मंगलमय व्यतीत हो 🍑 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🌹स्तुति मंत्र से होते हैं भगवान विष्णु प्रसन्न🌹 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🎭आज हर आदमी व्यस्त है और इस भागदौड़ भरी जिंदगी में पूजा-पाठ करने का ज्यादा समय नहीं मिल पाता है। ऐसे समय में इस छोटी-सी मंत्र स्तुति से भगवान विष्णु की उपासना करने से आप उनकी कृपा पा सकते हैं। अगर आप पूरे भाव से इस मंत्र स्तुति का जाप करेंगे तो निश्चित ही श्रीहरि नारायण आप पर प्रसन्न होकर हर क्षेत्र में विजयी होने का आशीर्वाद देंगे। 🎎 पवित्र विष्णु स्तुति-🎎 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्। लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्।। यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे:। सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा:। ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम:।। 🌹🐚ॐ विष्णु देवाय नमः 🐚🌹 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

+679 प्रतिक्रिया 146 कॉमेंट्स • 78 शेयर
आशुतोष Aug 19, 2020

श्री विष्‍णु के प्रमुख मंत्र भगवान विष्णु को समर्पित ये मंत्र इस प्रकार हैं। ये सभी मंत्र भगवान विष्णु की महानता के परिचायक हैं । ऊं नमोः नारायणाय ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय। विष्णु गायत्री महामंत्र- ऊं नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। विष्णु कृष्ण अवतार मंत्र- श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। विष्णु रूपं पूजन मंत्र- शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम। विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम। लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।। वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम। 🙏🙏 विष्णु भगवान से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य...🙏🙏 👇 👇

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 7 शेयर