महाभारत

Narendra Sharma Oct 14, 2019

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Pt Vinod Pandey 🚩 Oct 13, 2019

🌷 *एक शक्तिशाली योद्धा* 🌷 🌅महाभारत में एक से एक बलशाली और शक्तिशाली योद्धा थे.कुछ लोग धर्म के साथ खड़े हुए थे तो कुछ अधर्म की तरफ से मात्र अपने फर्ज को निभा रहे थे. लेकिन महाभारत की कहानी ने जिस एक व्यक्ति के साथ न्याय नहीं किया है वह हम सबके प्रिय विदुर हैं. भाषा और ज्ञान के आधार पर तो हम इनको दूसरा कृष्ण बोल सकते हैं. ऐसा बोला जाता है कि वे धर्मराज का ही रूप थे. 🌸🌸🍃🌸🌸🍃🌸🌸🍃 महाभारत का सबसे शक्तिशाली योद्धा अगर पूरे महाभारत में सबसे शक्तिशाली योद्धा कोई था तो वह विदुर ही थे. 🍃🌹🍃🍯🍃🍁🍃🌺🍃 वे अगर चाहते तो अपने चमत्कारी धनुष से एक तरफ की पूरी सेना को पल भर में खत्म कर सकते थे. यह चमत्कारी धनुष खुद कृष्ण ने उनको दिया था. लेकिन उनको भली-भांति पता था कि अगर मुझको लड़ना भी पड़ा तो कौरवों की तरफ से लड़ना होगा. तभी शायद उन्होंने युद्ध लड़ने से इंकार कर दिया था. आज हम आपको एक शक्तिशाली योद्धा के जन्म से लेकर और युद्ध न लड़ने तक की कहानी बताने वाले हैं. तो आइये पढ़ते हैं कि कौन थे विदुर और क्यों इन्होंने युद्ध में शामिल होने से कर दिया था इंकार- 🌹जन्म की कहानी:-🌹 ऋषि मंदव्य को एक राजा ने चोरी के आरोप में सूली पर चढ़ा दिया था. लेकिन कई दिनों तक सूली पर लटकने के बाद भी ऋषि मंदव्य की मृत्यु नहीं हुई. इस पर राजा हैरान हो गया. उसने अपने निर्णय पर फिर विचार किया. तब राजा को ज्ञात हुआ कि उसने गलत इंसान को सूली की सजा दी है. राजा ऋषि से माफ़ी मांगता है और तब ऋषि की मृत्यु हो जाती है. ☘☘🌺☘☘🌺☘☘🌺 जब ऋषि मंदव्य यमलोक पहुँचते हैं तो वह यमलोक से पूछते हैं कि उनको इतनी भयानक सजा क्यों दी गयी है? तब यमराज ने बताया कि जब वह 12 साल के थे तो उन्होंने एक पतंगें को सुई से मारा था. यह सुन ऋषि को गुस्सा आता है और वह कहते हैं कि तब वह बालक थे और ज्ञान का अभाव था. यह सजा न्याय नहीं है और उन्होंने यमराज को श्राप दिया था कि उनको पृथ्वी पर अछूत के घर जन्म लेना होगा. इसके कारण विदुर का जन्म एक दासी के पेट से हुआ था. विदुर को कृष्ण से कम आंकने की गलती किसी ने भी नहीं की है. जब वे अपनी बात रखते थे तो सभी बड़े ध्यान से उनकी बात सुनते भी थे. दुर्योधन को लेकर तो उन्हों ने कई बार अपनी बात बिना डरे रखी थी. 🍀🌺🍀🌺🍀🌺🍀🌺🍀 जब दुर्योधन ने किया था विदुर का अपमान दुर्योधन को जब विदुर युद्ध ना करने की सलाह दे रहे थे तो इस बात ये वह काफी खफा हो गया था. बात ही बात में वह विदुर को कौआ और गीदड़ बोल देता है. विदुर इस बात से नाराज होकर अपना चमत्कारी धनुष तोड़ देते हैं और प्रण लेते हैं कि वह युद्ध नहीं करेंगे. इसके साथ विदुर, अंधे पिता को यह भी ज्ञान दे देते हैं कि दुर्योधन आपके कुल को खत्म करने के लिए पैदा हुआ है. अच्छा रहेगा कि आप सभी दुर्योधन का परित्याग कर दें. किन्तु तब उनकी बात किसी ने नहीं मानी थी. विदुर को पांडव हमेशा प्रिय लगते थे.इसलिए असंभव था कि महात्मा विदुर पांडवों के खिलाफ युद्ध लड़ते. किन्तु यह बात सत्य है कि अगर विदुर लड़ते तो युद्ध के मैदान में इनसे शक्तिशाली योद्धा कोई हो नहीं सकता था. 🌴🌹🌴🌹🌴🌹🌴🌹🌴 🍁💦🙏Զเधे👣Զเधे🙏🏻💦🍁 *☘🌷!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!💖* *☘💞हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!🌹💐* ÷सदैव जपिए एवँ प्रसन्न रहिए÷

