रक्षाबंधन_विशेष

Babita Sharma Aug 14, 2019

रक्षा बंधन के पावन पर्व की अनंत शुभकामनाओं के साथ सभी भाई बंधु गणों के लिए ढेर सारा स्नेह एवं प्यार 🙏🌹🌹 दिल में प्यार और होठों पर कड़वे बोल होते हैं, दुःख में साथ देने वाले भाई अनमोल होते हैं। भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है रक्षाबंधन का त्यौहार, इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी यानी कि रक्षासूत्र बांधती हैं और उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी व रक्षासूत्र बंधवाना सेहत के लिए भी अच्छा होता हैं। जानें रक्षासूत्र बंधवाने से सेहत को मिलने वाले 3 लाभ - 1. आयुर्वेद के अनुसार शरीर की प्रमुख नसें कलाई से होकर गुजरती है। कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से त्रिदोष वात, पित्त और कफ का नाश होता है। इसके अलावा लकवा, डायबिटीज, हृदय रोग, ब्लड-प्रेशर जैसे रोगों से भी सुरक्षा मिलती है। 2. मनोवैज्ञनिक कारणों के मुताबिक रक्षासूत्र बांधवाने से व्यक्ति को किसी बात का भय नहीं सताता है। मानसिक शक्ति मिलती है, व्यक्ति गलत रास्तों पर जाने से बचता है, मन में हमेशा शांति व पवित्रता बनी रहती है। 3. आध्यात्मिक कारण के अनुसार कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बधवाने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा लक्ष्मी, सरस्वती और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु कृपा से सुरक्षा और महेश की कृपा से सभी दुर्गुणों का नाश होता है। रक्षासूत्र का मंत्र है- येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।। इस मंत्र का सामान्यत: यह अर्थ लिया जाता है कि दानवों के महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूं। आध्यात्मिक नियमों के अनुसार भाई की दाईं कलाई पर राखी बांधना चाहिए। इसे लेकर कई तरह की राय रखी जाती हैं। कुछ मानते हैं कि राखी को किसी भी हाथ पर बांधने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन मान्यताओं के अनुसार ऐसा नहीं है ये गलत है। राखी मान्यताओं के अनुसार भाई की दाहिनी कलाई पर ही बहन को राखी बांधना चाहिए। धार्मिक कार्यों में भी सभी काम सीधे हाथ से ही किए जाते हैं। माना जाता है कि शरीर का दाहिना हिस्सा हमेशा सही मार्ग दिखाता है। शरीर के दाहिने हिस्से में नियंत्रण शक्ति भी ज्यादा होती है। शास्त्रों में भी बाएं हाथ के इस्तेमाल को अशुभ माना गया है। इन वजहों से भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधना ही शुभ माना जाता है। रक्षा बंधन की तिथि 15 अगस्त 2019 रक्षा बंधन का शुभू मुहूर्त रक्षा बंधन अनुष्ठान का समय- सुबह 5 बजकर 53 मिनट से शाम 5 बजकर 58 मिनट अपराह्न मुहूर्त- दिन में 1 बजकर 43 मिनट से शाम 4 बजकर 20 मिनट तक पूर्णिमा तिथि आरंभ – दिन में 3 बजकर 45 से (14 अगस्त 2019) पूर्णिमा तिथि समाप्त- शाम 5 बजकर 58 तक (15 अगस्त 2019) ठाकुर जी का आशीर्वाद आपके साथ सदा बना रहे।जय श्री राधे कृष्णा 🙏🌼🌾🌼🌾

