पापांकुशा एकादशी

Babita Sharma Oct 27, 2020

*उपवास हमेशा अन्न का ही क्यूँ?* *कभी-कभी लोभ, लालच, चुगली, झूठ, क्रोध और कुविचारों का भी होना चाहिये..!* 🌹सुप्रभात🌹 हरि ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏🙏शुभ एकादशी🙏🙏 पापांकुशा एकादशी आज, पापों से मुक्त करता है पापाकुंशा एकादशी का व्रत: पापांकुशा एकादशी व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। एकादशी तिथि का व्रत जीवों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होता है। यह दिन श्री हरि की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है। इस दिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिये भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरुप की पूजा की जाती है। वैसे तो प्रत्येक एकादशी का अपना ही अलग महत्व है लेकिन पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति का सभी जाने -अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है। इस व्रत को करने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं। पापांकुशा एकादशी एक हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का अधिकारी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, उसे यमराज के दर्शन नहीं होते। भगवान पद्मनाभ होंगे प्रसन्न पापांकुशा एकादशी के दिन गरूड़ पर विराजमान भगवान विष्णु के दिव्य रूप की पूजा की जाती है। एकादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। भगवान विष्णु को चन्दन, अक्षत, मोली,फल, फूल,मेवा आदि अर्पित करें। इसके बाद एकादशी की कथा सुननी चाहिए,एवं 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जितना संभव हो जप करें एवं भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारनी चाहिए। पापांकुशा एकादशी की कथा: प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर एक क्रूर बहेलियां रहता था। उसने अपनी सारी जिंदगी हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और गलत संगति में व्यतीत कर दी। जब उसका अंतिम समय आया तब यमराज के दूत बहेलिये को लेने आए और यमदूत ने बहेलिये से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है हम तुम्हें कल लेने आएंगे। यह बात सुनकर बहेलिया बहुत भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा और महर्षि अंगिरा के चरणों पर गिरकर प्रार्थना करने लगा। महर्षि अंगिरा ने बहेलिये से प्रसन्न होकर कहा कि तुम अगले दिन ही आने वाली आश्विन शुक्ल एकादशी का विधि पूर्वक व्रत करना। बहेलिये ने महर्षि अंगिरा के बताए हुए विधान से विधि पूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत करा और इस व्रत पूजन के बल से भगवान की कृपा से वह विष्णु लोक को गया। जब यमराज के यमदूत ने इस चमत्कार को देखा तो वह बहेलिया को बिना लिए ही यमलोक वापस लौट गए। पापांकुशा एकादशी व्रत विधि: - एकादशी के दिन सुबह उठकर स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें. - अब व्रत का संकल्‍प लें. - इसके बाद घर के मंदिर या पूजा के स्‍थान पर घट की स्‍थापना करें. - अब घट के ऊपर भगवान विष्‍णु की प्रतिमा या चित्र रखें. - अब विष्‍णु जी की प्रतिमा को दीपक दिखाएं और फूल, नारियल और नैवेद्य अर्पण करें. - इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. - अब धूप-दीपक से विध‍िवत् विष्‍णु जी की आरती उतारें. - विष्‍णु जी की पूजा करते वक्‍त तुलसी दल अवश्‍य रखें. - रात्रि के समय जागरण करें और भगवान का भजन-कीर्तन करें. - अगले दिन यानी कि द्वादश को ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दक्षिणा देकर विदा करें. - एकादशी का व्रत करने वालों को दशमी तिथि से ही व्रत का पालन करना चाहिए. - दशमी पर सात तरह के अनाज- गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए. दरअसल, इन सातों अनाजों की पूजा एकादशी के दिन की जाती है. हरि ॐ नमो नारायण 🙏🙏

