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जय श्री राम जय श्री हनुमान जी जय श्री सिता माता की 🌹👏🚩 अमलकी एकादशी की हार्दिक शुभकामना ये रामसेतू पर अमेरिका का भी हुआ नतमस्तक 👣🌹👏🚩जय श्री राम 🌹 👏 🚩 : समुद्र पर बने रामसेतु को दुनियाभर में एडेम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है। हिंदु धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह एक ऐसा पुल है जिसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने वानर सेना संग लंका पहुंचने के लिए बनवाया था। यह पुल भारत के रामेश्वरम से शुरु होकर श्रीलंका के मन्नार को जोड़ता है। श्री राम का सेतु एक ऐसी कहानी  है जिसे लोग विज्ञान का हवाला देकर फसाना मानते थे। लेकिन कुछ समय पहले ही अमेरिकी साइंस चैनल ने यह दावा किया कि रामसेतु वाकई मौजूद था और इसे रामायण काल से संबंधित बताया। उनका कहा है कि रामेश्वरम औऱ श्रीलंका के बीच बहुत से ऐसे पत्थर मौजूद हैं जो करीब 7000 साल पुराने हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक महत्व देते हुए ईश्वर का चमत्कार मानते हैं तो वहीं अमेरिका के इस प्रमाण के बाद यह राजनीतिक मुद्दा बन गया था ।ऐसे में आइए जानते हैं रामसेतु के बारे में 10 अनसुने रहस्य जिसे आपने अब तक नहीं सुना होगा। नल और नील ने किया था रामसेतु का निर्माण रावण का वध करने के लिए जब भगवान श्री राम लंका पहुंचे तो उनके लिए सबसे बड़ी समस्या थी रावण के लंका तक पहुंचना। इसके लिए भगवान श्री रामचंद्र जी को इस समुद्र को पार करना था। इसके लिए भगवान राम ने रामसेतु के निर्माण की योजना बनाई। रामसेतु के निर्माण हेतु जब भगवान श्री राम ने समुद्र देव से मदद मांगी तो समुद्र देव ने बताया कि आपकी सेना में नल और नील एसे ऐसे प्रांणी हैं जिन्हें इस पुल के निर्माण की पूरा जानकारी है। समुद्र देव ने भगवान राम से कहा कि नल और नील आपकी आज्ञा से सेतु बनाने के कार्य में अवश्य सफल होंगे। महज 5 से 6 दिनों में हुआ था रामसेतु का निर्माण रामसेतु के निर्माण महज 5 से 6 दिनों में पूरा हुआ था। जी हां आपको यह सुनकर जरूर हैरानी होगी कि इसके निर्माण में महज 5 से 6 दिन लगे थे। इस बात को अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है। आपको बता दें समुद्र की लंबाई लगभग 100 योजन है। एक योजन में लगभग 13 से 14 किलोमीटर होते हैं यानि रामसेतु की लंबाई करीब 1400 किलोमीटर है।  लंका से लौटने के बाद सेतु को समुद्र में कर दिया था तबदील रावण का वध कर श्रीलंका से लौटने के बाद भगवान राम ने रामसेतु को समुद्र में डुबो दिया था। ताकि कोई भी इसका दुरुपयोग ना कर सके। यह घटना युगों पहले की बताई जाती है। लेकिन कालांतर में बताया जाता है कि समद्र का जल स्तर घटता गया और सेतु फिर से ऊपर आता गया। सेतु के निर्माण के लिए खुद भगवान राम ने रखा था व्रत रामसेतु के निर्माण के दौरान सेतु के निर्माण कार्य के पूरा होने के लिए भगवान राम ने विजया एकादशी के दिन स्वयं बकदालभ्य ऋषि के कहने पर व्रत रखा था। नल तथा नील की मदद से रामसेतु का निर्माण पूर्ण हुआ था।  अमेरिका भी हुआ नतमस्तक अमेरिका साइंस चैनल ने यह दावा किया कि रामसेतु वाकई में मौजूद था। एख रिसर्च के बाद उन्होंने रामसेतु को मानव निर्मित बताया। उन्होंने बताया कि भारत औऱ श्रीलंका के बीच 50 किलोमीटक लंबी रेखा चट्टानों से बनी है और ये चट्टान लगभग 7 हजार साल पुरानी है। तथा जिस बालू पर यह टिकी है वह 4 हजार साल पुरानी है। पैदल तय करत थे दूरी आपको बता दें 15वीं शताब्दी तक लोग रामसेतु से पैदल रामेश्वरम से मन्नार की दूरी तय करते थे। इस पर लोग पारंपरिक वाहनों से जाया करते थे। नासा की एक रिपोर्ट के अनुसार यह पुल लगभग सात साल पुराना है। अलग अलग नामों से जाना जाता है पुल रामायण काल के दौरान इस पुल का नाम भगवान राम ने नील पुल रखा था। इसके बाद श्रीलंका के मुसलमानों ने इस पुल को आदम पुल का नाम दिया था। इसाईयों ने इसे एडम ब्रिज का नाम दिया। उनका मानना था कि आडम इस पुल से होकर गुजरे थे। रामायण में इस पुल का नाम रामसेतु उल्लेख है। ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री राम जय श्री हनुमान जी जय श्री सिता माता की 💐 👏 🚩 🐚 🌹 नमस्कार 🙏 🚩

