ज्ञानवर्षा

अपने स्वास्थ्य के लिए एक बार जरूर पढ़ें *अर्थव्यवस्था का दुश्मन साइकिल चालक* 😆😆😆 *आश्चर्यजनक लेकिन सत्य । संजय ठकराल, यूरो एक्जिम बैंक के सीईओ, अर्थ चक्र कैसे चलता है, इसका विश्लेषण करते हुए अर्थशास्त्रियों के बीच कहते हैं-* *एक साईकिल चलाने वाला देश की अर्थव्यवस्था के लिये किस प्रकार घातक है ।* -न तो वह कार खरीदता है, न ही कार के लिए लोन ही लेता है। - न ही वह इनस्योरैन्स लेता है। -न ही वह पैट्रोल खरीदता है। -न ही वह कार की सर्विस कराता है ,न ही मरम्मत। -न ही वह पार्किंग का उपयोग करता है। - *न ही उसे मोटापा सताता है। -जी हाँ---स्वस्थ् आदमी के कारण अर्थव्यवस्था नहीं चलती*। न तो वह दवा खरीदेगा ,न ही हास्पिटल और डॉक्टर का मुँह देखेगा । -ऐसे लोग देश की GDP में कोई योगदान नहीं करते।जबकि एक मैकडोनाल्ड का रैस्त्रराँ कम से कम 30लोगों के लिये रोजगार सृजन करता है। 10 हृदय रोग विशेषज्ञ,10 दाँतों के डॉक्टर,10 वजन घटाने वाले विशेषज्ञ और इसके अलावा उस रैस्त्रराँ में काम करने वाले कर्मचारी। *आप क्या चुनेंगे एक साईकिल वाला या एक मैकडॉनल्ड्स ।*

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आया सो जायेगा राजा रंक फकीर,,, एक सिंहासन चढ़ चले, एक बंधे जंजीर,, सुखी जीवन का मूलमंत्र जापान के सम्राट यामातो का एक राज्यमंत्री था। जिसका नाम था 'ओ-चो-सान'। उसका परिवार सौहार्द के लिए बड़ा प्रसिद्ध था। हालांकि उसके परिवार में लगभग एक हजार सदस्य थे, पर उनके बीच एकता का अटूट संबंध था। सभी सदस्य साथ-साथ रहते और साथ-साथ ही खान खाते थे। फिर उनमें द्वेष कलह की बात ही कहां?  ओ-चो-सान के परिवार के सौहार्द की बात यामातो के कानों तक पहुंची। सत्यता की जांच करने के लिए एक दिन वे स्वयं वृद्ध मंत्री के घर तक आ पहुंचें।  स्वागत सत्कार और शिष्टाचार की साधारण रस्में समाप्त हो जाने के बाद यामातो ने पूछा, 'महाशय! मैंने आपके परिवार की एकता और मिलनसारिता की कई कहानियां सुनी हैं। क्या आप बताएंगे कि एक हजार से भी अधिक व्यक्तियों वाले आपके परिवार में यह सौहार्द और स्नेह संबंध किस तरह बना हुआ है।'  ओ-चो-सान वृद्धावस्था के कारण अधिक देर तक बातें नहीं कर सकता था। अतः उसने अपने पौत्र को संकेत से कलम-दवात और कागज लाने के लिए कहा। उन चीजों के आ जाने के बाद उसने अपने कांपते हाथों से कोई सौ शब्द लिखकर वह कागज सम्राट को दे दिया।  उत्सुकतावश सम्राट यामातो ने उस कागज पर नजर डाली तो वह चकित रह गए। दरअसल कागज में एक ही शब्द को सौ बार लिखा गया था और वह शब्द था, 'सहनशीलता'।  सम्राट को चकित और अवाक् देख ओ-चो-सान ने अपनी कांपती हुई आवाज से कहा, 'मेरे परिवार के सौहार्द का रहस्य बस इसी एक शब्द में निहित है। सहनशीलता का यह महामंत्र ही हमारे बीच एकता का धागा अब तक पिरोए हुए है। इस महामंत्र को जितनी बार दुहराया जाए, कम ही है।'  सहनशीलता एक ऐसा गुण है जिसे आजमाने के बाद इंसान बड़े से बड़े समूह को एकता के धागे से बांध सकता है। इसलिए जिंदगी में सहनशील होना बहुत जरूरी है,,, हर हर महादेव जय शिव शंकर

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Neha Sharma Aug 24, 2019

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