महाभारत

arun kumar singh Sep 9, 2019

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Raj Aug 27, 2019

जितने भी लोग महाभारत को काल्पनिक बताते हैं.... उनके मुंह पर पर एक जोरदार तमाचा है आज का यह पोस्ट...... महाभारत के बाद से आधुनिक काल तक के सभी राजाओं का विवरण क्रमवार तरीके से नीचे प्रस्तुत किया जा रहा है...! आपको यह जानकर एक बहुत ही आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी होगी कि महाभारत युद्ध के पश्चात् राजा युधिष्ठिर की 30 पीढ़ियों ने 1770 वर्ष 11 माह 10 दिन तक राज्य किया था..... जिसका पूरा विवरण इस प्रकार है- क्र... शासक का नाम...........................वर्ष....माह.. दिन 1. राजा युधिष्ठिर (Raja Yudhisthir)..... 36.... 08.... 25 2 राजा परीक्षित (Raja Parikshit)........ 60.... 00..... 00 3 राजा जनमेजय (Raja Janmejay).... 84.... 07...... 23 4 अश्वमेध (Ashwamedh )................. 82.....08..... 22 5 द्वैतीयरम (Dwateeyram )............... 88.... 02......08 6 क्षत्रमाल (Kshatramal)................... 81.... 11..... 27 7 चित्ररथ (Chitrarath)...................... 75......03.....18 8 दुष्टशैल्य (Dushtashailya)...............75.....10.......24 9 राजा उग्रसेन (Raja Ugrasain)......... 78.....07.......21 10 राजा शूरसेन (Raja Shoorsain).......78....07........21 11 भुवनपति (Bhuwanpati)................69....05.......05 12 रणजीत (Ranjeet).........................65....10......04 13 श्रक्षक (Shrakshak).......................64.....07......04 14 सुखदेव (Sukhdev)........................62....00.......24 15 नरहरिदेव (Narharidev).................51.....10.......02 16 शुचिरथ (Suchirath).....................42......11.......02 17 शूरसेन द्वितीय (Shoorsain II)........58.....10.......08 18 पर्वतसेन (Parvatsain )..................55.....08.......10 19 मेधावी (Medhawi)........................52.....10......10 20 सोनचीर (Soncheer).....................50.....08.......21 21 भीमदेव (Bheemdev)....................47......09.......20 22 नरहिरदेव द्वितीय (Nraharidev II)...45.....11.......23 23 पूरनमाल (Pooranmal)..................44.....08.......07 24 कर्दवी (Kardavi)...........................44.....10........08 25 अलामामिक (Alamamik)...............50....11........08 26 उदयपाल (Udaipal).......................38....09........00 27 दुवानमल (Duwanmal)..................40....10.......26 28 दामात (Damaat)..........................32....00.......00 29 भीमपाल (Bheempal)...................58....05........08 30 क्षेमक (Kshemak)........................48....11........21 इसके बाद ....क्षेमक के प्रधानमन्त्री विश्व ने क्षेमक का वध करके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी 14 पीढ़ियों ने 500 वर्ष 3 माह 17 दिन तक राज्य किया जिसका विरवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 विश्व (Vishwa)......................... 17 3 29 2 पुरसेनी (Purseni).....................42 8 21 3 वीरसेनी (Veerseni).................. 52 10 07 4 अंगशायी (Anangshayi)........... 47 08 23 5 हरिजित (Harijit).................... 35 09 17 6 परमसेनी (Paramseni)............. 44 02 23 7 सुखपाताल (Sukhpatal)......... 30 02 21 8 काद्रुत (Kadrut)................... 42 09 24 9 सज्ज (Sajj)........................32 02 14 10 आम्रचूड़ (Amarchud)......... 