ज्ञानवान

Mehul Shetty Jan 8, 2020

_*♨क्या देवता भोग ग्रहण करते हैं?*_ _हिन्दू धर्म में भगवान् को भोग लगाने का विधान है! क्या सच में देवतागण भोग ग्रहण करते हैं? हां, ये सच है। शास्त्रों में इसका प्रमाण भी है .. गीता में भगवान् कहते हैः ...'' जो भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्ध बुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेम पूर्वक अर्पण किया हुआ, वह पत्र पुष्प आदि मैं ग्रहण करता हूँ ..._ _{गीता ९/२६}_ _अब वे खाते कैसे हैं, ये समझना जरुरी है! अतः हम जो भी भोजन ग्रहण करते हैं, वे चीजें पंचतत्वों से बनी हुई होती हैं! क्योंकि हमारा शरीर भी पंचतत्वों से बना होता है। इसलिए अन्न, जल, वायु, प्रकाश और आकाश तत्व की हमें जरुरत होती है, जो हम अन्न और जल आदि के द्वारा प्राप्त करते हैं...!_ _देवताओं का शरीर पांच तत्वों से नहीं बना होता, उनमे पृथ्वी और जल तत्व नहीं होता। मध्यम स्तर के देवताओं का शरीर तीन तत्वों से तथा उत्तम स्तर के देवताओं का शरीर दो तत्व -- तेज और आकाश से बना हुआ होता है .. इसलिए देव शरीर वायुमय और तेजोमय होते हैं।_ _देवतागण वायु के रूप में गंध, तेज के रूप में प्रकाश को और आकाश के रूप में शब्द को ग्रहण करते हैं।_ _यानी देवगण गंध, प्रकाश और शब्द के द्वारा भोग ग्रहण करते हैं, जिसका विधान पूजा पद्धतियों में होता है।_ _जैसे जो हम अन्न का भोग लगाते हैं, देवता उस अन्न की सुगंध को ग्रहण करते हैं और उसीसे उनकी तृप्ति हो जाती है। जो पुष्प और धूप लगाते हैं, उसकी सुगंध को भी देवता भोग के रूप में ग्रहण करते हैं। जो हम दीपक जलाते हैं, उससे देवता प्रकाश तत्व को ग्रहण करते हैं। आरती का विधान भी उसीके लिए है।_ _जो हम मन्त्र पाठ करते हैं, या जो शंख, घंटा-घंटी,घड़ियाल आदि बजाते हैं, उसे देवता गण ''आकाश '' तत्व के रूप में ग्रहण करते हैं।_ _यानी पूजा में हम जो भी विधान करते हैं, उससे देवता वायु, तेज और आकाश तत्व के रूप में ''भोग'' ग्रहण करते हैं।_ _जिस प्रकृति का देवता हो, उस प्रकृति का भोग लगाने का विधान है!

+26 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 28 शेयर