महिलादिवस

👸💃 महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 👸💃 🌱🌲ओम नमः शिवाय 🌱🌲हर हर महादेव 🌱🌲जय भोले की 🌱🌲प्रातः वंदना जी 🌱🌳जय शिव शंभू🌱🌲🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 🌹🌳 *एक गरीब सेठ की कथा!*🌳🌹 *मेरे भाई बहनों नगर का एक सेठ गंगा स्नान करने गया तो उसे एक महात्मा का दर्शन हुआ। सेठ ने बड़े प्रेम से आदर पूर्वक संत से प्रार्थना की कि 'आज आप मेरे घर पधारें और भिक्षा ग्रहण करें।' संत ने उसकी प्रार्थना मान ली।*🌹🌹🌳🌲🌴🌺 *मेरे भाई बहनों दोपहर को ये महात्मा उस सेठ के पास भोजन ग्रहण करने गये। तब उस सेठ ने उन महात्मा की बड़ी श्रद्धा पूर्वक पूजा की, उनके पैर पखारे, चरणामृत पिया और चरणामृत सारे घर में छिड़क दिया। फिर आदर पूर्वक बड़े प्रेम से स्वादिष्ट भोजन कराया। आखिर उसने महात्मा से प्रार्थना की कि महाराज हमारे पूर्वज बड़े करोड़पति थे, मगर मैं तो गरीब हूं। वास्तव में आपकी सेवा जिस तरह करनी चाहिए थी वैसी मैं कर नहीं पाया। आप मेरी गरीबी दूर कर दीजिए। महात्मा ने देखा कि वास्तव में सेठिया गरीब था। महात्मा के मन में दया उत्पन्न हुई। महात्मा भू-गर्भविद्या जानते थे।* 🌱🌹🌱🌹🌱🌹🌱 *मेरे भाई बहनों महात्मा बोले हे भक्त! तुम गरीब नहीं, तुम तो करोड़पति हो। सेठिया बोला कि महात्माजी! मेरा मजाक मत उड़ाइए। मैं सच बोल रहा हूं। महात्मा बोले कि सेठ! जिस चौकी पर बैठ कर मैं भोजन कर रहा था, उसके उत्तर दिशा में एक सोने के मटके में पचास करोड़ रुपये (सोने के सिक्के) गाड़े हुए हैं। सेठिया बोला 'मैं करोड़पति हूं', इस आपके वचन पर मैं विश्वास कैसे करूं तो महात्माजी बोले कि मैं भू-गर्भविद्या को जानता हूं। उस विद्या के बल से ही मैं यह बात तुम्हें कह रहा हूं कि तू गरीब नहीं बल्कि करोड़पति है।*🌹🌳🌱🥀🌴🌲 *सेठिया बोला कि आपके विद्या समर्थित बचनों से तो हमारी आधी गरीबी दूर हो गई, मगर प्रत्यक्ष गरीबी कब दूर होगी? महात्माजी बोले अभी हमारे सामने इस चौकी के उत्तर में तीन हाथ जमीन खोद लो और अपने पच्चास करोड़ रुपयों का एक सोने के मटके में दर्शन करो। सेठिया ने जैसे बताया गया था वैसे ही जमीन खोदी तो बराबर तीन हाथ जमीन के नीचे सोने के मटके में ५० करोड़ रुपयों का दर्शन हुआ। सेठिया बहुत खुश हुआ और उसने महात्मा को इसमें से आधी संपत्ति लेने का आग्रह किया। महात्मा ने कहा कि मुझे तेरी यह आधी संपत्ति नहीं चाहिए। मैं भू-गर्भविद्या का जानकार हूं, चाहे जब मुझे धन प्राप्त हो सकता है। दूसरी बात यह है कि स्त्री, पुत्र, धन आदि का त्याग करके मैं महात्मा बना हूं। जैसे एक बार वमन (उल्टी) किए हुए का फिर से कोई भक्षण नहीं करता है, वैसे ही जो त्यागा उसको पुन: कोई ग्रहण नहीं करता है। त्यागे हुए स्त्री, पुत्र, धन आदि महात्मा के लिए वमन के समान है। जिसका त्याग किया है उसका पुनः ग्रहण करना वमन भक्षण करना ही है। एक बार जिसको असार मान घृणा कर के त्याग दिया, उसको पुन: कोई नहीं ग्रहण नहीं करता।*🌹🌳🌱🥀🌴🌲 *मेरे भाई बहनों भगवत प्राप्ति के लिए जो पुत्रैषणा, वित्तैषणा, लोकैषणा आदि का त्याग किया, तो फिर साधु तो भगवत प्राप्ति के लिए ही काम करेगा। स्त्री, पुत्र, धन के झंझट में दुबारा नहीं पड़ेगा। जो इनके झंझट में पड़ते हैं उन्हें भगवत प्राप्ति कैसे होगी सेठ! तुम तो गृहस्थ हैं। तुम्हारे स्त्री, पुत्र, परिवार है। इनका पालन करने के लिए तुम्हें ही धन की जरूरत है। मुझे धन की जरूरत नहीं है। बाकी बचा यह शरीर तो उसके लिए भिक्षा ही पर्याप्त है। शरीर की भूख को शांत नहीं करेंगे तो शरीर की यह गाड़ी चल नहीं सकती।‌ यह शरीर रहेगा ही नहीं क्योंकि कहा गया है ।*🌲🙏🌲🥀🌲🥀 *अन्न से ही ये सारे भूत प्राणी उत्पन्न होते हैं। अन्न से ही होकर अन्न के द्वारा जीवन्त रहते हैं।‌ अन्न को ही प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करते हैं और अंत में उसमें ही लीन होते हैं।*🌹🌳🥀 *मेरे भाई बहनों इतना कहकर के महात्मा ने कहा सेठ! यह धन तो तुम्हारा ही था। तुम ही इसके मालिक थे। हमने ऐसा क्या किया जिसके कारण इसका हिस्सा हम लेवें। हमने बस उसका पता बता दिया। तुमको अपने धन की जानकारी दे दी, बस। इतना ही हमारा काम है। यह धन तुम्हारा ही है। तुम्हारे काम का है। अपने पास ही रखो। मुझे नहीं चाहिए।*

