भारतीय_सनातन_धर्म_और_विज्ञान*

Neeru Miglani Apr 5, 2020

🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 *^महामारी^* ~~~~~~ एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा तुम्हारी राजधानी के बीचो बीच जो पुराना सूखा कुंआ है अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक – एक बाल्टी दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है । अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे अगर मै अकेली एक बाल्टी "पानी" डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुयी थी। राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है। दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं। दरअसल ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला। मित्रों , जैसा इस कहानी में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है। जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं। अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जायें तो पूरे देश में भी ऐसा बदलाव ला सकते हैं जिसकी आज ज़रूरत है। 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 21 दिन लोकडाउन की पालना जरूर करे..!! घर में रहें, सुरक्षित रहें..!!🙏🏼🙏🏼🙏🏼 *आज रात घर के बाहर दीपक जरूर जलायें |🙏🙏 *शुभम् करोति कल्याणं, आरोग्य धन संपदाम् | शत्रुबुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते || ✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡✡

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Neeru Miglani Mar 26, 2020

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"जानिए इश्वर के निराकार स्वरूप की तुलना में इश्वर के साकार स्वरूप की पूजा बेहतर क्यों है संसार के जितने भी धर्म है उनमे से ज्यादातर इश्वर को निराकार ही मानते है. वेदों में भी इश्वर को निराकार कहा गया है. पुराण भी यहीं कहते है इश्वर में न तो गुण है और न कोई उसका आकार है. जब उस निराकार सर्वव्यापी इश्वर को सृष्टि करने की इच्छा होती है तो वह पंचतत्व और दस इन्द्रियों और चेतना का आश्रय करके शरीर धारण करता है. यहाँ पर एक बात साबित हो जाती है कि इश्वर तो निराकार और निर्गुण ही है परंतु उसके निराकार स्वरूप की तुलना में उसका साकार स्वरूप ज्यादा बेहतर है. इसका एक कारण है कि वह सृष्टिकर्ता है और जो सृष्टिकर्ता बनने के लिए वह साकार हो जाते है. इसका अर्थ यह नहीं कि वह बिना आकार धारण करें सृष्टिकर्ता नहीं बन सकते परंतु इसका अर्थ यह है कि वह चाहते है कि उनकी संताने यह न महसूस करे कि वह इस जगत में निराधार है, उनका मार्गदर्शन करनेवाला कोई नहीं है. इश्वर के साकार स्वरूप की पूजा करना ज्यादा बेहतर इसलिए भी है कि इश्वर के साकार स्वरूप की पूजा करने से मनुष्य के अंदर स्त्री की पूजा करने का भाव उत्पन्न हो जाता है. शिवपुराण में लिखा है शिवजी को निराकार और निर्गुण है, वह प्रकृति का आश्रय करके ही साकार और सगुण होते है. पुराणों के अनुसार शिव पुरुष है और प्रकृति पुरुष है. यहाँ पर इस बात को जोर दिया गया है कि प्रकृति के बिना शिव साकार नहीं होते . शिवजी को अपने कार्य करने में शक्ति अर्थात प्रकृति का आश्रय लेना पड़ता है. बिलकुल इसी तरह भगवान विष्णु को भी सृष्टि का संचालन करने के लिए माँ लक्ष्मी और अपनी योगमाया का आश्रय करना पड़ता है और भगवान ब्रह्माजी को भी सृजन का कार्य करने के लिए ज्ञान की देवी सरस्वती का आश्रय करना पड़ता है. इसीलिए पुराणों में यह बात स्पस्ट तौर पर कही गई है कि इश्वर का नाम लेने से पहले प्रकृति का नाम लेना बहुत जरूरी है. इसलिए हमारे यहाँ शंकर से पहले गौरी कहा जाता है और कृष्ण से पहले राधा कहा जाता है. हम हरी से पहले श्री लगाते है और राम को सिर्फ राम नहीं सियाराम कहते है. दोस्तों मेरा दृष्टिकोण है कि इश्वर का साकार स्वरूप इस संसार में स्त्रियों के प्रति भक्ति और आदर की तरफ प्रेरित करता है. जब आप इश्वर के निराकर स्वरूप की पूजा करते है तो आप केवल इस जगत के पिता के सम्मान देते है परंतु इस जगत की माता प्रकृति को इतना सम्मान नहीं देते जितना देना चाहिए. उस समय कहने के लिए बोला तो जरूर जाता है की इश्वर ही माता है और इश्वर ही पिता है परंतु उस बात में जो भावना स्त्रियों के प्रति उत्पन्न होनी चाहिए वह नहीं होती. जय गौरीशंकर जय श्री महाकाल जी जय श्री भोलेनाथ जय श्री निलकंठ जय श्री उमाशंकर हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय जय श्री महाकाली माता की वंदेमातरम नमस्कार 🙏 शुभ दिवस जय श्री पार्वती माता की 👣🌹👏🎊🎈🌺🌺🍃🍃🌿🌿🔥🔥🌷🌷

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