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💌💌शुभ रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनायें💌💌 💌💌💌💌💌💌💌💌💌💌💌💌💌💌 💌💌मायमंदिर टीम, और मेरे सभी भाइयों के लिये मेरी एक छोटी सी कच्चे धागे से बनी हुई 💌राखी💌की प्यार भरी 💌भेट💌का स्वीकार कीजिए 💌💌 💌💌💌जिस दिन का एक 💌भाई 💌को था इंतजार वो दिन आ गये, और एक बहेन की ख्वाइश थी की अपने सभी भाइयों को एक प्यार भरा बंधन से बांध दे कच्चे धागे के तार से,, आज सभी भाइयों से एक बहेन एक छोटा सा तोफहा मांगती है,, अपने दिले मे थोडी सी जगह हमेंशा बनाये रखना,, कभी हम जुदा हो जाये फिर भी यादे हमेंशा बनाये रखना ,, कभी भूल से या कभी जानबूझकर भी कोई भाई का दिल दुखाया हो तो इस पावन पवित्र दिन के साथ सब भूल जाना ,, क्योंकि भाई -बहेन का पवित्र रिश्ता भगवान जी की मरजी से ही बनता है हम सगे भाई बहेना ना हो तो क्या हुवा..? सगे भाई के रिश्ते खून के होते है पर हम सब तो हमारी भारत माता के संतानो है तो हमारे खून मे भारत की मिटी का लहू है, जो दुनिया मे सबसे ऊपर है और इस नाते हमारा और आप सबका रिश्ता गंगा जैसा पवित्र और स्वर्ग से भी सुंदर है, 💌💌💌💌 🇮🇳💌🇮🇳 मेरे सभी भाई बहेनो को रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिन की हार्दिक मंगल शुभकामनायें 🇮🇳💌🇮🇳 🇮🇳💌🇮🇳ॐ श्री गणेशाय नमः 🇮🇳💌🇮🇳 🇮🇳💌🇮🇳जय श्री स्वामिनारायण🇮🇳💌🇮🇳

