गीता-सार

Gopal Jalan Sep 16, 2021

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*आप सभी प्रभु जी को* *जय श्री कृष्णा* *हरे कृष्ण हरे कृष्ण* *हरे राम हरे राम* *आज का अध्याय : श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप* *अध्याय------- 03:* *कर्मयोग* *श्लोक---04* ❁ *श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप* ❁ *सभी के लिए सनातन शिक्षाएं* *आज* *का* *श्लोक* -- 03.04 *अध्याय 03 : कर्मयोग* न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्र्नुते | न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति || ४ || न– नहीं; कर्मणाम्– नियत कर्मों के; अनारम्भात्– न करने से; नैष्कर्म्यम्– कर्मबन्धन से मुक्ति को; पुरुषः– मनुष्य; अश्नुते– प्राप्त करता है; न– नहीं; च– भी; संन्यसनात्– त्याग से; एव– केवल; सिद्धिम्– सफलता; समधिगच्छति– प्राप्त करता है | न तो कर्म से विमुख होकर कोई कर्मफल से छुटकारा पा सकता है और न केवल संन्यास से सिद्धि प्राप्त की जा सकती है | तात्पर्य : भौतिकतावादी मनुष्यों के हृदयों को विमल करने के लिए जिन कर्मों का विधान किया गया है उनके द्वारा शुद्ध हुआ मनुष्य ही संन्यास ग्रहण कर सकता है | शुद्धि के बिना संन्यास ग्रहण करने से सफलता नहीं मिल पाती | ज्ञानयोगियों के अनुसार संन्यास ग्रहण करने अथवा सकाम कर्म से विरत होने से ही मनुष्य नारायण के समान हो जाता है | किन्तु भगवान् कृष्ण इस मत का अनुमोदन नहीं करते | हृदय की शुद्धि के बिना संन्यास सामाजिक व्यवस्था में उत्पात उत्पन्न करता है | दूसरी ओर यदि कोई नियत कर्मों को न करके भी भगवान् की दिव्य सेवा करता है तो वह उस मार्ग में जो कुछ भी उन्नति करता है उसे भगवान् स्वीकार कर लेते हैं (बुद्धियोग) | स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्| ऐसे सिद्धान्त की रंचमात्र सम्पन्नता भी महान कठिनाइयों को पार करने में सहायक होती है | ************************************ *प्रतिदिन भगवद्गीता का एक श्लोक* प्राप्त करने हेतु, इस समूह से जुड़े । 🙏🏼 https://telegram.me/DailyBhagavadGita

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Gopal Jalan Sep 13, 2021

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🌹🌀 आज का 📖श्रीमद् भगवत गीता श्लोक ⭕गतांक से आगे 📖🌹🍃- श्लोक - ग्यारहवें अध्याय का 26-27 वा श्लोक (11:26-27) 🌹🍃- अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसंघैः। भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः॥ वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि। केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्‍गै॥ 🦚वे सभी धृतराष्ट्र के पुत्र राजाओं के समुदाय सहित आप में प्रवेश कर रहे हैं और भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य तथा वह कर्ण और हमारे पक्ष के भी प्रधान योद्धाओं के सहित सबके सब आपके दाढ़ों के कारण विकराल भयानक मुखों में बड़े वेग से दौड़ते हुए प्रवेश कर रहे हैं और कई एक चूर्ण हुए सिरों सहित आपके दाँतों के बीच में लगे हुए दिख रहे हैं॥26-27॥ 🙏🌺💫

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