गंगा दशहरा

🌹*श्रीगणेशाय नम :*🌹 *🍑श्रीमाधोपुर के अनुसार 🍑* *💮12 जून 2019 आज का पंचांग तिथि नक्षत्र * *💮तिथि – दशमी – 18:28:21 तक* *💮नक्षत्र – हस्त – 11:51:24 तक* *💮करण – तैतिल – 07:22:55 तक, गर – 18:28:21 तक* *💮पक्ष – शुक्ल* *💮योग – व्यतीपात – 06:06:20 तक, वरियान – 27:37:30 तक* *💮वार – बुधवार* *💮माह – ज्येष्ठ* *🌞12 जून 2019 सूर्य उदय और 🌝चंद्र उदय* *🌅 सूर्योदय – 05:36:20* *🌄सूर्यास्त – 19:18:48* *🌞सुर्य -वृष राशि में * *🌝चंद्रोदय – 14:30:4* *🌝चंद्रास्त – 01:57:59* *🌝चंद्रमा - कन्या राशि में 23:21 तक पश्चात तुला राशि में* *⚫12 जून 2019 को इस समय शुभ कार्य नहीं कर सकते ये अशुभ समय है* *◾दुष्टमुहूर्त – 11:53:01 से 12:48:47 तक* *⚫कुलिक – 11:53:01 से 12:48:47 तक* *◾कंटक – 17:27:36 से 18:23:22 तक* *⚫राहु काल – 12:20:54 से 14:05:27 तक* *◾कालवेला / अर्द्धयाम – 06:18:26 से 07:14:12 तक* *⚫यमघण्ट – 08:09:58 से 09:05:44 तक* *◾यमगण्ड – 07:07:14 से 08:51:47 तक* *⚫गुलिक काल – 10:36:21 से 12:20:54 तक* *💐12 जून 2019 का शुभ समय (शुभ मुहूर्त)* *💐अभिजीत मुहूर्त (आज शुभ कार्य करने का शुभ समय) – कोई नहीं* *🔯12 जून 2019 आज का चौघड़िया* *🔴लाभ – 05:27 से 07:10* *💧अमृत – 07:10 से 08:54* *🚩शुभ – 10:37 से 12:21* *🍂चर – 15:48 से 17:31* *🔴लाभ – 17:31 से 19:15* *🌹गंगा दशहरा 🌹* *सनातन धर्म में गंगा दशहरा का महत्‍व धार्मिक परंपराओं और मान्‍यताओं वाले त्‍योहार के रूप में है। प्रत्‍येक वर्ष ज्‍येष्‍ठ मास के शुक्‍ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस साल यह तिथि 12 जून यानी आज है। गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था और तभी से मां गंगा को पूजने की परंपरा शुरू हो गई। यह भी मान्‍यता है कि इस दिन गंगा में स्‍नान करने और दान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मुक्ति मिलती है* *पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगीरथ ऋषि ने अपने पूर्वजों की मोक्ष प्राप्ति के लिए कठोर तपस्‍या की थी और उसके बाद अपने अथक प्रयासों के बल पर मां गंगा को धरती पर लाने में सफल हुए थे। लेकिन मां गंगा का वेग इतना अधिक था कि अगर वह सीधे धरती पर आतीं तो पाताल में ही चलीं जातीं। भक्‍तों के विनती करने पर भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में भर लिया और उसके बाद मां गंगा कैलाश से होते हुए धरती पर पहुंची और भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार किया।* 1⃣2⃣ 0⃣6⃣ 1⃣9⃣ *🌹🍑🙏सुप्रभात 🙏🍑🌹*

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।। श्रीहरि ।। गंगादशहरा [ ज्येष्ठ शुक्ल दशमी ] नमामि गंगे तव पादपंकजं सुरासुरैर्वन्दितदिव्यरूपम् । भुक्तिं च मुक्तिं च ददासि नित्यं भावानुसारेण सदा नराणाम् ।। हे मातु गंगे ! आप मनुष्यों को नित्य ही उनके भावानुसार भुक्ति और मुक्ति प्रदान करती हैं । मैं देवताओं और राक्षसों से वन्दित आपके दिव्य चरणकमलों को नमस्कार करता हूँ । गंगाजी देवनदी हैं, वे मनुष्यमात्र के कल्याण के लिये धरतीपर आयीं, धरतीपर इनका अवतरण ज्येष्ठ शुक्लपक्ष की दशमी को हुआ । अतः यह तिथि उनके नामपर गंगादशहरा के नाम से प्रसिद्ध हुई- दशमी शुक्लपक्षे तु ज्येष्ठमासे बुधेऽहनि । अवतीर्णा यतः स्वर्गाद्धस्तर्क्षे च सरिद्वरा ।। इस तिथि को यदि बुधवार और हस्तनक्षत्र हो तो यह तिथि सब पापों का हरण करनेवाली होती है- ज्येष्ठशुक्लदशम्यां तु भवेत्सौम्यदिनं यदि । ज्ञेया हस्तर्क्षसंयुक्ता सर्वपापहरा तिथिः ।। