कुंडली ज्ञान

ज्योतिष चर्चा 〰️〰️🔸〰️〰️ तुला लग्न जातको की शिक्षा, व्यवसाय, आर्थिक स्थिति 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ तुला लग्न जातको की शिक्षा 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ तुला लग्न के जातक की कुंडली में पंचम भाव बली हो तथा पंचमेश शनि भाग्येश बुध एवं लग्नेश शुक्र आदि ग्रहो का (स्थान दृष्टि आदि से) शुभ संबंध बना हो तो जातक उच्च व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने में सफल हो जाता है। पंचम भाव में शनि को छोड़कर कोई अन्य पाप ग्रह जैसे राहु-केतु मँगल आदी हो तो उच्च विद्या प्राप्ति में विघ्न बाधाएं होती हैं। परंतु यदि जातक को ग्रह दशा एवं अंतर्दशा किसी शुभ व योगकारक ग्रह की लगी हो तो अड़चनों के बावजूद जातक उच्च व्यावसायिक विद्या प्राप्त करने में सफल होता है। व्यवसाय और आर्थिक स्थिति👉 तुला लग्न जातकों की स्वतंत्रता प्रिय सृजनात्मक एवं कलात्मक अभिरुचि होने के कारण यह चिरकाल तक किसी की अधीनता स्वीकार नहीं कर पाते। नौकरी की अपेक्षा अपने निजी व्यवसाय में अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। जन्म कुंडली में शुक्र शनि बुध एवं चंद्र आदि ग्रह शुभ भावस्थ अथवा शुभ या योग कारक ग्रहो द्वारा देखे जा रहे हो तो जातक निम्नलिखित व्यवसायों में विशेष कामयाब एवं लाभान्वित होते हैं👉 प्राध्यापक, वकील, न्यायाधीश, क्रय विक्रय व्यापार, कवि,संगीतकार, गायक, अभिनय, कलाकार, डॉक्टर, राजनीतिज्ञ, बैंकिंग, भवन निर्माण, लोह, कलपुर्जे, टेलीविजन, लेडीस गारमेंट, फैशन डिजाइनिंग, वस्त्र विक्रेता, बेकरी, मिठाई, होटल, फर्नीचर डीलर, आर्किटेक्ट (आंतरिक सज्जा) औषधि विक्रेता, नौसेना कर्मचारी, आइसक्रीम आदि फास्ट फूड, स्टेशनरी, मोटर आदि के स्पेयर पार्ट्स कंप्यूटर या कंप्यूटर से संबंधित काम, फोटोग्राफी, प्लास्टिक उद्योग खिलौने इत्यादि से संबंधित व्यवसाय में विशेष उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। किसी जातक की कुंडली में दशम या दशमेश ग्रह अथवा उनसे संबंधित जो ग्रह बैठे हो उसके अनुसार ही जातक को व्यवसाय में लाभ होता है। जैसे सूर्य बली हो तो जातक को सरकारी क्षेत्र में विशेष लाभ होगा। आर्थिक स्थिति 〰️〰️〰️〰️〰️ तुला लग्न के जातक की आर्थिक स्थिति मुख्यतः चंद्र, मंगल, शुक्र, शनि, रवि ल, बुध आदि ग्रहों की शुभ -अशुभ स्थिति पर निर्भर करती है. यदि तुला जातक की कुंडली में शनि, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध एवं शुक्र शुभ या योगकारक स्थिति में हो तो व्यवसाय द्वारा अच्छा धन अर्जन करते हैं। दो या अधिक ग्रहों में दृष्टि योग आदि का संबंध बना हो तो जातक निजी पुरुषार्थ के अतिरिक्त भाग्यवश एक से अधिक धन प्राप्ति के साधन प्राप्त करता है। विशेषकर सूर्य, मंगल एवं बुध ग्रह से संबंध हो तो धन आगमन में पारंपरिक पैतृक योगदान विशेषकर प्रमुख होता है। शनि शुभस्थ (स्वक्षेत्रीय उच्चस्थ) हो तो जातक अपने बुद्धि कौशल एवं गुप्त युक्तियों से धनार्जन करने में कुशल होता है। भूमि, मकान, वाहन आदि के सुख भी प्राप्त होते हैं। तुला लग्न में मंगल भी स्वक्षेत्रीय