27 03 16 11 अमिपाल (Amipal) .............2211 25 12 दशरथ (Dashrath)............... 25 04 12 13 वीरसाल (Veersaal)...............31 08 11 14 वीरसालसेन (Veersaalsen).......47 0 14 इसके उपरांत...राजा वीरसालसेन के प्रधानमन्त्री वीरमाह ने वीरसालसेन का वध करके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी 16 पीढ़ियों ने 445 वर्ष 5 माह 3 दिन तक राज्य किया जिसका विरवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 राजा वीरमाह (Raja Veermaha)......... 35 10 8 2 अजितसिंह (Ajitsingh)...................... 27 7 19 3 सर्वदत्त (Sarvadatta)..........................28 3 10 4 भुवनपति (Bhuwanpati)...................15 4 10 5 वीरसेन (Veersen)............................21 2 13 6 महिपाल (Mahipal)............................40 8 7 7 शत्रुशाल (Shatrushaal).....................26 4 3 8 संघराज (Sanghraj)........................17 2 10 9 तेजपाल (Tejpal).........................28 11 10 10 मानिकचंद (Manikchand)............37 7 21 11 कामसेनी (Kamseni)..................42 5 10 12 शत्रुमर्दन (Shatrumardan)..........8 11 13 13 जीवनलोक (Jeevanlok).............28 9 17 14 हरिराव (Harirao)......................26 10 29 15 वीरसेन द्वितीय (Veersen II)........35 2 20 16 आदित्यकेतु (Adityaketu)..........23 11 13 ततपश्चात् प्रयाग के राजा धनधर ने आदित्यकेतु का वध करके उसके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी 9 पीढ़ी ने 374 वर्ष 11 माह 26 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण इस प्रकार है .. क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 राजा धनधर (Raja Dhandhar)...........23 11 13 2 महर्षि (Maharshi)...............................41 2 29 3 संरछि (Sanrachhi)............................50 10 19 4 महायुध (Mahayudha).........................30 3 8 5 दुर्नाथ (Durnath)...............................28 5 25 6 जीवनराज (Jeevanraj).......................45 2 5 7 रुद्रसेन (Rudrasen)..........................47 4 28 8 आरिलक (Aarilak)..........................52 10 8 9 राजपाल (Rajpal)..............................36 0 0 उसके बाद ...सामन्त महानपाल ने राजपाल का वध करके 14 वर्ष तक राज्य किया। अवन्तिका (वर्तमान उज्जैन) के विक्रमादित्य ने महानपाल का वध करके 93 वर्ष तक राज्य किया। विक्रमादित्य का वध समुद्रपाल ने किया और उसकी 16 पीढ़ियों ने 372 वर्ष 4 माह 27 दिन तक राज्य किया ! जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 समुद्रपाल (Samudrapal).............54 2 20 2 चन्द्रपाल (Chandrapal)................365 4 3 सहपाल (Sahaypal)...................11 4 11 4 देवपाल (Devpal).....................27 1 28 5 नरसिंहपाल (Narsighpal).........18 0 20 6 सामपाल (Sampal)...............27 1 17 7 रघुपाल (Raghupal)...........22 3 25 8 गोविन्दपाल (Govindpal)........27 1 17 9 अमृतपाल (Amratpal).........36 10 13 10 बालिपाल (Balipal).........12 5 27 11 महिपाल (Mahipal)...........13 8 4 12 हरिपाल (Haripal)..........14 8 4 13 सीसपाल (Seespal).......11 10 13 14 मदनपाल (Madanpal)......17 10 19 15 कर्मपाल (Karmpal)........16 2 2 16 विक्रमपाल (Vikrampal).....24 11 13 टिप : कुछ ग्रंथों में सीसपाल के स्थान पर भीमपाल का उल्लेख मिलता है, सम्भव है कि उसके दो नाम रहे हों। इसके उपरांत .....