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी सम्वत्सर का मुख कही जाती है । इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्त्व है- ज्येष्ठस्य शुक्लादशमी सम्वत्सरमुखा स्मृता । तस्यां स्नानं प्रकुर्वीत दानं चैव विशेषतः ।। इस तिथि को गंगा स्नान एवं श्रीगंगाजी के पूजन से दस प्रकार के पापों* ( तीन कायिक, चार वाचिक तथा तीन मानसिक )-का नाश होता है । इसलिये इसे दशहरा कहा गया है । ब्रह्मपुराण का वचन है- ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता । हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता ।। इस दिन गंगाजी में अथवा सामर्थ्य न हो तो समीप की किसी पवित्र नदी या सरोवर के जल में स्नानकर अभयमुद्रायुक्त मकरवाहिनी गंगाजी का ध्यान करे और नाममन्त्र-'गंगायै नमः' से अथवा निम्न मन्त्र से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करे- 'ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः ।' उक्त मन्त्र में 'नमः' के स्थानपर 'स्वाहा' शब्द का प्रयोग करके हवन भी करना चाहिये । तत्पश्चात् 'ॐ नमो भगवति ऐं ह्रीं श्रीं ( वाक्-काम-मायामयि ) हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा'-इस मन्त्र से पाँच पुष्पांजलि अर्पित करके गंगा के उत्पत्ति स्थान हिमालय एवं उन्हें पृथ्वीपर लानेवाले राजा भगीरथ का नाममन्त्र से पूजन करना चाहिये । पूजा में यथाशक्ति दस प्रकार के पुष्प, दशांग धूप, दस दीपक, दस प्रकार के नैवेद्य, दस ताम्बूल एवं दस फल होने चाहिये । दक्षिणा भी दस ब्राह्मणों को देनी चाहिये, किंतु उन्हें दान में दिये जानेवाले यव ( जौ ) और तिल सोलह-सोलह मुट्ठी होने चाहिये । भगवती गंगाजी सर्वपापहारिणी हैं । अतः दस प्रकार के पापों की निवृत्ति के लिये सभी वस्तुएँ दस की संख्या में निवेदित की जाती हैं । इस दिन सत्तू का दान और गंगादशहरास्तोत्र का पाठ किया जाता है साथ ही गंगावतरण की कथा भी सुनी जाती है । * अदत्तानामुपादानं हिंसा चैवाविधानतः । परदारोपसेवा च शारीरं त्रिविधं स्मृतम् ।। पारूष्यमनृतं चैव पैशून्यं चापि सर्वशः । असम्बद्धप्रलापश्च वाङ्मयं स्याच्चतुर्विधम् ।। परद्रव्येष्वभिध्यानं मनसानिष्टचिन्तनम् । वितथाभिनिवेशश्च त्रिविधं कर्म मानसम् ।। ( मनु○ १२ । ७, ६, ५ ) अर्थात् बिना दिये हुए दूसरे की वस्तु लेना, शास्त्र वर्जित हिंसा करना तथा परस्त्रीगमन करना-तीन प्रकार के शारीरिक ( कायिक ) पाप हैं । कटु बोलना, झूठ बोलना, परोक्ष में किसी का दोष कहना तथा निष्प्रयोजन बातें करना वाचिक पाप हैं और दूसरे के द्रव्य को अन्याय से लेने का विचार करना, मन से दूसरे का अनिष्ट चिंतन करना तथा नास्तिक बुद्धि रखना मानसिक पाप हैं । 'कल्याण' गंगा-अंक [ जनवरी सन् २०१६ ई○ ] से, विषय- [ ग ] गंगा-सपर्या ☆ गंगादशहरा, पृष्ठ-संख्या- ४७९, गीताप्रेस, गोरखपुर

