गोपाष्टमी,

sn vyas Nov 21, 2020

जय श्री राधे... *गोपाष्टमी...* *22 नवंबर 2020...* *महत्व एवं पूजन विधि ...😊* पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चारण लीला शुरू की थी। कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन मां यशोदा ने भगवान कृष्ण को गौ चराने के लिए जंगल भेजा था। इस दिन गो, ग्वाल और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने का महत्व है। *आइए जानें कैसे मनाएं गोपाष्टमी पर्व?* ● गोपाष्टमी यानी कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन प्रात:काल में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नानादि करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें। ● तत्पश्चात प्रात:काल में ही गायों को भी स्नान आदि कराकर गौ माता के अंग में मेहंदी, हल्दी, रंग के छापे आदि लगाकर सजाएं। ● इस दिन गायों को खूब सजाया-संवारा जाता है। ● इस दिन बछड़े सहित गाय की पूजा करने का विधान है। ● प्रात:काल में ही धूप-दीप, अक्षत, रोली, गुड़ आदि वस्त्र तथा जल से गाय का पूजन किया जाता है और धूप-दीप से आरती उतारी जाती है। ● इस दिन ग्वालों को उपहार आदि देकर उनका भी पूजन करने का महत्व है। ● इस दिन सभी परिवार के लोग गौ यानी गाय की विधि विधान से पूजा करते हैं। ● इसके बाद गाय को चारा आदि डालकर उनकी परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करने के बाद कुछ दूर तक गायों के साथ चलते हैं। ● संध्याकाल में गायों के जंगल से वापस लौटने पर उनके चरणों को धोकर तिलक लगाने का महत्व है। *गोपाष्टमी की हार्दिक बधाई...😊*

+58 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 26 शेयर