विष्णु

कृपया🙏 "श्रीमद्भगवद्गीता प्रतिदिन"🙏 पेज को 👍 फौलो👍 करें और रोज सुबह ⛅🕖 और दोपहर 🌅🕒को भगवत गीता का एक श्लोक पढ़ें । अपना दिन मंगलमय बनायें । हरि बोल। 🕉🕉🕉🕉 प्रश्नोत्तर : श्लोक संख्या १५.१३ . प्रश्न १ : भगवान् किस प्रकार अपनी शक्ति से सभी लोकों को थामे हुए हैं ? इसे किस उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया गया है ? . उत्तर १ : "भगवान् प्रत्येक अणु, प्रत्येक लोक तथा प्रत्येक जीव में प्रवेश करते हैं । इसकी विवेचना ब्रह्मसंहिता में की गई है । उसमें कहा गया है - परमेश्र्वर का एक अंश, परमात्मा, लोकों में, ब्रह्माण्ड में, जीव में, तथा अणु तक में प्रवेश करता है । अतएव उनके प्रवेश करने से प्रत्येक वस्तु ठीक से दिखती है । जब आत्मा होता है तो जीवित मनुष्य पानी मैं तैर सकता है । लेकिन जब जीवित स्पूलिंग इस देह से निकल जाता है और शरीर मृत हो जाता है तो शरीर डूब जाता है । निस्सन्देह सड़ने के बाद यह शरीर तिनके तथा अन्य वस्तुओं के समान तैरता है । लेकिन मरने के तुरन्त बाद शरीर पानी में डूब जाता है । इसी प्रकार ये सारे लोक शून्य में तैर रहे हैं और यह सब उनमें भगवान् की परम शक्ति के प्रवेश के कारण है । उनकी शक्ति प्रत्येक लोक को उसी तरह थामे रहती है, जिस प्रकार धूल को मुट्ठी । मुट्ठी में बन्द रहने पर धूल के गिरने का भय नहीं रहता, लेकिन ज्योंही धूल को वायु में फैंक दिया जाता है, वह नीचे गिर पड़ती है । इसी प्रकार ये सारे लोक, जो वायु में तैर रहे हैं, वास्तव में भगवान् के विराट रूप की मुट्ठी में बँधे हैं । उनके बल तथा शक्ति से सारी चर तथा अचर वस्तुएँ अपने-अपने स्थानों पर टिकी हैं ।" . संदर्भ : श्रीमद्भगवद्गीता १५.१३, तात्पर्य, श्रील प्रभुपाद

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प्रश्नोत्तर : श्लोक संख्या १५.१९ . प्रश्न १ : इस श्लोक के सन्दर्भ में भजति शब्द अत्यन्त सार्थक क्यों है ? . उत्तर १ : "भजति शब्द अत्यन्त सार्थक है । कई स्थानों पर भजति का सम्बन्ध भगवान् की सेवा के अर्थ में व्यक्त हुआ है । यदि कोई व्यक्ति पूर्ण कृष्णभावनामृत में रत है अर्थात् भगवान् की भक्ति करता है, तो यह समझना चाहिए कि उसने सारे वैदिक ज्ञान समझ लिया है | वैष्णव परम्परा में यह कहा जाता है कि यदि कोई कृष्ण-भक्ति में लगा रहता है, तो उसे भगवान् को जानने के लिए किसी अन्य आध्यात्मिक विधि की आवश्यकता नहीं रहती | भगवान् की भक्ति करने के कारण वह पहले से लक्ष्य तक पँहुचा रहता है | वह ज्ञान की समस्त प्रारम्भिक विधियों को पार कर चुका होता है | लेकिन यदि कोई लाखों जन्मों तक चिन्तन करने पर भी इस लक्ष्य पर नहीं पहुँच पाता कि श्रीकृष्ण ही भगवान् हैं और उनकी ही शरण ग्रहण करनी चाहिए, तो उसका अनेक जन्मों का चिन्तन व्यर्थ जाता है |" . संदर्भ : श्रीमद्भगवद्गीता १५.१९, तात्पर्य, श्रील प्रभुपाद

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sunita Sharma Jul 19, 2019

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Shivani Jul 19, 2019

🙏❤💗💜💖 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः🙏 नमः🙏🙏💖💗💖💖💖 🙏🙏❤💗💖 ओम नामे भगवते वासुदेवया यह एक प्रसिद्ध हिन्दू मंत्र है।🙏💖❤💗❤ यह मंत्र भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों का मंत्र है।🙏💖 इसमें दो परंपराएं हैं-तांत्रिक और पुराणिक। तांत्रिक पंरपराये में ऋषि प्रजापति आते है और पुराणिक पंरपरा में ऋषि नारदा जी आते है। हालांकि, दोनों कहते हैं कि यह सर्वोच्च विष्णु मंत्र है। 🙏💜💖❤💗शारदा तिलक तन्त्रम कहते है कि ‘देवदर्शन महामंत्र् प्राधन वैष्णवगाम’ बारह वैष्णव मंत्रों में यह मत्रं प्रमुख हैं।🙏 इसी प्रकार ‘श्रीमद् भगवतम्’ के 12 अध्याय को इस मंत्र के 12 अक्षर के विस्तार के रूप में लिए गए है। इस मंत्र को मुक्ति का मंत्र कहा जाता है और मोक्ष प्राप्त करने के लिए एक आध्यात्मिक सूत्र के रूप में माना जाता है। 🙏 मंत्र ‘श्रीमद् भगवतम्’ का प्रमुख मंत्र है इस मंत्र का वर्णन विष्णु पुराण में भी मिलता है।🙏🙏🙏❤🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का अर्थ:🙏❤💗💜💖 ओम - ओम यह ब्रंह्माडीय व लौकीक ध्वनि है। नमो - अभिवादन व नमस्कार।🙏❤💗💖💜 भगवते - शक्तिशाली, दयालु व जो दिव्य है।🙏 वासुदेवयः - वासु का अर्थ हैः सभी प्राणियों में जीवन और 🙏देवयः 🙏❤का अर्थ हैः ईश्वर। इसका मतलब है कि भगवान (जीवन/प्रकाश) जो सभी प्राणियों का जीवन है।🙏❤💗💖 वासुदेव भगवान! अर्थात् जो वासुदेव भगवान नर में से नारायण बने, उन्हें मैं नमस्कार करता हूँ। 🙏💜💖💗जब नारायण हो जाते हैं, तब वासुदेव कहलाते हैं।🙏🙏❤

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