विक्रमपाल ने पश्चिम में स्थित राजा मालकचन्द बोहरा के राज्य पर आक्रमण कर दिया जिसमे मालकचन्द बोहरा की विजय हुई और विक्रमपाल मारा गया। मालकचन्द बोहरा की 10 पीढ़ियों ने 191 वर्ष 1 माह 16 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 मालकचन्द (Malukhchand) 54 2 10 2 विक्रमचन्द (Vikramchand) 12 7 12 3 मानकचन्द (Manakchand) 10 0 5 4 रामचन्द (Ramchand) 13 11 8 5 हरिचंद (Harichand) 14 9 24 6 कल्याणचन्द (Kalyanchand) 10 5 4 7 भीमचन्द (Bhimchand) 16 2 9 8 लोवचन्द (Lovchand) 26 3 22 9 गोविन्दचन्द (Govindchand) 31 7 12 10 रानी पद्मावती (Rani Padmavati) 1 0 0 रानी पद्मावती गोविन्दचन्द की पत्नी थीं। कोई सन्तान न होने के कारण पद्मावती ने हरिप्रेम वैरागी को सिंहासनारूढ़ किया जिसकी पीढ़ियों ने 50 वर्ष 0 माह 12 दिन तक राज्य किया ! जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 हरिप्रेम (Hariprem) 7 5 16 2 गोविन्दप्रेम (Govindprem) 20 2 8 3 गोपालप्रेम (Gopalprem) 15 7 28 4 महाबाहु (Mahabahu) 6 8 29 इसके बाद.......राजा महाबाहु ने सन्यास ले लिया । इस पर बंगाल के अधिसेन ने उसके राज्य पर आक्रमण कर अधिकार जमा लिया। अधिसेन की 12 पीढ़ियों ने 152 वर्ष 11 माह 2 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 अधिसेन (Adhisen) 18 5 21 2 विल्वसेन (Vilavalsen) 12 4 2 3 केशवसेन (Keshavsen) 15 7 12 4 माधवसेन (Madhavsen) 12 4 2 5 मयूरसेन (Mayursen) 20 11 27 6 भीमसेन (Bhimsen) 5 10 9 7 कल्याणसेन (Kalyansen) 4 8 21 8 हरिसेन (Harisen) 12 0 25 9 क्षेमसेन (Kshemsen) 8 11 15 10 नारायणसेन (Narayansen) 2 2 29 11 लक्ष्मीसेन (Lakshmisen) 26 10 0 12 दामोदरसेन (Damodarsen) 11 5 19 लेकिन जब ....दामोदरसेन ने उमराव दीपसिंह को प्रताड़ित किया तो दीपसिंह ने सेना की सहायता से दामोदरसेन का वध करके राज्य पर अधिकार कर लिया तथा उसकी 6 पीढ़ियों ने 107 वर्ष 6 माह 22 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 दीपसिंह (Deepsingh) 17 1 26 2 राजसिंह (Rajsingh) 14 5 0 3 रणसिंह (Ransingh) 9 8 11 4 नरसिंह (Narsingh) 45 0 15 5 हरिसिंह (Harisingh) 13 2 29 6 जीवनसिंह (Jeevansingh) 8 0 1 पृथ्वीराज चौहान ने जीवनसिंह पर आक्रमण करके तथा उसका वध करके राज्य पर अधिकार प्राप्त कर लिया। पृथ्वीराज चौहान की 5 पीढ़ियों ने 86 वर्ष 0 माह 20 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन 1 पृथ्वीराज (Prathviraj) 12 2 19 2 अभयपाल (Abhayapal) 14 5 17 3 दुर्जनपाल (Durjanpal) 11 4 14 4 उदयपाल (Udayapal) 11 7 3 5 यशपाल (Yashpal) 36 4 27 विक्रम संवत 1249 (1193 AD) में मोहम्मद गोरी ने यशपाल पर आक्रमण कर उसे प्रयाग के कारागार में डाल दिया और उसके राज्य को अधिकार में ले लिया। उपरोक्त जानकारी ा स्रोत स्वामी दयानन्द सरस्वती के सत्यार्थ प्रकाश ग्रंथ, चित्तौड़गढ़ राजस्थान से प्रकाशित पत्रिका हरिशचन्द्रिका और मोहनचन्द्रिका के विक्रम संवत1939 के अंक और कुछ अन्य संस्कृत ग्रंथों को बताया गया है।

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Hemlata Ghatole Aug 28, 2019