उच्चस्थ हो तो विवाह के बाद धन एवं संपदा में विशेष लाभ व उन्नति होती है। सामान्यतः अनुभव में यही आया है कि तुला लग्न में जातक कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिश्रम निष्ठा एवं समायोजित योजना से निर्वाह योग्य आय के साधन प्राप्त कर ही लेते हैं। तथा जल्द ही अपने परिवार के लिए सुंदर एवं अन्य वस्तुएं खरीदने के लिए उदारतापूर्वक खर्च भी कर देते हैं। तुला जातक सीमित साधनों में भी रहीसी ढंग से खर्च करने में नहीं हिचकिचाते हैं। अगले लेख में हम तुला जातको के प्रेम संबंध एवं पारिवारिक जीवन के विषय मे चर्चा करेंगे। पं देवशर्मा 9411185552 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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ज्योतिष चर्चा 〰️〰️🔸〰️〰️ तुला लग्न जातको का पारिवारिक जीवन एवं प्रेम संबंध 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ तुला लग्न के जातक के जीवन में प्रेम और सौंदर्य का विशेष महत्व होता है। अपने स्वच्छंद व्यवहार सहज मुस्कान एवं वाकपटुता के कारण पुरुष मित्रों के साथ साथ महिला मित्रों में भी आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं। चाहे किसी आयु में हो अपने मित्रों से संबंध बनाए रखते हैं। यदि शुक्र मंगल की राशि में हो अथवा मंगल के साथ हो तो उस स्थिति में सामाजिक मर्यादाओं को तोड़ कर भी अपनी इच्छा के अनुसार जीवन साथी का चयन करते हैं। कहीं अनैतिक संबंध भी हो सकते हैं। परंतु प्रेम संबंध चिरस्थाई नहीं रह पाते। अशुभ योगों के कारण कई बार तंबाकू शराब आदि व्यसनों के भी शिकार हो जाते हैं। शुभ राशि जातक एवं उपयुक्त जीवन साथी👉 इसके लिए मैत्री चक्र के अतिरिक्त तत्व दृष्टि से भी विचार करना चाहिए। तुला राशि या लग्न को मेष, मिथुन, तुला एवं कुंभ राशि वालों के साथ वैवाहिक या व्यवसायिक संबंध शुभ एवं लाभदायक रहते हैं। वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु एवं मकर राशि के साथ मिश्रित अर्थात मध्यम फली। जबकि सिंह व मीन राशि वालों के साथ षडाष्टक दोष होने से लाभदायक एवं शुभ नहीं होता। इसके अतिरिक्त मेलापक संबंधित गुण आदि अन्य नियमों पर भी विचार कर लेना चाहिए। गृहस्थ जीवन👉 तुला जातक प्रेम संबंधों में प्रायः चंचल स्वच्छंद प्रकृति एवं उन्मुक्त व्यवहार में विश्वास करते हैं। परंतु विवाहोपरांत यदि (उपयुक्त जीवन साथी हो) उनके जीवन में विशेष परिवर्तन देखे गए हैं। विशेषकर बच्चों की पैदाइश के पश्चात उनकी प्रकृति में विशेष सुधारात्मक परिवर्तन होते हैं। अपने परिवार एवं गृहस्थ जीवन के प्रति पूरे इमानदार एवं समर्पित होते हैं। अपने परिवार को जीवन उपयोगी सभी प्रकार की सुख सुविधाएं देने के लिए जीवन पर्यंत कठोर परिश्रम करते हैं। पंचमेश शनि के कारण संतान अल्प अथवा सीमित संख्या में होती है। क्रमशः अगले लेख में हम तुला लग्न की जातिकाओ के विषय मे चर्चा करेंगे। पं देवशर्मा 9411185552 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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।। 🌷हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे🌷 ।। 