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Pt Vinod Pandey 🚩 Oct 13, 2019

प्रेम पर भरोसा करो 🔸🔸🔹🔹🔸🔸 एक बड़ी प्राचीन कथा है। एक सम्राट अपने सेनापती पर नाराज हो गया। उसने उसे एक मीनार पर बंद करवा दिया। वहा से भागने का कोई उपाय न था। अगर वह कूदे भी तो प्राण निकल जाएं। बड़ी ऊंची मीनार थी। उसकी पत्नी बडी चिंतित थी, कैसे उसे बचाया जाए? वह एक संत के पास गयी। संत ने कहा कि जिस तरह हम बचे, उसी तरह वह भी बच सकता है। पत्नी ने पूछा कि आप भी कभी किसी मीनार पर कैद थे? तो संत ने कहा कि मीनार पर तो नहीं, लेकिन कैद जरूर थे। और हम जिस तरह बचे, वही रास्ता उसके काम भी आ जाएगा। तुम ऐसा करो… संत ने अपने बगीचे में जाकर एक छोटा सा कीड़ा उसे पकड़कर दे दिया। कीड़े की मूंछों पर शहद लगा दी और कीड़े की पूंछ में एक पतला महीन रेशम का धागा बाध दिया। पत्नी ने कहा, आप यह क्या कर रहे हैं? इससे क्या होगा? उसने कहा, तुम फिकर मत करो। ऐसे ही हम बचे। इसे तुम छोड़ दो मीनार पर। यह ऊपर की तरफ बढ़ना शुरू हो जाएगा। क्योंकि वह जो मधु की गंध आ रही है-मूंछों पर लगी मधु की गंध-वह उसकी तलाश में आगे बढ़ता जाएगा। और गंध आगे बढ़ती जाएगी जैसे-जैसे कीड़ा आगे बढ़ेगा, तलाश उसे करनी ही पड़ेगी। और उसके पीछे बंधा हुआ धागा तेरे पति तक पहुंच जाएगा। पर पत्नी ने कहा, इस पतले धागे से क्या होगा? संत ने कहा, घबराओ मत। पतला धागा जब ऊपर पहुंच जाए, तो पतले’ धागे में थोड़ा मजबूत धागा बाधना। फिर मजबूत धागे में थोड़ी रस्सी बाधना। फिर रस्सी में मोटी रस्सी बाधना। उस मोटी रस्सी से तुम्हारा पति उतर आएगा। उस छोटे से कीड़े ने पति को मुक्ति दिलवा दी। एक बड़ा महीन धागा! लेकिन उस धागे के सहारे और मोटे धागे पकड़ में आते चले गए। तुम्हारा प्रेम अभी बड़ा महीन धागा है, बहुत कचरे-कूड़े से भरा है। इसलिए जब धर्मगुरु तुम्हें समझाते हैं कि तुम्हारा प्रेम पाप है, तो तुम्हें भी समझ में आ जाता है, क्योंकि वह कूड़ा-कर्कट तो बहुत है, हीरा तो कहीं दब गया है। इसलिए तो धर्मगुरु प्रभावी हो जाते हैं, क्योंकि तुम्हें भी उनकी बात तर्कयुक्त लगती है कि तुम्हारे प्रेम ने सिवाय आसक्ति के, राग के, दुख के, पीड़ा के, और क्या दिया! तुम्हारे प्रेम ने तुम्हारे जीवन को कारागृह के अतिरिक्त और क्या दिया! तुम्हें भी समझ में आ जाती है बात कि यह प्रेम ही बंधन है। लेकिन मैं तुमसे कहता हूं कि जिस कूड़ा-कर्कट को तुम प्रेम समझ रहे हो, उसी को धर्मगुरु भी प्रेम कहकर निंदा कर रहे है। लेकिन तुम्हारे कूड़ा-कर्कट में एक पतला सा धागा भी पड़ा है, जिसे शायद तुम भी भूल गए हो। उस धागे को मुक्त कर लेना है। क्योंकि उसी धागे के माध्यम से तुम कारागृह के बाहर जा सकोगे। ध्यान रखना, इस सत्य को बहुत खयाल में रख लेना कि जो बांधता है उसी से मुक्ति भी हो सकती है। जंजीर बांधती है तो जंजीर से ही मुक्ति होगी। कांटा गड़ जाता है, पीडा देता है, तो दूसरे काटे से उस काटे को निकाल लेना पड़ता है। जिस रास्ते से तुम मेरे पास तक आए हो, उसी रास्ते से वापस अपने घर जाओगे, सिर्फ रुख बदल जाएगा, दिशा बदल जाएगी। आते वक्त मेरी तरफ चेहरा था, जाते वक्त मेरी तरफ पीठ होगी। रास्ता वही होगा, तुम वही होओगे। प्रेम के ही माध्यम से तुम संसार तक आए हो, प्रेम के ही माध्यम से परमात्मा तक पहुंचोगे; रुख बदल जाएगा, दिशा बदल जाएगी। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

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