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🥀🥀 Nov 11, 2020

रमा एकादशी आज, व्रत करके पाएं मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा ***************************************** कार्तिक मास की एकादशी को रमा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस बार एकादशी तिथि 11 नवंबर से शुरू होकर 12 नवंबर तक रहेगी। इस साल रमा एकादशी व्रत 11 नवंबर (बुधवार) को रखा जाएगा। साल की 24 एकादशियों में रमा एकादशी का विशेष महत्व होता है। चार महीने बाद भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागते हैं। पद्म पुराण के अनुसार, रमा एकादशी व्रत रखने से मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी कृपा मिलती है। क्यों पड़ा रमा एकादशी नाम? ==================== दीपावली पर मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। माता लक्ष्मी का ही एक अन्य नाम रमा भी है, इसलिए इस एकादशी को रमा एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है और साथ ही आर्थिक परेशानी भी नहीं होती है। रमा एकादशी पूजा मुहूर्त- ================== एकादशी तिथि आरंभ- 11 नवंबर 2020, (बुधवार) सुबह 03 बजकर 22 मिनट से। एकादशी तिथि समाप्त- 12 नवंबर 2020 (गुरुवार) 12 बजकर 40 मिनट तक। एकादशी व्रत पारण तिथि- 12 नवंबर 2020, बृहस्पतिवार, प्रातः 06 बजकर 42 मिनट से 08 बजकर 51 मिनट तक। रमा एकादशी पूजा विधि- ================== 1. व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें और व्रत संकल्प लें। 2. इसके बाद भगवान विष्णु की अराधना करें। 3. अब भगवान विष्णु के सामने दीप-धूप जलाएं। फिर उन्हें फल, फूल और भोग अर्पित करें। 4. मान्यता है कि रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरुरी अर्पित करनी चाहिए। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी की पत्ती न तोड़े बल्कि पहले से टूटी पत्तियों को अर्पित करें। 5. एकादशी के अन्न का सेवन करें। रमा एकादशी व्रत कथा- ================ एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में मुचुकंद नाम के एक प्रतापी राजा थे। उनकी चंद्रभागा नाम की एक पुत्री थी। राजा ने अपनी बेटी का विवाह राजा चंद्रसेन के बेटे शोभन के साथ कर दिया। शोभन एक समय बिना खाए नहीं रह सकता था। शोभन एक बार कार्तिक मास के महीने में अपनी पत्नी के साथ ससुराल आया, तभी रमा एकादशी व्रत पड़ा। चंद्रभागा के गृह राज्य में सभी रमा एकादशी का नियम पूर्वक व्रत रखते थे और ऐसा ही करने के लिए शोभन से भी कहा गया। शोभन इस बात को लेकर परेशान हो गया कि वह एक पल भी भूखा नहीं रह सकता है तो वह रमा एकादशी का व्रत कैसे करेगा। वह इसी परेशानी के साथ पत्नी के पास गया और उपाय बताने के लिए कहा। चंद्रभागा ने कहा कि अगर ऐसा है तो आपको राज्य के बाहर जाना पड़ेगा। क्योंकि राज्य में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो इस व्रत नियम का पालन न करता हो। यहां तक कि इस दिन राज्य के जीव-जंतु भी भोजन नहीं करते हैं। आखिरकार शोभन को रमा एकादशी उपवास रखना पड़ा, लेकिन पारण करने से पहले उसकी मृत्यु हो गयी. चंद्रभागा ने पति के साथ खुद को सती नहीं किया और पिता के यहां रहने लगी। उधर एकादशी व्रत के पुण्य से शोभन को अगले जन्म में मंदरांचल पर्वत पर आलीशान राज्य प्राप्त हुआ। एक बार मुचुकुंदपुर के ब्राह्मण तीर्थ यात्रा करते हुए शोभन के दिव्य नगर पहुंचे. उन्होंने सिंहासन पर विराजमान शोभन को देखते ही पहचान लिया। ब्राह्मणों को देखकर शोभन सिंहासन से उठे और पूछा कि यह सब कैसे हुआ। तीर्थ यात्रा से लौटकर ब्राह्मणों ने चंद्रभागा को यह बात बताई। चंद्रभागा बहुत खुश हुई और पति के पास जाने के लिए व्याकुल हो उठी। वह वाम ऋषि के आश्रम पहुंची। चंद्रभागा मंदरांचल पर्वत पर पति शोभन के पास पहुंची। अपने एकादशी व्रतों के पुण्य का फल शोभन को देते हुए उसके सिंहासन व राज्य को चिरकाल के लिये स्थिर कर दिया। तभी से मान्यता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को रखता है वह ब्रह्महत्या जैसे पाप से मुक्त हो जाता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। राजेन्द्र गुप्ता, ज्योतिषी और हस्तरेखाविद मो. 9611312076 नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।