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं - 1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन 4. नकुल। 5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी । वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं - 1. दुर्योधन 2. दुःशासन 3. दुःसह 4. दुःशल 5. जलसंघ 6. सम 7. सह 8. विंद 9. अनुविंद 10. दुर्धर्ष 11. सुबाहु। 12. दुषप्रधर्षण 13. दुर्मर्षण। 14. दुर्मुख 15. दुष्कर्ण 16. विकर्ण 17. शल 18. सत्वान 19. सुलोचन 20. चित्र 21. उपचित्र 22. चित्राक्ष 23. चारुचित्र 24. शरासन 25. दुर्मद। 26. दुर्विगाह 27. विवित्सु 28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ 31. नन्द। 32. उपनन्द 33. चित्रबाण 34. चित्रवर्मा 35. सुवर्मा 36. दुर्विमोचन 37. अयोबाहु 38. महाबाहु 39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग 42. भीमबल 43. बालाकि 44. बलवर्धन 45. उग्रायुध 46. सुषेण 47. कुण्डधर 48. महोदर 49. चित्रायुध 50. निषंगी 51. पाशी 52. वृन्दारक 53. दृढ़वर्मा 54. दृढ़क्षत्र 55. सोमकीर्ति 56. अनूदर 57. दढ़संघ 58. जरासंघ 59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक 61. उग्रश्रवा 62. उग्रसेन 63. सेनानी 64. दुष्पराजय 65. अपराजित 66. कुण्डशायी 67. विशालाक्ष 68. दुराधर 69. दृढ़हस्त 70. सुहस्त 71. वातवेग 72. सुवर्च 73. आदित्यकेतु 74. बह्वाशी 75. नागदत्त 76. उग्रशायी 77. कवचि 78. क्रथन। 79. कुण्डी 80. भीमविक्र 81. धनुर्धर 82. वीरबाहु 83. अलोलुप 84. अभय 85. दृढ़कर्मा 86. दृढ़रथाश्रय 87. अनाधृष्य 88. कुण्डभेदी। 89. विरवि 90. चित्रकुण्डल 91. प्रधम 92. अमाप्रमाथि 93. दीर्घरोमा 94. सुवीर्यवान 95. दीर्घबाहु 96. सुजात। 97. कनकध्वज 98. कुण्डाशी 99. विरज 100. युयुत्सु ( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था, जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था ) "श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में- ॐ . किसको किसने सुनाई? उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई। ॐ . कब सुनाई? उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई। ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई? उ.- रविवार के दिन। ॐ. कोनसी तिथि को? उ.- एकादशी ॐ. कहा सुनाई? उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में। ॐ. कितनी देर में सुनाई? उ.- लगभग 45 मिनट में ॐ. क्यू सुनाई? उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए। ॐ. कितने अध्याय है? उ.- कुल 18 अध्याय ॐ. कितने श्लोक है? उ.- 700 श्लोक ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है? उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है। ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगो ने सुना? उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था? उ.- भगवान सूर्यदेव को ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है? उ.- उपनिषदों में ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....? उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है। ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है? उ.- गीतोपनिषद ॐ. गीता का सार क्या है? उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है? उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574 अर्जुन ने- 85 धृतराष्ट्र ने- 1 संजय ने- 40. अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद अधूरा ज्ञान खतरना होता है। 33 करोड नहीँ 33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ। कोटि = प्रकार। देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है, कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता। हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं... कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :- 12 प्रकार हैँ आदित्य , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...! 8 प्रकार हे :- वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष। 