भोलेनाथ

Anuradha Tiwari Dec 20, 2018

जय महाकाल 📌 स्त्री सिर्फ तब तक तुम्हारी होती है जब तक वो तुमसे रूठ लेती है 📌 लड लेती है आंसू बहा बहाकर , और दे देती है दो चार उलाहना तुम्हे 📌 कह देती है जो मन में आता है उसके बिना सोचे,बेधडक लेकिन जब वो देख लेती है 📌 उसके रूठने का, उसके आंसुओं का कोई फर्क नहीं है तुम पर 📌 तो एका एक वो रूठना छोड देती है रोना छोड देती है 📌 मुस्कुराकर देने लगती है जवाब तुम्हारी बातों पर समेट लेती है वो खुद को किसी कछुए की तरह अपने ही कवच में , 📌 और तुम समझ लेते हो कि सब कुछ ठीक हो गया है 📌 तुम जान ही नही पाते कि ये शांत नही है मृतप्राय हो चुकी है, कहीं न कहीं गला घोंट दिया है 📌 उसने अपनी भावनाओं का , और अब जो तुम्हारे पास है, वो तुम्हारी होकर भी तुम्हारी नहीं है 📌 जय जय श्री महाकाल

+164 प्रतिक्रिया 15 कॉमेंट्स • 33 शेयर
Anuradha Tiwari Dec 20, 2018

+63 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 6 शेयर

+37 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 61 शेयर

+21 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 22 शेयर