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🌷 *पापांकुशा एकादशी* 🌷 ➡ *26 अक्टूबर 2020 सोमवार को सुबह 09:01 से 27 अक्टूबर, मंगलवार को सुबह 10:46 तक एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 27 अक्टूबर, मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* 🙏🏻 *युधिष्ठिर ने पूछा : हे मधुसूदन ! अब आप कृपा करके यह बताइये कि आश्विन के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है और उसका माहात्म्य क्या है ?* 🙏🏻 *भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! आश्विन के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, वह ‘पापांकुशा’ के नाम से विख्यात है । वह सब पापों को हरनेवाली, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, शरीर को निरोग बनानेवाली तथा सुन्दर स्त्री, धन तथा मित्र देनेवाली है । यदि अन्य कार्य के प्रसंग से भी मनुष्य इस एकमात्र एकादशी को उपास कर ले तो उसे कभी यम यातना नहीं प्राप्त होती ।* 🙏🏻 *राजन् ! एकादशी के दिन उपवास और रात्रि में जागरण करनेवाले मनुष्य अनायास ही दिव्यरुपधारी, चतुर्भुज, गरुड़ की ध्वजा से युक्त, हार से सुशोभित और पीताम्बरधारी होकर भगवान विष्णु के धाम को जाते हैं । राजेन्द्र ! ऐसे पुरुष मातृपक्ष की दस, पितृपक्ष की दस तथा पत्नी के पक्ष की भी दस पीढ़ियों का उद्धार कर देते हैं । उस दिन सम्पूर्ण मनोरथ की प्राप्ति के लिए मुझ वासुदेव का पूजन करना चाहिए । जितेन्द्रिय मुनि चिरकाल तक कठोर तपस्या करके जिस फल को प्राप्त करता है, वह फल उस दिन भगवान गरुड़ध्वज को प्रणाम करने से ही मिल जाता है ।* 🙏🏻 *जो पुरुष सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, वह कभी यमराज को नहीं देखता । नृपश्रेष्ठ ! दरिद्र पुरुष को भी चाहिए कि वह स्नान, जप ध्यान आदि करने के बाद यथाशक्ति होम, यज्ञ तथा दान वगैरह करके अपने प्रत्येक दिन को सफल बनाये ।* 🙏🏻 *जो होम, स्नान, जप, ध्यान और यज्ञ आदि पुण्यकर्म करनेवाले हैं, उन्हें भयंकर यम यातना नहीं देखनी पड़ती । लोक में जो मानव दीर्घायु, धनाढय, कुलीन और निरोग देखे जाते हैं, वे पहले के पुण्यात्मा हैं । पुण्यकर्त्ता पुरुष ऐसे ही देखे जाते हैं । इस विषय में अधिक कहने से क्या लाभ, मनुष्य पाप से दुर्गति में पड़ते हैं और धर्म से स्वर्ग में जाते हैं ।* 🙏🏻 *राजन् ! तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, उसके अनुसार ‘पापांकुशा एकादशी’ का माहात्म्य मैंने वर्णन किया । अब और क्या सुनना चाहते हो?* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🙏🏻🌷🍀🌻🌹🌼🌸🌺💐🙏🏻

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