मंदिर-दर्शन

Vinod Sharma Jun 18, 2019

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Sn Vyas Jun 18, 2019

*🙏हमारी संस्कृति हमारी विरासत🙏* *देवास के महाकालेश्वर -बिलावली महादेव* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 *यहां महादेव हर साल तिल के बराबर बढ़ते है* आस्था और विश्वास की इस कड़ी में हम आपको रूबरू करवा रहे हैं देवास के महाकालेश्वर मंदिर से। इस मंदिर से हजारों लोगों की आस्था जुड़ी है। मंदिर के आसपास रहने वाले और यहां नियम से दर्शन करने आने वाले लोगों का कहना है कि यहां का शिवलिंग न सिर्फ स्वयंभू है, बल्कि हर साल इसकी ऊंचाई लगातार बढ़ रही है, जो अपने आप में एक चमत्कार है यहां आने वाले भक्तो विश्वास है कि यहां मांगी गई मनौतियां जरूर पूरी होंगी। मंदिर में प्रतिष्ठित लिंग काफी कुछ उज्जैन के महाकाल के शिवलिंग की तरह ही है बस यह बात अजीब है कि जहां महाकाल का शिवलिंग क्षरण के कारण लगातार घट रहा है, वहीं लोगों का दावा है कि यहां का शिवलिंग लगातार बढ़ रहा है। मंदिर के आसपास रहने वालो का कहना है कि वे बचपन से इस शिवलिंग की आराधना करते आए हैं। उन्होंने खुद इस शिवलिंग को आकार बदलते अर्थात बढ़ते हुए देखा है। इनका दावा है कि हर शिवरात्रि के दिन यह शिवलिंग एक तिल के आकार का बढ़ जाता है। शुरू में तो किसी को भी पता नहीं चला था, परंतु चार-पांच साल बाद सभी को अहसास होने लगा कि शिवलिंग लगातार बढ़ रहा है। अब इसकी ऊंचाई लिंग के मूल रूप की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। इस शिवलिंग के स्वयंभू होने के पीछे भी एक कथा है। कहते हैं आज से लगभग सौ साल पहले जब देवास एक गांव था और यहां यातायात के अच्छे साधन नहीं थे, उस समय गौरीशंकर पंडित नामक व्यक्ति महाकाल के परम भक्त थे। वे रोज सुबह महाकाल के दर्शन करने के बाद ही अन्न ग्रहण करते थे। उनका यह नियम अटूट था। एक बार मूसलधार बारिश होने के कारण देवास-उज्जैन मार्ग का नाला उफन गया और वे उज्जैन नहीं जा पाए। 'अपने आराध्य के दर्शन नहीं कर पाने के कारण गौरीशंकरजी ने अन्न-जल त्याग दिया। इस बार बारिश ने रुकने का नाम नहीं लिया और गौरीशंकर जीवन के अंतिम क्षण गिनने लगे। वे मृत्यु के करीब ही थे कि तभी उन्हें भोलेशंकर ने दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। गौरीशंकर ने प्रभु से नित्य दर्शन का वरदान मांगा। प्रभु ने आशीर्वाद दिया कि जहां भी वे पांच बिल्वपत्र रखेंगे वहीं महाकाल प्रकट होंगे।' इस संयोग के बाद ही देवास के इस टीले पर स्वयंभू भगवान प्रकट हुए। ग्रामीणों ने यहां मंदिर का निर्माण करवा दिया। उसके बाद यह मंदिर जनआस्था का केंद्र बन गया। इस संयोग के कुछ साल बाद लोगों ने महसूस किया कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग लगातार बढ़ रहा है। तब इसे चमत्कार माना जाने लगा। यहां आने वाले लोगों का दावा है कि शिवलिंग शिवरात्रि के दिन एक तिल बढ़ जाता है। मंदिर की सेवा समिति के सदस्यों द्वारा बताया गया की उन्होंने लगातार इस शिवलिंग को बढ़ते हुए देखा है। वे दावा करते हैं कि यह चमत्कारिक शिवलिंग है, जिसका आकार लगातार बढ़ रहा है साथ ही ऐसे चमत्कारों के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि है कि कई जगह भूगर्भीय क्रियाओं के कारण भी शिवलिंग में हलकी बढ़त हो सकती है। पर जहां आस्था और श्रद्धा की बात आती है, वहां शक की गुंजाइश नहीं रहती। संकलन :- मुकेश

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