देवी भजन

Deepak Ajmani Jul 23, 2019

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Amit Kumar Jul 23, 2019

💐गीता,अध्याय,18/19,20,21,💐💐 💐(तीनों गुणों के अनुसार ज्ञान, कर्म, कर्ता, बुद्धि, धृति और सुख के पृथक-पृथक भेद)💐 💐 ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः । प्रोच्यते गुणसङ्ख्याने यथावच्छ्णु तान्यपि ॥ भावार्थ : गुणों की संख्या करने वाले शास्त्र में ज्ञान और कर्म तथा कर्ता गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार के ही कहे गए हैं, उनको भी तु मुझसे भलीभाँति सुन॥19॥ सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते । अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम् ॥ भावार्थ : जिस ज्ञान से मनुष्य पृथक-पृथक सब भूतों में एक अविनाशी परमात्मभाव को विभागरहित समभाव से स्थित देखता है, उस ज्ञान को तू सात्त्विक जान॥20॥ पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान्‌ । वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम्‌ ॥ भावार्थ : किन्तु जो ज्ञान अर्थात जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य सम्पूर्ण भूतों में भिन्न-भिन्न प्रकार के नाना भावों को अलग-अलग जानता है, उस ज्ञान को तू राजस जान॥21॥💐 💐देखोभाई सास्त्र ज्ञान,कर्म,और कर्ता जे तीन प्रकार बताये है ,ज्ञान जब ब्यक्ति सतोगुणी होता है तो वह सब में ब्रम्ह को देखता है, चाहे वह आदमी हो या जानवर ऊपर से शरीर किसी का हो पर अंदर से मेरा प्रभु ही तो बैठा है ,संत नामदेव जी क स्वभाव था नित्य भोजन में अपने हांथो की पोई रोटी शुद्ध घी चुपड़कर,भगवान को भोग लगाकर खाया करते थे, एक दिन रोटी बनाकर थाली में रखकर अंदर घी की डबुलिया लेने अंदर गए तभी एक काला कुत्ता आया और नामदेव जी की थाली से पूरी रोटी उठाया और ले चला ,तभी नामदेव जी बाहर आये कुत्ते को रोटी ले जाते देखा तो चिल्लाने लगे प्रभु रोटियों में वही तो लगवा लो ,और घी लेकर पीछे दौड़े तभी उपटा लगा और गिर गए दांत टूट गए मुह से खून बहने लगा ,तभी उस कुत्ते से भगवान का प्राकट्य हो गया,यह है सतोगुणी भाव जो सब मे भगवान को देखता है, दूसरा राजो गुणी ज्ञान जो कि सबमे भिन्न भिन्न भाव रखता है ,कोई अमीर तो कोई गरीब कोई छोटा तो कोई बड़ा दिखाई देता है उस ज्ञान को रजोगुणी ज्ञान कहते हैं,तथा जो अपने शरीर तक ही सीमित हो जो शरीर को ही सब कुछ समझता हो शरीर सुखी तो वह सुखी शरीर दुखी तो वह दुखी जिसके अंदर सोचने और समझने की छमता ही नही होती उसे तामसी ज्ञान कहते हैं,।।💐 💐💐जै श्री कृष्ण💐 💐डॉ स्वामी विनेश्वरानंद💐💐 💐

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