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गंगा दशहरा -पर्व पर महायोग आज 12 जून 2019 गंगा दशहरा यानी गंगा दशमी है। इस दिन 10 का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन 10 प्रकार के पापों का नाश करता है। इस दिन 10 पंडितों को 10 तरह के दान दिए जाते हैं। इस बार यह विलक्षण बात जुड़ रही है कि इस दिन 10 तरह के विशेष ज्योतिषीय संयोग भी बन रहे हैं। इस 10 संयोगों के साथ गंगा में 10 डुबकी लगाएं। इस दिन अगर आप 10 चीज़ें दान करते हैं तो अत्यंत शुभ फल मिलता है। मां गंगा की पूजा में जिस भी सामग्री का उपयोग करें उसकी संख्या दस ही होनी चाहिए। जैसे 10 दीये, 10 तरह के फूल, 10 दस तरह के फल आदि। स्नान के बाद अपनी श्रद्धा अनुसार गरीबों में दान-पुण्य करें। 10 पाप : शास्त्रों के अनुसार गंगा अवतरण के इस पावन दिन गंगा जी में स्नान एवं पूजन-उपवास करने वाला व्यक्ति दस प्रकार के पापों से छूट जाता है। 10 प्रमुख पाप इस प्रकार हैं। 3 प्रकार के दैहिक, 4 वाणी के द्वारा किए हुए एवं 3 मानसिक पाप, ये सभी गंगा दशहरा के दिन पतितपावनी गंगा स्नान से धुल जाते हैं। गंगा में स्नान करते समय स्वयं श्री नारायण द्वारा बताए गए मन्त्र-''ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः'' का स्मरण करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है। 10 दान गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालुजन जिस भी वस्तु का दान करें, उनकी संख्या 10 होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें, उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए, ऐसा करने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। दक्षिणा भी 10 ब्राह्मणों को देनी चाहिए। जब गंगा नदी में स्नान करें, तब 10 बार डुबकी लगानी चाहिए। 10 दान : जल, अन्न, फल, वस्त्र, पूजन व सुहाग सामग्री, घी, नमक, तेल, शकर और स्वर्ण। 10 विशेष महासंयोग विशिष्ट योग की साक्षी में गंगा माता का पूजन पितरों को तारने तथा पुत्र, पौत्र व मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना गया है। देवी गंगा का 10 दिव्य योग की साक्षी में पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। ज्योतिषियों के अनुसार 12 जून को गंगा दशहरे पर वैसे ही 10 दिव्य योग का संयोग बन रहा है। बीते 75 साल में इस योग का निर्माण नहीं हुआ है। विशिष्ट योग की साक्षी में गंगा माता का पूजन पितरों को तारने तथा पुत्र, पौत्र व मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना गया है। इस बार 12 जून को गंगा दशहरे पर दिव्य संयोग बन रहा है। धर्मशास्त्रीय मान्याता के अनुसार इस बार गंगा दशहरे पर वैसे ही 10 दिव्य महायोग बन रहे हैं, जिन योगों में देवी गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। पंचागीय गणना से देखें तो बीते 75 साल में इस प्रकार का दिव्य संयोग नहीं बना है। हेमाद्री कल्प में शृंगी ऋषि ने 10 दिव्य योग में काशी के वासियों को दशाश्वमेघ घाट पर गंगा का पूजन तथा अन्य तीर्थ के लोगों को समीपस्थ तीर्थ पर गंगा पूजन करने को कहा है। ऐसा करने से मनुष्य को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कौन से 10 योग गंगा अवतरण के समय विद्यमान थे ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार का दिन, हस्त नक्षत्र, व्यतिपात योग, गर करण, आनंद योग, कन्या राशि का चंद्रमा व वृषभ राशि का सूर्य को दश महायोग कहा गया है।

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