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पूरा विश्व अगर किसी वैज्ञानिक भाषा को स्वीकार कर रहा है, तो वह है संस्कृत। विभिन्न देशों में संस्कृत भाषा का विस्तार हो रहा है। पूरा विश्व अगर किसी वैज्ञानिक भाषा को स्वीकार कर रहा है, तो वह है संस्कृत। विभिन्न देशों में संस्कृत भाषा का विस्तार हो रहा है। भारत में भी इस दिशा में और प्रयास की जरूरत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इस पर जोर डाला गया है। ये बातें कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने दो दिवसीय अखिल भारतीय राजशेखर समारोह के उद्घाटन अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में कही। कालिदास संस्कृत अकादमी मप्र संस्कृति परिषद उज्जैन एवं संस्कृत पालि एवं प्राकृत विभाग रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने कहा कि ग्यारहवी शताब्दी में जब महाकवि राजशेखर इस धरा पर आए तब संक्रमणकाल था, लेकिन कवि, लेखकों पर किसी का प्रभाव नहीं होता। राजशेखर में सभी गुण विद्यमान थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष भारत वैरागी ने संस्कृत भाषा की प्राचीनता एवं महाकवि राजशेखर की महत्ता को निरूपित तो किया ही, साथ ही संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता को सिद्ध करते हुए शिक्षा प्राप्ति के सम्पूर्ण चरणों में संस्कृत भाषा की अनिवार्यता पर भी बल दिया। इन्होंने कहा कि आज दुनिया के विभिन्न देशों का संस्कृत भाषा के प्रति तेजी से आकर्षण बढ़ रहा है। संस्कृत भाषा को पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। नासा ने संस्कृत को बताया सटीक भाषा: कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एवं विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है। नासा ने इसे वैज्ञानिक भाषा में प्रयोग के लिए सबसे सटीक भाषा बताया है। कालिदास, राजशेखर ने जो भी लिखा वह वैज्ञानिकता के आधार पर ही लिखा है। आज विदेशों में संस्कृत भाषा अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाई जा रही है, लेकिन देश में आठवीं के बाद यह अनिवार्य नहीं है। आगे की कक्षाओं में भी यह अनिवार्य हो इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। समारोह के द्वितीय सत्र में विद्वानों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सरिता यादव व आभार प्रदर्शन अजय मेहता ने किया। इस अवसर पर कार्य परिषद सदस्य निखिल देशकर, प्रो. कमलेश मिश्र, प्रो.सुरेंद्र सिंह, प्रो.पीके सिंघल, डॉ. माला प्यासी, डॉ.साधना जंसारी, डॉ.अखिलेश कुमार मिश्र, डॉ.अजय मिश्र, प्रेम पुरोहित समेत बड़ी संख्या में विद्वान एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। जय हो वंदेमातरम नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ रविवार जय श्री सुर्य देव महाराज 👑 👏 🚩 जय हो 🌙

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Babita Sharma Oct 8, 2020

शुभ प्रभात वंदन 🙏🙏⚘⚘⚘ हरि ॐ नमो नारायण *किसी के चेहरे पर "हर समय मुस्कराहट" रहे...* तो इसका मतलब ये मत समझना की उनके *जीवन में संघर्ष नहीं* है। *!! बस "परमात्मा" पर भरोसा ज्यादा है!!* चाय, कॉफी नहीं सुबह-सुबह पिएं गर्म नींबू पानी, होंगे ये बेशकीमती फायदे: अधिकांश लोग सुबह-सुबह गर्मागर्म चाय, कॉफी या दूध पीना पसंद करते है, अगर आप भी उन्हीं में से हैं तो जान लीजिए कि सुबह उठते ही चाय, कॉफी नहीं बल्कि गर्म नींबू पानी पीने से स्वास्थ्य और सौन्दर्य को मिलेंगे बेशकीमती फायदे - 1 अगर आप सुबह फ्रेश होने से पहले गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीते हैं, तो आपका पेट आसानी से साफ होगा और कब्ज की समस्या नहीं होगी। 2 अगर आप सुबह फ्रेश होने के बाद यानि बिल्कुल खाली पेट इसका प्रयोग करते हैं, तो यह आपकी बढ़ी हुई चर्बी कम करने में मददगार साबित होगा और आपका वजन भी कम होगा। 3 यह आपके पाचन तंत्र को फायदा पहुंचाएगा और पाचन क्रिया पहले से बेहतर होगी। इसके चलते आपको पेट की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। 4 गर्म नींबू पानी का सेवन आपके शरीर की अंदर से सफाई करता है और हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर करने में मदद करता है। यह प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। 5 इसका एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह आपको मुंह और सांसों की दुर्गंध से भी निजात दिलाएगा और आप ताजगी महसूस करेंगे। इसमें मौजूद विटामिन सी भी आपको कई फायदे देगा। हरि ॐ🙏🙏

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