11 प्रकार है :- रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली। एवँ दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार। कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं। । 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 १ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है This is very good information for all of us ... जय श्रीकृष्ण ... अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाएँ ...... अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने. ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये. खासकर अपने बच्चो को बताए क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा... 📜😇 दो पक्ष- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष ! 📜😇 तीन ऋण - देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण ! 📜😇 चार युग - सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग , कलियुग ! 📜😇 चार धाम - द्वारिका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ पुरी , रामेश्वरम धाम ! 📜😇 चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ) ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , शृंगेरीपीठ ! 📜😇 चार वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद ! 📜😇 चार आश्रम - ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास ! 📜😇 चार अंतःकरण - मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार ! 📜😇 पञ्च गव्य - गाय का घी , दूध , दही , गोमूत्र , गोबर ! 📜😇 पञ्च देव - गणेश , विष्णु , शिव , देवी , सूर्य ! 📜😇 पंच तत्त्व - पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश ! 📜😇 छह दर्शन - वैशेषिक , न्याय , सांख्य , योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा ! 📜😇 सप्त ऋषि - विश्वामित्र , जमदाग्नि , भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप! 📜😇 सप्त पुरी - अयोध्या पुरी , मथुरा पुरी , माया पुरी ( हरिद्वार ) , काशी , कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पुरी ! 📜😊 आठ योग - यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समािध ! 📜😇 आठ लक्ष्मी - आग्घ , विद्या , सौभाग्य , अमृत , काम , सत्य , भोग ,एवं योग लक्ष्मी ! 📜😇 नव दुर्गा -- शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी , चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी , कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री ! 📜😇 दस दिशाएं - पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण , ईशान , नैऋत्य , वायव्य , अग्नि आकाश एवं पाताल ! 📜😇 मुख्य ११ अवतार - मत्स्य , कच्छप , वराह , नरसिंह , वामन , परशुराम , श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि ! 📜😇 बारह मास - चैत्र , वैशाख , ज्येष्ठ , अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन ! 📜😇 बारह राशी - मेष , वृषभ , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , कन्या ! 📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग - सोमनाथ , मल्लिकार्जुन , महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम , विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर , भीमाशंकर , नागेश्वर ! 📜😇 पंद्रह तिथियाँ - प्रतिपदा , द्वितीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावास्या ! 📜😇 स्मृतियां - मनु , विष्णु , अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत , कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य , लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ ! ********************** इस पोस्ट को अधिकाधिक शेयर करें जिससे सबको हमारी संस्कृति का ज्ञान हो। 🌹🌹जय श्री कृष्ण🌹🌹🙏

