मां_कूष्माण्डा*

🎎🌲🐯शुभ नवरात्रि🐯🌲🎎 🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋 🌹🍀🚩 नवरात्रि का चौथा दिन🚩🍀🌹 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 🐯👣🚩ॐ देवी कुष्मांडायै नमः 🚩👣🐯 🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁 🎪🌿🌹जय श्री राम🌹🌿🎪 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🚩🌲🍑 जय श्री हनुमान 🍑🌲🚩 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🚩❇️🌺जय श्री शनिदेव🌺❇️🚩 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🌋🏖💐 सुप्रभात 🌻🏖🌋 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🏵 🌿🌹शुभ शनिवार🌹🌿 🏵 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 🚩या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्मांडा रूपेण संस्थिता।🚩 🚩नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🚩 🏖मंगलमय सुबह की शुरुआत माँ कुष्मांडा देवी के 👣चरण कमलों के दर्शन के साथ🙏 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 4. 👣कुष्मांडा :-- 🚩सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। 🦁 🔔दधाना हस्तपद्मभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तुमे ।।🚩 🌷कु का अर्थ है थोडा, उष्मा का अर्थ है गर्म (उर्जा) और अंड का अर्थ है ब्रह्माण्ड |🌷 🎎 अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को रचने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से जाना गया।जब सृष्टि नहीं थी, चारों ओर अंधकार ही अंधकार था, तब उसी देवी ने अपने हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिभूत या आदिशक्ति कहा गया है। 🐯माता का स्वरूप :-- 🚩माता कुष्मांडा अष्ट भुजाओं के स्वरुप में हैं, उनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत कलश, चक्र और गदा हैं। आठवें हाथ में जप माला है। यह देवी का वाहन सिंह है |माता-पिता के स्वरूप का महत्त्व कुष्मांडा देवी का वास सूर्य है, इसलिए इनका शरीर भी सूर्य के समान कान्तिमान है | संसार के सभी जीवों में इन्ही का तेज है | 🎎शुभ और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन कुष्मांडा देवी की पूजा आराधना करने से भक्तों को सभी रोगों और दुखों से मुक्ति मिलती है |आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है और जीवन में ऊँचे पद और सम्मान की प्राप्ति होती है | 💐विधि-विधान से पूजा करने पर श्रधालुओं को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। माँ कुष्मांडा देवी सभी आड़ियों-व्याधियों से मुक्त कर, उसे सुख समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। 🎭मंत्र: :- 🌹ऊँ देवि कृष्णाय नमःष् देवी कूष्माण्डायै नम:🌹 🎎 ध्यान :-- वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखरम्। सिंहरूढ अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम् अ भास्वर भानु धारणं अनाथ स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवधराम् चाप पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर, किटिनी रत्नकुंडल, मंडीताम्, प्रफुल्ल वदनाँचारू चिबुकँत कपोलाँ तुंग कुचाम्। कोमलीपी स्मेरलन श्रीकांति निम्नाभि नितम्बनीमेर। 💐स्तोत्र पाठ:- दुर्गतिनाशिनी त्वहि दरिद्रादि विनाशनम्। जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणम्यहम् ष् जगतमाता जगतक्री जगदधर रूपणीम्। चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यम् ्व त्रैलोक्यसुन्दरी त्वमिदुःख शोक निवारिणीम्। परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमभ्यम्यी। 🌷कवच :- 🦁हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्। हसलकरीं नेत्रच, हसारौश्च ललाटकम् नेत्र कौमारी पातु सर्वगात्रे, इंदि उत्तरे और, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम। दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतुक्ष। 🚩👣🔔जय माता दी🔔👣🚩 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯

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Anchal Devi Mar 27, 2020

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