भक्ति

Jay Lalwani Oct 16, 2019

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Jay Lalwani Oct 16, 2019

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Chandrashekhar Karwa Oct 15, 2019

श्रीरामचरित मानस  Serial No 33 (बालकाण्ड) 1/19/3  चौपाई / छंद / दोहा -  जान आदिकबि नाम प्रतापू । भयउ सुद्ध करि उलटा जापू ॥  व्यक्त भाव एवं प्रेरणा - गोस्वामी श्री तुलसीदासजी श्री रामायणजी के प्रथम रचेता आदिकवि ऋषि श्री वाल्मीकिजी की वंदना करते हैं । ऋषि श्री वाल्मीकिजी त्रिकालदर्शी थे और उन्होंने प्रभु श्री रामजी के युग में ही वह भी पूर्व में लिख दिया था जो की आगे घटने वाला था । गोस्वामीजी कहते हैं कि ऋषि श्री वाल्मीकिजी प्रभु श्री रामजी और उनके दिव्य नाम के प्रताप को जानने वाले थे । वे पूर्व में ऋषि नहीं थे और पापों के कारण श्रीराम नाम उनसे लिया भी नहीं गया । तब देवर्षि प्रभु श्री नारदजी के कहने पर राम का उल्टा मरा-मरा जपते जपते भी वे पवित्र हो गये और रामप्रिय होकर ऋषि बन गये । प्रभु श्री रामजी के उल्टे नाम का भी इतना अद्भुत प्रभाव है ।  www.devotionalthoughts.in

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