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👏🌹👏जयश्रीकृष्ण👏🌹👏 ⛳ ️पांच पांडव का स्वर्गारोहण ⛳️ ⛳️⛳️ सच्चा साथी कौन..? ⛳️⛳️ ⛳️⛳️⛳️⛳️अद्भुत कथा जरुर पढ़े ⛳️⛳️⛳️⛳️ ⛳️⛳️महाभारत के स्वर्गारोहण पर्व मे लिखा है की पांडवो द्रौपदी के साथ सदेहे स्वर्ग जाने लगे, उस समय उसके साथ एक कुत्ता चल रहा था |चलते चलते प्रथम द्रौपदी हिमालय के बर्फ मे गिरने लगी, तब भीम ने युधिष्ठिर को कहा की हमारी चिरसंगिनी परम सुंदरी द्रौपदी गीर रही है |धर्मराज युधिष्ठिर ने पीछे की और देखे बिना कहा *गीर जाने दो *उसका व्यवहार पक्षतापूर्ण था क्योंकि वह हम सबसे अधिक अर्जुन से प्रेम करती थी |'ऐसा कहते कहते आगे चलते गये, पीछे देखा भी नहीं क्योंकि धर्मानुरागी को पीछे नहीं देखना चाहिए -थोड़े ही दुर चल पाये थे की महात्मा सहदेव की लड़खड़ाने लगे |भीम ने कहा *दादा *हमारा प्रिय सहोदर सहदेव गिरना चाहते है, इन्होने तो अहंकार रहित होकर सदैव हमलोगो की सेवा की है ये क्यों गीर रहे है..? युधिष्ठिर ने कहा भाई सहदेव को विद्वता का अहंकार था वो संसार मे सबसे बडा विद्वान् समझता था, ऐसा कहते हुये बिना पीछे देखे शेष भाइयों के साथ आगे चलते रहे |इतने मे भाई नकुल को लड़खड़ाते हुये देखकर भीम ने कहा --नकुल भी साथ छोड़ना चाहते है |'युधिष्ठिर ने कहा -उसे अपनी सुंदरता का अभिमान था, इसलिए उसका पतन हुवा, ऐसा कहते हुए बिना पीछे देखे युधिष्ठिर आगे बढ़ते चले जा रहे थे !! !!इतने मे अर्जुन के गिरने का समय उपस्थित हुवा, भीम ने कहा, दादा, गांडीव धनुष का धारण करनेवाला अर्जुन गीर रहा है, धर्मराज युधिष्ठिर ने बिना पीछे देखते हुए ही जवाब दे दीया *गिर जाने दो *उसे अपनी शूरवीरता का विशेष अभिमान था, अंत मे उस हिम प्रदेश मे महाबली भीम भी गिरने लगे तो उन्हों ने पुकारकर कहा *दादा *मै भी गिर जाता हु, रक्षा करो, तब धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा तु तो सबसे बडा अभिमानी था, तुझे अपने बल का घमंड था संसार मे मुझसे अधिक कोई बलवान नहीं है अतः तेरा पतन हो गया |बिना पीछे देखते हुए महाराज युधिष्ठिर ने अपना चलना बंध नहीं किया, उन्हों ने देखा जब प्रारंभ मे जो कुत्ता साथ चल रहा था वो साथ ही आ रहा था, | | | | कुत्ते को साथ ले कर आगे बढ रहे थे तब धर्मराज युधिष्ठिर को इंद्रदेव का दर्शन हुवा महाराज इंद्र ने कहा की *रथ *पर सवार हो कर सदेहे इन्द्रलोक चलिए, महाराज युधिष्ठिर ने कहा ये कुत्ता हमारे साथ आया है प्रथम उसे रथ,, पर चढ़ाइये मै बाद मे रथ मे चढ़ूंगा |इन्द्र ने कहा स्वर्ग मे कुत्ता नहीं जा सकता, महाराज युधिष्ठिर ने कहा यदि कुत्ता स्वर्ग मे नहीं जा सकता तो मै भी नहीं जाऊंगा, क्योंकि यह हमारी शरण मे आया है *सभी ने साथ छोड दीया *पर कुत्ते ने साथ नहीं छोडा, अतः मै कुत्ते को छोडकर स्वर्ग मे नहीं जाना चाहता | | | |अर्थात भयभीत भक्त जिसे किसी अन्य का आश्रय नहीं हो निर्बलता के कारण शरण मे आ कर अपनी प्राणो की रक्षा चाहता है ऎसे शरणागति की रक्षा अपने प्राणो का का उत्सर्ग कर के भी करना चाहूंगा ऐसा मेरा परम व्रत है, जब धर्मराज युधिष्ठिर ने इस तरह इन्द्र को कहा तब जिस धर्म ने कुत्ते का रूप धारण किया था वो मूर्तरूप हो कर सामने उपस्थित हो कर कहने लगा --मै तुम पर प्रसन्न हु, तुमने अनेक कठिनाई जोलते हुए भी धर्म का त्याग नहीं किया, | | | अतः धर्म ही हमारा इस लोक और परलोक का परम प्रिय साथी है | | | |जयश्रीकृष्ण | | | |जय श्री स्वामिनारायण | |

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