〰️〰️〰️〰️〰️〰️🌷🌷〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ दशम भाव राहु है शुभ-⤵️ ➖➖➖➖➖➖ दशम भाव कुंडली का एक सबसे बड़ा केंद्र भाव है इस भाव से ज्योतिष ज्ञानी ज्यादातर सभी जानते है। नौकरी, व्यवसाय, नाम, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, अधिकार और सफलता आदि जैसे विषयो का विचार किया जाता है।सीधी सी भाषा मे कहें तो राहु दसवे भाव मे राजयोग देने वाला छाया ग्रह है।आज जितनी भी नौकरियां या व्यापार आदि है उनमें तकनीकी चीजो का ज्यादा उपयोग है और राहु इन सभी तकनीकी चीजो का कारक है जैसे नेटवर्किंग, कंप्यूटर वर्क, ऑनलाइन वर्क आदि इस करण से भी राहु दसवे भाव मे सबसे ज्यादा शुभ और राजयोगकारक फल देने वाला होता है। दसवे भाव मे यह शुभ होने पर किस तरह से जातक को उचाईयो पर लेकर जाता है इस विषय पर बात करते है।जब राहु दसवे भाव मे बैठा हो अपनी नीच या शत्रु राशियो के अलावा किसी भी राशि मे तब यह रातो रात जातक को काबिल बना देता है अचानक से ही कार्य छेत्र में अच्छा परिवर्तन देता है।जिन भी जातक/जातिकाओ के दसवे भाव का राहु बलवान और शुभ है तब ऐसे राहु की महादशा या अंतरदशा कैरियर में आशातीत चमक देती है दसवे भाव के राहु के जातक/जातिका राजनीति, गैरसरकारी कार्यो, शेयर बाजार, नाम मात्र काम से जिस काम मे अच्छा मुनाफा हो आदि जैसे छेत्रो में जातक को सफलता की सीढ़ियों पर लेकर जाता है। अब बात करते है राहु कब शुभ होता है- ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖⤵️ दसवे भाव का राहु शुभ फल दे और राजयोग दे इसके लिए जरूरी है सबसे पहले दसवे भाव के स्वामी मतलब जिस राशि मे दसवे भाव मे राहु है उस राशि का स्वामी बलवान और शुभ होकर बैठा हो।अब यदि राहु दसवे भाव मे शुभ होकर बैठा हो जैसे कि नवे या पाचवे भाव के स्वामी के साथ हो तब बेहद शानदार फल देता है।अकेला दसवे भाव मे हो तब सबसे ज्यादा शुभ होगा मेष, वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ और मीन राशि का राहु सबसे ज्यादा शुभ फल देता है। अब राहु दशवे भाव मे तो हो लेकिन दशम भाव के स्वामी के साथ न हो न ही दशमेश पर राहु या केतु की दृष्टि हो तब राहु की महादशा या अंतरदशा बहुत अच्छे फल देगी या राहु का दसवे भाव मे बैठना अच्छा फल देगा।अब राहु या केतु के साथ यह स्थिति हमेशा लागू रहती है कि राहु केतु एक दूसरे से सम-सप्तम होते है मतलब आपने सामने अब यदि राहु दसवे भाव मे होगा तो केतु चौथे भाव मे होगा इस कारण केतु के साथ भी कोई अशुभ योग न बना हो। अब राहु दसवे भाव मे बैठकर वर्गोत्तम हो तब इसके फल और भी ज्यादा शानदार होंगे।अब यदि राहु को कोई ग्रह दृष्टि या युति से सहयोग कर रहा हो तब इसमे यह टॉपिक देखना चाहिए कि राहु को सहयोग करने वाला ग्रह किस भाव का स्वामी जिस भी शुभ भाव का स्वामी सहयोग करेगा राहु के फलो को उस भाव के स्वामी की तरफ से संबंधित शुभ परिणाम मिलेंगे।। उदाहरण अनुसार दसवे भाव का राहु:- मकर लग्न लग्न कुंडली मे दसवे भाव मे तुला राशि मे राहु बैठा हो और शुक्र बलवान हो तब राहु बहुत शानदार फल देगा इसी तरह राहु को नवे या पाचवे भाव के स्वामी का साथ मिल जाय तब दसवे भाव मे बैठा राहु बहुत ही शुभ फल देने वाला हो जाएगा ऐसी स्थिति में ही यह रातो रात इंसान को राजा बना देता है।। #नोट:- दसवे भाव मे बैठकर यह नीच राशि या पीड़ित अवस्था या 6, 8 भाव के स्वामी से संबंध न किया हो वरना इसके फल अशुभ हो जाएंगे। 