नवरात्रि_विशेष

Kushal Ghosh Mar 23, 2020

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🙏 जानें गुप्त नवरात्रि क्या है 🙏 🚩🚩 जय माता दी 🚩🚩 देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में "दस महाविद्याओं की साधना" की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक "माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी" की पूजा करते हैं। कम लोगों को गुप्त नवरात्रि के बारे में जानकारी होने और इसके पीछे छिपे रहस्यमयी कारणों की वजह से इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। इसमें विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है। 🔘माघ और आषाढ़ मास गुप्त नवरात्रि की तिथियाँ इस बार माघ महीने की गुप्त नवरात्रि 25 जनवरी से 03 फरवरी एवं आषाढ़ मास की 22 जून से 30 जून 2020 तक रहेगी। सामान्यतः लोग साल में दो बार आने वाले चैत्र या वासंतिक नवरात्र और आश्विन या शारदीय नवरात्रों के बारे में ही जानते हैं। इसके अतिरिक्त दो और नवरात्र भी हैं जिनमे विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। कम लोगों को इसके बारे में जानकारी होने और इसके पीछे छिपे रहस्यमयी कारणों की वजह से इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। 🔘वर्ष में दो बार होते हैं गुप्त नवरात्र कुल मिलाकर वर्ष में चार नवरात्र होते हैं। यह चारों ही नवरात्र ऋतु परिवर्तन के समय मनाए जाते हैं। महाकाल संहिता और तमाम शाक्त ग्रंथों में इन चारों नवरात्रों का महत्व बताया गया है। इसमें विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है। 🔘क्या अंतर है सामान्य और गुप्त नवरात्रि में? - सामान्य नवरात्रि में आम तौर पर सात्विक और तांत्रिक पूजा दोनों की जाती है। - वहीं गुप्त नवरात्रि में ज्यादातर तांत्रिक पूजा की जाती है। - गुप्त नवरात्रि में ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं किया जाता है, बल्कि अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है। - गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होगी, सफलता उतनी ही ज्यादा मिलेगी। 🔘क्या होगी गुप्त नवरात्रि में मां की पूजा विधि? - नौ दिनों के लिए कलश की स्थापना की जा सकती है - अगर कलश की स्थापना की है तो दोनों वेला मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करना चाहिए। - दोनों ही समय आरती भी करना अच्छा होगा। - मां को दोनों वेला भोग भी लगायें, सबसे सरल और उत्तम भोग है लौंग और बताशा। - मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है पर मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिलकुल न चढ़ाएं। - पूरे नौ दिन अपना खान पान और आहार सात्विक रखें। 🔘गुप्त नवरात्रि का महाप्रयोग - एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं - उस पर मां की मूर्ति या प्रतिकृति की स्थापना करें - मां के समक्ष एक बड़ा घी का एकमुखी दीपक जलाएं - प्रातः और सायं मां के विशिष्ट मंत्र का 108 बार जप करें 🔘मंत्र होगा : "ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे" 🙏🚩🌺 जय माँ काली 🌺🚩🙏

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👏🌹🎎नवरात्रि विशेष 🎎🌹👏 🚩👣🐯जय माता दी🐯👣🚩 🚩👣🌹नौ दिन की नौ देवी के नौ मंत्र 🌹👣🚩 🦁 शारदिय नवरात्रि 29सितंबर से शुरू होंगे । नव दिनों तक चलने वाले इस पर्व का विशेष महत्व होता है । इन नव दिनों में माँ दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। 🦁 माता दुर्गा के 9 रूपों की साधना करने से भिन्न-भिन्न फल प्राप्त होते हैं। कई साधक अलग-अलग तिथियों को जिस देवी की तिथि हैं, उनकी साधना करते हैं। आइए जानें कि हर दिन किस मंत्र से करें देवी आराधना 🎭 (1) 🚩माता शैलपुत्री : प्रतिपदा के दिन इनका पूजन-जप किया जाता है। मूलाधार में ध्यान कर इनके मंत्र को जपते हैं। धन-धान्य-ऐश्वर्य, सौभाग्य-आरोग्य तथा मोक्ष के देने वाली माता मानी गई हैं। 🐯 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:।' 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 (2) 🚩 माता ब्रह्मचारिणी : स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। संयम, तप, वैराग्य तथा विजय प्राप्ति की दायिका हैं। 🎎 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:।' 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 (3) 🚩 माता चन्द्रघंटा : मणिपुर चक्र में इनका ध्यान किया जाता है। कष्टों से मुक्ति तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए इन्हें भजा जाता है। 🦁 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम:।' 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 (4) 🚩माता कूष्मांडा : अनाहत चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। रोग, दोष, शोक की निवृत्ति तथा यश, बल व आयु की दात्री मानी गई हैं। 🎎 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:।' 🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋 (5) 🚩माता स्कंदमाता : इनकी आराधना विशुद्ध चक्र में ध्यान कर की जाती है। सुख-शांति व मोक्ष की दायिनी हैं। 🦁 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नम:।' 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 (6) 🚩माता कात्यायनी : आज्ञा चक्र में ध्यान कर इनकी आराधना की जाती है। भय, रोग, शोक-संतापों से मुक्ति तथा मोक्ष की दात्री हैं। 👣 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनायै नम:।' 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 (7) 🚩 माता कालरात्रि : ललाट में ध्यान किया जाता है। शत्रुओं का नाश, कृत्या बाधा दूर कर साधक को सुख-शांति प्रदान कर मोक्ष देती हैं। 🐯 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:।' 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 (8) 🚩माता महागौरी : मस्तिष्क में ध्यान कर इनको जपा जाता है। इनकी साधना से अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं। असंभव से असंभव कार्य पूर्ण होते हैं। 🎎 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:।' 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 (9) 🚩माता सिद्धिदात्री : मध्य कपाल में इनका ध्यान किया जाता है। सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं। 🦁 मंत्र- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्यै नमः।, 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 🎎विधि-विधान से पूजन-अर्चन व जप करने पर साधक के लिए कुछ भी अगम्य नहीं रहता। 🚩 🚩👣🐯जय माता दी🐯👣🚩 🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁

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