विष्णु

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*कृपया प्रश्नों के उत्तर कमेंट्स में दें* आज का श्लोक : श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप -- १८.२० अध्याय अठारह : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि . . सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमिक्षते | अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम् || २० || . . सर्व-भूतेषु - समस्त जीवों में; येन - जिससे; एकम् - एक;भावम् - स्थिति; अव्ययम् - अविनाशी; ईक्षते - देखता है; अविभक्तम् - अविभाजित; विभक्तेषु - अनन्त विभागों में बँटे हुए में; तत् - उस; ज्ञानम् - ज्ञान को; विद्धि - जानो; सात्त्विकम् - सतोगुणी | . . जिस ज्ञान से अनन्त रूपों में विभक्त सारे जीवों में एक ही अविभक्त आध्यात्मिक प्रकृति देखी जाती है, उसे ही तुम सात्त्विक जानो | . . तात्पर्य : जो व्यक्ति हर जीव में, चाहे वह देवता हो, पशु-पक्षी हो या जलजन्तु अथवा पौधा हो, एक ही आत्मा देखता है, उसे सात्त्विक ज्ञान प्राप्त रहता है | समस्त जीवों में एक ही आत्मा है, यद्यपि पूर्व कर्मों के अनुसार उनके शरीर भिन्न-भिन्न हैं | जैसा कि सातवें अध्याय में वर्णन हुआ है, प्रत्येक शरीर में जीवनी शक्ति की अभिव्यक्ति परमेश्र्वर की पराप्रकृति के कारण होती है | उस एक पराप्रकृति, उस जीवनी शक्ति को प्रत्येक शरीर में देखना सात्त्विक दर्शन है | यह जीवनी शक्ति अविनाशी है, भले ही शरीर विनाशशील हों | जो आपसी भेद है, वह शरीर के कारण है | चूँकि बद्धजीवन में अनेक प्रकार के भौतिक रूप हैं, अतएव जीवनी शक्ति विभक्त प्रतीत होती है | ऐसा निराकार ज्ञान आत्म-साक्षात्कार का एक पहलू है | . प्रश्न १ : श्लोक के अनुवाद में दिए गए वाक्य "विभक्त सारे जीवों में एक ही अविभक्त आध्यात्मिक प्रकृति देखी जाती है" का क्या अर्थ है ?

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Kalpesh Patel Sep 16, 2019

*तुलसी विषेश* तुलसी का जाप कल्‍याणकारी माना जाता है और साथ ही मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला भी। जानें कैसे करें तुलसी जाप कि मिले मनचाहा वरदान… पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक तुलसी सिर्फ एक पौधा नहीं है बल्कि धरती के लिए वरदान है और इसी वजह से हिंदू धर्म में इसे पूज्यनीय माना गया है। आयुर्वेद में तुलसी को अमृत कहा गया है क्योंकि ये औषधि भी है और इसका नियमित उपयोग आपको उत्साहित, खुश और शांत रखता है। भगवान विष्णु की कोई भी पूजा बिना तुलसी के पूर्ण नहीं मानी जाती। इसलिए तुलसी को विष्णुवल्लभा कहा गया है, यानी भगवान विष्णु की सबसे प्रिय। जल चढ़ाते वक्त पढ़ें ये मंत्र और जरूर करें परिक्रमा जल चढ़ाते वक्त आपको निम्नलिखित मंत्र पढ़ने चाहिए। महाप्रसादजननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।। इसके बाद तुलसी की परिक्रमा कीजिए और उसके बाद मां तुलसी का ध्यान कीजिए। परिक्रमा 5, 11, 21 या 101 बार की जा सकती है। तुलसी की पूजा में ये चीजें जरूरी हैं तुलसी पूजा के लिए घी दीपक, धूप, सिंदूर, चंदन, नैवद्य और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। रोजाना पूजन करने से घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र रहता है। दिव्य तुलसी मंत्र इन मंत्रों का उच्चारण करते समय मां तुलसी का ध्यान करें। देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः । नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये ।। ॐ श्री तुलस्यै विद्महे। विष्णु प्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।। तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।। लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

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Rajeet Sharma Sep 16, 2019

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