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Poonam Aggarwal Mar 8, 2021

👸👸*HAPPY WOMEN'S DAY*👸👸🙏 🌹🍫🌹🍫🌹🍫🌹🍫🌹🍫🌹 *Bahut sunder poem hai *मैं नारी नदी सी, मेरे दो किनारे* 👩👩👩👩👩👩👩👩👩 मै नारी नदी सी मेरे दो किनारे। *एक किनारे ससुराल, दूजी ओर मायका* दोनों मेरे अपने फिर भी अलग दोनों का जायका। *एक तरफ मां जिसकी कोख का मैं हिस्सा ।* दूजी ओर सास जिनके लाल संग जुड़ा मेरे जीवन भर का किस्सा *एक तरफ पिता , जिनसे है अपनत्व की धाक।* दूजी ओर ससुरजी जिनकी हैं सम्मान की साख। *मायके का आँगन मेरे जन्म की किलकारी* ससुराल का आँगन मेरे बच्चों की चिलकारी *मायके में मेरी बहने , मेरी हमजोली* ससुराल में मेरी ननदे है, शक्कर सी मीठी गोली। *मायके में मामा, काका है पिता सी मुस्कान* ससुराल के देवर जेठ हैं तीखे में मिष्टान। *मायके में भाभी है* ममता के खजाने की चाबी,* ससुराल में देवरानी जेठानी हैं मेरी तरह ही बहती नदी का पानी। *मायके में मेरा भईया* एक आस जो बनेगा दुख में मेरी नय्या ससुराल में मेरे प्राणप्रिय सैया जो हैं मेरे जीवन के खेवैया।* . *ससुराल ओर मायका हैं दो नदी की धारा* जो एक नारी में समाकर नारी को बनाती है सागर सा गहरा। *नारी शक्ति को प्रणाम*! 🙏🌹🙏 🌹🙏🌹❣️❣️❣️

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