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Neha Sharma Aug 14, 2019

हल्दी है तो, चन्दन है 🌿🌹 राखी तो, रिश्तों का बंधन है 🌿🌹 राखी के त्योंहार में आपका अभिनन्दन है।🌿🌹 🌹🌿🌹 शुभ रक्षाबंधन !! 🌹🌿🌹 भारत त्यौहारों का देश है दिवाली, होली, दशहरा और रक्षा बंधन यहां प्रसिद्ध त्यौहार हैं. इन त्यौहारों में रक्षा बंधन विशेष रुप से प्रसिद्ध है. रक्षा-बंधन का पर्व भारत के कुछ स्थानों में रक्षासूत्र के नाम से भी जाना जाता है. प्राचीन काल से यह पर्व भाई-बहन के निश्चल स्नेह के प्रतीक के रुप में माना जाता है. हमारे यहां सभी पर्व किसी न किसी कथा, दंत कथा या किवदन्ती से जुडे हुए है. रक्षा बंधन का पर्व भी ऎसी ही कुछ कथाओं से संबन्धित है. रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है, यह जानने का प्रयास करते है. 🌿🌹 🌹🌿🌹 रक्षा बंधन के पौराणिक आधार 🌹🌿🌹 The Pauranik significance of Rakshabandhan पुराणों के अनुसार रक्षा बंधन पर्व लक्ष्मी जी का बली को राखी बांधने से जुडा हुआ है. कथा कुछ इस प्रकार है. एक बार की बात है, कि दानवों के राजा बलि ने सौ यज्ञ पूरे करने के बाद चाहा कि उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो, राजा बलि कि इस मनोइच्छा का भान देव इन्द्र को होने पर, देव इन्द्र का सिहांसन डोलने लगा. 🌿🌹 घबरा कर इन्द्र भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं और उनसे प्राथना करते हैं जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु वामन अवतार ले, ब्राह्माण वेश धर कर, राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंच गयें. ब्राह्माण बने श्री विष्णु ने भिक्षा में तीन पग भूमि मांग ली. राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे दी. 🌿🌹 वामन रुप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृ्थ्वी को नाप लिया. अभी तीसरा पैर रखना शेष था. बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया. ऎसे मे राजा बलि अपना वचन नहीं निभाता तो अधर्म होगा है. आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहां तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए. वामन भगवान ने ठीक वैसा ही किया, श्री विष्णु के पैर रखते ही, राजा बलि परलोक पहुंच गया. 🌿🌹 बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर, भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न्द हुए, उन्होंने आग्रह किया कि राजा बलि उनसे कुछ मांग लें. इसके बदले में बलि ने रात दिन भगवान को अपने सामने रहने का वचन मांग लिया., श्री विष्णु को अपना वचन का पालन करते हुए, राजा बलि का द्वारपाल बनना पडा. इस समस्या के समाधान के लिये लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय सुझाया. लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे राखी बांध अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आई. इस दिन का यह प्रसंग है, उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी. उस दिन से ही रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाने लगा. 🌿🌹 🌹🌿🌹एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार 🌹🌿🌹 Rakshabandhan as per a story from the Puranas एक बार देव और दानवों में युद्ध शुरु हुआ, युद्ध में देवता पर दानव हावी होने लगें. यह देखकर पर इन्द्र देव घबरा कर बृ्हस्पति के पास गये. इसके विषय में जब इन्द्राणी को पता चला तो उन्होने ने रेशम का धागा मंत्रों की शक्ति से पवित्र कर इसे अपने पति के हाथ पर बांध लिया. जिस दिन यह कार्य किया गया उस दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था. उसी दिन से ही श्रावण पूर्णिमा के दिन यहा धागा बांधने की प्रथा चली आ रही है. 🌿🌹 🌹🌿🌹रक्षा बंधन का ऎतिहासिक आधार 🌹🌿🌹 Historical basis of Rakshabandhan बात उस समय की है, जब राजपूतों और मुगलों की लडाई चल रही थी. उस समय चितौड के महाराजा की विधवा रानी कर्णवती ने अपने राज्य की रक्षा के लिये हुमायूं को राखी भेजी थी. हुमायूं ने भी उस राखी की लाज रखी और स्नेह दिखाते हुए, उसने तुरंत अपनी सेनाएं वापस बुला लिया. इस ऎतिहासिक घटना ने भाई -बहन के प्यार को मजबूती प्रदान की. इस घटना की याद में भी रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है. 🌿🌹 🌹महाभारत में दौपदी का श्री कृ्ष्ण को राखी बांधना 🌹 Rakhi of Draupadi for Sri Krishna राखी का यह पर्व पुराणों से होता हुआ, महाभारत अर्थात द्वापर युग में गया, और आज आधुनिक काल में भी इस पर्व का महत्व कम नहीं हुआ है. राखी से जुडा हुआ एक प्रसंग महाभारत में भी पाया जाता है. प्रसग इस प्रकार है. शिशुपाल का वध करते समय कृ्ष्ण जी की तर्जनी अंगूली में चोट लग गई, जिसके फलस्वरुप अंगूली से लहू बहने लगा. लहू को रोकने के लिये द्रौपदी ने अपनी साडी की किनारी फाडकर, श्री कृ्ष्ण की अंगूली पर बांध दी. 🌹 इसी ऋण को चुकाने के लिये श्री कृ्ष्ण ने चीर हरण के समय दौपदी की लाज बचाकर इस ऋण को चुकाया था. इस दिन की यह घटना है उस दिन भी श्रावण मास की पूर्णिमा थी. 🌿🌹 🌹🌿🌹रक्षा बंधन का धार्मिक आधार 🌹🌿🌹 Religion and Rakshabandhan भारत के कई क्षत्रों में इसे अलग - अलग नामों से अलग - अलग रुप में मनाया जाता है. जैसे उतरांचल में इसे श्रावणी नाम से मनाया जाता है भारत के ब्राह्माण वर्ग में इस इन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है. इस दिन यज्ञोपवीत धारण करना शुभ माना जाता है. इस दिन ब्राह्माण वर्ग अपने यजमानों को यज्ञोपवीत तथा राखी देकर दक्षिणा लेते है. अमरनाथ की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा भी रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है. 🌿🌹 🌹🌿🌹रक्षा बंधन का सामाजिक आधार 🌹🌿🌹 Rakshabandhan in today's society भारत के राजस्थान राज्य में इस इद्न रामराखी और चूडा राखी बांधने की परम्परा है. राम राखी केवल भगवान को ही बांधी जाती है. व चूडा राखी केवल भाभियों की चूडियों में ही बांधी जाती है. यह रेशमी डोरे से राखी बनाई जाती है. यहां राखी बांधने से पहले राखी को कच्चे दूध से अभिमंत्रित किया जाता है. और राखी बांधने के बाद भोजन किया जाता है. 🌿🌹 🌹🌿🌹राखी के अन्य रुप 🌹🌿🌹 The many forms of Rakhi भारत में स्थान बदलने के साथ ही पर्व को मनाने की परम्परा भी बदल जाती है, यही कारण है कि तमिलनाडू, केरल और उडीसा के दक्षिण में इसे अवनि अवितम के रुप में मनाया जाता है. इस पर्व का एक अन्य नाम भी है, इसे हरियाली तीज के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन से पहले तक ठाकुर झुले में दर्शन देते है, परन्तु रक्षा बंधन के दिन से ये दर्शन समाप्त होते है. 🌿🌹

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