〰️〰️〰️🔸〰️〰️〰️🔸〰️〰️〰️〰️🔸〰️〰️ कुण्डली विश्लेषण एवं हस्तरेखा विश्लेषण या हस्तलिखित कुण्डली संपूर्ण विवरण सहित बनवाने हेतु या किसी भी प्रकार की समस्या के ज्योतिषीय एवं तांत्रिकीय परामर्श एवं समाधान हेतु हमारे प्रोफाइल नम्बर पर सशुल्क संपर्क कर सकते हैं। दिव्य ज्योतिष केंद्र (वाराणसी,उत्तर प्रदेश) आचार्य सत्यानन्द पाण्डेय (ज्योतिषाचार्य एवं तंत्राचार्य) WhatsApp 👉+919450786998 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️🔸〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

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ग्रहों के विभिन्न भावों का संक्षिप्त महत्व ग्रहों की विभिन्न भावों में क्या परिस्थिति है, वह शुभ है, या अशुभ इस बात का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है : बृहस्पति 1. पहले घर में बृहस्पति को राजगुरु कहा जाता है। 2. दूसरे घर में बृहस्पति को धर्मगुरु और विद्या का मालिक कहा जाता है। 3. तीसरे घर में बृहस्पति को गरजता शेर और खानदान का गुरु कहा जाता है। 4. चौथे घर में बृहस्पति चंद्र देश की राजधानी और बाग-बगीचा है। 5. पांचवें घर का बृहस्पति इन्सानी सिफ्तों, इज्जत-आबरू का मालिक मगर गुस्से वाला होता है। 6. छठे घर का बृहस्पति मुफ्तखोर मगर साधु स्वभाव। 7. सातवें घर में बृहस्पति गृहस्थी में फंसा साधु, औलाद से दुखी होता है। 8. आठवें घर का बृहस्पति मुसीबत के वक्त गैबी शक्ति वाला बुजुर्ग, कब्रिस्तान का साधु होता है। 9. नौवें घर का बृहस्पति सुनहरी खानदान का द्योतक, लेकिन खुद माया का त्यागी साधु है। 10. दसवें घर का बृहस्पति पहाड़ी इलाके और गृहस्थी का कारक, हर चीज के लिए कलपता, दरवेश, कम धन का द्योतक है। 11. ग्यारहवें घर का बृहस्पति खजूर के दरख्त सा अकेला मन्दा फल देने वाला है। 12. बारहवें घर का बृहस्पति उŸाम ज्ञानी, वैरागी, बुरे का भी भला करने वाला है। सूर्य 1. पहले घर में सूर्य सतयुगी राजा और हुकूमत करने वाला है। 2. दूसरे घर में सूर्य सुखदाता, जातक की बाजुओं का मालिक है। 3. तीसरे घर में सूर्य होने से जातक दौलत का राजा, खुद कमाकर घर वाला होता है। 4 चौथे घर में सूर्य दूसरों के लिए जोड-तोड़ यानी धन इकट्ठा करने वाला। 5. पांचवें घर में सूर्य पारिवारिक उन्नति का मालिक मगर ईर्ष्या करने वाला। 6. छठे घर का सूर्य दौलत से बेफिÿ और अपनी किस्मत से संतुष्ट। 7. सातवें घर में सूर्य होने से जातक कम कुटुम्ब वाला और डरपोक होगा। 8. आठवें घर में सूर्य होने से जातक तपस्वी राजा और सच बोलने वाला होता है। 9. नौवें घर का सूर्य लम्बी उम्र, भारी खानदान का पालक होता है। 10. दसवें घर में सूर्य होने से जातक इज्जत सेहत व दौलत का मालिक मगर वहमी होता है। 11. ग्यारहवें घर में सूर्य होने से जातक पूर्ण धर्मी मगर ऐश पसन्द हो। 