माँ_ब्रह्मचारिणी

🎎🌲🌹शुभ नवरात्रि🌹🌲🎎 ❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️ 🙏🌋नवरात्रि का दूसरा दिन🌋🙏 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🚩👣🐯जय माँ ब्रह्मचारिणी🐯👣🚩 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 🚩🐚🌹ॐ विष्णु देवाय नमः 🌹🐚🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🔔🌿🌷शुभ गुरुवार🌷🌿🔔 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🏖🍁🌻सुप्रभात🌻🍁🏖 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 👣 या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। 🐯 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। 🎭मङ्गलमयी सुबह की शुरुआत माता रानी के चरण कमलों के दर्शनों के साथ🎭 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 2.🦁 ब्रह्मचारिणी देवी 🌹दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। 💐देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।। 🐯 माँ दुर्गा का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी है | यहाँ ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाला | 🎎माता का स्वरूप :- माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप शांत और ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है | उनके बाएं हाथ में कमंडल और दायें हाथ में जप की माला रहती है | माता शक्ति के दुसरे स्वरुप की पूजा करने से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। माँ ब्रह्चारिणी के स्वरुप का वर्णन इस श्लोक में देखने को मिलता है | 🚩 मंत्र: ऊँ देवी ब्रह्मचारीय नमः चार देवी ब्रह्मचारिण्यै नम:।। ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा का महत्त्व माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप अनन्त फल देने वाला है। इनकी सच्चे मन से भक्ति करने से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। 🌷दुर्गा पूजा के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में होता है। इस चक्र में अवस्थित मन वाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्त्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता है। माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। 🎎 ध्यान :- वन्दे वांछित लाभय चन्द्रार्घकृत शेखरम्। जपला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभम ण्ड गौरवर्ण स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्रम्। धवल परिधाना ब्रह्मरूप पुष्पलंकार भूषिताम् ब्रह्म परम वंदना पल्लवराधरण कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावण्य स्मरिलन निम्ननाभि नितम्बनीम् कम 🎭स्तोत्र पाठ :- तपश्चारिणी त्वहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधर्मचारिणी प्रणमाम्यम् ब्रह्म शंकरप्रिया त्वहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणम्यहम् ब्रह्म 🦁 कवच :- त्रिपुरा में ह्रदय पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्ध च कपोलो ातु पंचदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी ठे षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पाद्यो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। 🚩👣🌹जय माता दी🌹👣🚩 🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯

+723 प्रतिक्रिया 175 कॉमेंट्स • 12 शेयर