महाकुंभ जानकारी

Narayan Tiwari Feb 14, 2019

श्री अक्षयवट को साक्षात् भगवान विष्णु का विग्रह मांना जाता हैं, जानिएं कथा? ********************************** श्री अक्षयवट संगम प्रयागराज के निकट सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह बरगद का बहुत पुराना वृक्ष है, जो प्रलयकाल में भी नष्ट नहीं होता। पर्याप्त सुरक्षा के बीच संगम के निकट किले में श्री अक्षयवट हैं।इस तरह के तीन और वृक्ष हैं- मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौधवट भी कहा जाता है और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट।  श्री अक्षयवट कितने हजार वर्ष पुराना है , यह कहा नहीं जा सकता हैं। मगर ऐसा माना जाता है कि प्रलय काल में भगवान विष्णु इसके एक पत्ते पर बाल मुकंद रूप में अपना अंगूठा चूसते हुए कमलवत शयन करते हैं। प्रभु श्री राम अक्षयवट के नीचे विश्राम किए थें! अक्षय वट की कथा :🚩 पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान ब्रह्मा ने यहां पर एक बहुत बड़ा यज्ञ किया था। इस यज्ञ में वह स्वयं पुरोहित, भगवान विष्णु यजमान एवं भगवान शिव उस यज्ञ के देवता बने थे।  तब अंत में तीनों देवताओं ने अपनी शक्ति पुंज के द्वारा पृथ्वी के पाप बोझ को हल्का करने के लिए एक 'वृक्ष' उत्पन्न किया। यह एक बरगद का वृक्ष था जिसे आज अक्षयवट के नाम से जाना जाता है। यह आज भी विद्यमान है।  श्री अक्षयवटाय नमः।।🚩 श्री अक्षयवट महाराज की जय।। ।। जय गंगा मांई।।🚩

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Narayan Tiwari Feb 10, 2019

देवी सरस्वती से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:- *********************************** हिन्दू धर्म में देवी सरस्वती को ज्ञान, साहित्य, कला और स्वर की देवी माना जाता है। इन्हें पीला रंग अतिप्रिय है। सरस्वती जी का वर्णन ब्रह्मा जी की मानस पुत्री के रूप में है लेकिन कई स्थानों पर इन्हें ब्रह्मा जी की पत्नी के रूप में भी दिखाया गया है। हर वर्ष की माघ शुक्ल पंचमी अर्थात वसंत पंचमी को देवी सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।  देवी सरस्वती की जन्म कथा :-🚩 एक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने जगत की रचना की, उस समय पृथ्वी पर चारों तरफ उदासी का वातावरण छाया हुआ था। पृथ्वी के वातावरण को मंगलमय बनाने का विचार करते हुए ब्रह्मा जी के मुख से एक सुंदर स्त्री का जन्म हुआ। इस स्त्री के हाथ में वीणा था, जैसे ही स्त्री ने वीणा बजाना शुरू किया पूरी पृथ्वी लहलहा उठी। तभी से उस दिन को वसंत पंचमी के रुप में मनाया जाने लगा।  देवी सरस्वती का स्वरूप :--🚩 शास्त्रों और पुराणों के अनुसार देवी सरस्वती बहुत ही शांत स्वभाव की हैं। उनके चार हाथ है जिसमें से एक हाथ में माला और एक हाथ में वेदों को धारण किया हुआ है, जबकि दो अन्य हाथों से देवी ने वीणा पकड़ा हुआ है। इनके गले में श्वेत रंग की माला है तथा इनके वस्त्र भी श्वेत हैं। देवी सरस्वती का वाहन मोर हैं। देवी सरस्वती का मंत्र :🚩 सरस्वती जी की पूजा के लिए अष्टाक्षर मूल मंत्र :-- "श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा" परम श्रेष्ठतम और उपयोगी माना जाता है। साथ ही सरस्वती जी को प्रसन्न करने तथा विद्या प्राप्ति के लिए इस मंत्र का भी प्रयोग किया जाता है:  ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।। देवी सरस्वती से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें :🚩 सरस्वती जी का विवाह आपने पिता ब्रह्मा जी से हुआ था। उनका वाहन मोर है। देवी सरस्वती स्वर और विद्या की देवी हैं। विष्णु जी के श्राप के कारण ही देवी सरस्वती, सरस्वती नदी बनी थी।   देवी सरस्वती के अन्य नाम :🚩 शारदा शतरूपावाणी वाग्देवी वागेश्वरी भारती कौशिकी देवी सरस्वती के प्रमुख मंदिर :🚩 शारदा मंदिर (मैहर) सरस्वती मंदिर (पुष्कर) श्रृंगेरी मंदिरसरस्वती मंदिर (कोट्टयम) श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर (निजामाबाद) तीर्थराज प्रयाग की जय।।🚩 ।। जय मां सरस्वती।।🚩

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https://youtu.be/b6I5yCCrIUE

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