राधारमण

🙌🙌श्री राधारमण जी मंदिर🙌🙌 स्थान - "श्री राधारमण जी मंदिर" मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित है. स्थापना -1599 विक्रम संवत "वैशाख शुक्ला पूर्णिमा" की बेला में शालिगराम से श्री गोपालभट्ट प्रेम वशीभूत हो व्रज निधि श्री राधारमण विग्रह के रूप में अवतरित हुए। 🌹विग्रह - श्री राधारमण जी, ललित त्रिभंगी द्वीभुज मुरलीधर श्री व्रज किशोर श्याम रूप में विराजित है 🌹कैसे शालिग्राम शिला में से प्रभु के हाथ पैर निकल आये 🌹यह श्रीमन महाप्रभु के कृपापात्र श्री गोपालभट्ट जी के द्वारा सेवित विग्रह है। पहले राधा रमण जी एक शालिग्राम शिला के रूप में थे, परन्तु भक्तवत्सल प्रभु ने अपने भक्त की मनोकामना पूर्ण करने के लिए ललित त्रिभंगी रूप धारण किया। 🌹श्री गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के श्रीगोपाल भट्ट गोस्वामी अपनी धर्म प्रचार यात्रा के दौरान जब एक बार गण्डकी नदी में स्नान कर रहे थे, उसी समय सूर्य को अर्घ देते हुए जब अंजुली में जल लिया तो तो एक अद्भुत शलिग्राम शिला आपकी अंजुली में आ गई जब दुबारा अंजलि में एक-एक करके बारह शालिग्राम की शिलायें आ गयीं। जिन्हे लेकर श्री गोस्वामी वृन्दावन धाम आ पहुंचे और यमुना तट पर केशीघाट के निकट भजन कुटी बनाकर श्रद्धापूर्वक शिलाओं का पूजन-अर्चन करने लगे। 🌹एक बार वृंदावन यात्रा करते हुए एक सेठ जी ने वृंदावनस्थ समस्त श्री विग्रहों के लिए अनेक प्रकार के बहुमूल्य वस्त्र आभूषण आदि भेट किये. श्री गोपाल भट्ट जी को भी उसने वस्त्र आभूषण दिए.परन्तु श्री शालग्राम जी को कैसे वे धारण कराते श्री गोस्वामी के हृदय में भाव प्रकट हुआ कि अगर मेरे आराध्य के भी अन्य श्रीविग्रहों की भांति हस्त-पद होते तो मैं भी इनको विविध प्रकार से सजाता एवं विभिन्न प्रकार की पोशाक धारण कराता, और इन्हें झूले पर झूलता। यह विचार करते-करते श्री गोस्वामी जी को सारी रात नींद नहीं आई. 🌹प्रात: काल जब वह उठे तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने देखा कि श्री शालिग्राम जी त्रिभंग ललित द्विभुज मुरलीधर मधुर मूर्ति श्रीव्रजकिशोर श्याम रूप में विराजमान है. श्री गोस्वामी ने भावविभोर होकर वस्त्रालंकार विभूषित कर अपने आराध्य का अनूठा श्रृंगार किया.श्री रूप सनातन आदि गुरुजनों को बुलाया और राधारमणलाल का प्राकटय महोत्सव श्रद्धापूर्वक आयोजित किया गया।

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