12. बारहवें घर में सूर्य होने से सूर्य सुख की नीन्द सोने वाला मगर दूसरों की मुसीबत अपने सर लेने वाला हो। चंद्रमा 1. चंद्रमा पहले घर में-जब तक मां जिन्दा हो, जातक धन दौलत का मालिक हो। 2. चंद्रमा दूसरे घर में, खुद पैदा की हुई माया की देवी। 3. तीसरे घर में चंद्रमा, चोरी और मौत का रक्षक, उम्र का फरिश्ता जिससे मौत भी डरे। 4. चंद्रमा चौथे घर में-जातक जितना खर्च करे उतना ही धन आए यानी खर्च पर बढ़ने वाला आमदनी का दरिया। 5. चंद्रमा पांचवें घर में, बच्चों के दूध की माता, रूहानी नहर के समान होता है। 6. चंद्रमा छठे घर में, धोखे की माता, कड़वे पानी की तरह होता है। 7. चंद्रमा सातवें घर में, बच्चों की माता खुद लक्ष्मी का अवतार हो। 8. चंद्रमा आठवें घर में, मुर्दा माता जो कोई सुख न दे सके, जला हुआ दूध। 9. चन्द्रमा नौवें घर में, घड़े बराबर मोती, दुखियों का रक्षक, समुद्र। 10. चन्द्रमा दसवें घर में, आक रूपी जहरीला पौधा, जहरीला पानी। 11. चन्द्रमा ग्यारहवें घर में, कोई फायदा नहीं, शून्य न के बराबर। 12. चन्द्रमा बारहवें घर में, रात के वक्त तूफान से बस्तियां उजाड़ने वाला दरिया। शुक्कर 1. शुÿ पहले घर में, रंग बिरंगी माया का रूप। 2. शुÿ दूसरे घर में, मोह माया का उम्दा घर, सिर्फ मालिक से मांगना ही कमी पूरी करे। यहां मालिक का अर्थ है खुदा। 3. शुÿ तीसरे घर में, औरत की इज्जत करने से लाभ। 4. शुÿ चौथे घर में, खुशकी का सफर, ऐश का फल बुरा। 5. शुÿ पांचवें घर में , बच्चों से भरा घर परिवार। 6. शुÿ छठे घर में, पिलल्लू करे कब्बलियां, दब सिद्धियां पावेपि यानी आदमी कोई अजीब काम भी करे तब परमात्मा उसमें बरकत डाल दे। 7. शुÿ सातवें घर में, जैसा मैं वैसी वो। अगर शुÿ अकेला तो नेक यदि किसी ग्रह के साथ वैसा ही प्रभाव दे। 8. शुÿ आठवें घर में, जली हुई मिट्टी की चंडाल औरत। 9. शुÿ नौवें घर में, मिट्टी की काली आन्धी। 10. शुÿ दसवें घर में, काल्पनिक संसार में रहने वाला, यदि शनि कुण्डली में उम्दा हो तो इस घर का31 शुÿ धर्म मूरत है। 11. शुÿ ग्यारहवें घर में, हसीन मर्द या औरत, माया के लिए घूमता हुआ लट्टू। 12. शुÿ बारहवें घर में, पूर्ण रूप से देवी यानी भवसागर से पार करने वाली गाय। मंगल 1. पहले घर में मंगल, इन्साफ की तलवार या पूच्छल तारा। 2. दूसरे घर में मंगल, भाइ्रयों का पालक, यदि भाईयों की पालना न करे तो मंगल अशुभ हो। 3. तीसरे घर में मंगल, दूसरों के लिए शुभ खुद ऐसे जैसे चिडि़या घर में कैद शेर। यह तब होगा अगर तीसरे घर में मंगल अकेला हो। 4. चौथे घर में मंगल, जलती आग, बदी का सरदार, दूसरों से बदला लेने की तीव्र भावना। 5. पांचवें घर में मंगल, रईसों का बाप-दादा लेकिन यदि घर से बाहर रहे तो औलाद पर बुरा प्रभाव। 6. छठे घर में मंगल, तरसेमें की औलाद यानी ऐसी औलाद जो मां-बाप ने फरियाद करके ली हो। 7. सातवें घर में मंगल, मीठा हलवा और यदि मंगल बद हो तो मनहूस और बदकिस्मत। 8. आठवें घर में मंगल, मौत का फन्दा, फांसी की जगह, यानी दुनियां से चले जाने का कारण बने। 9. नौवें घर में मंगल, बुजुर्गों के बल पर चलता तख्तेशाही यदि मंगल बद हो तो बदनामी का कारक। 10. दसवें घर में मंगल, चीटी के घर में भगवान, राजा जैसा जातक। 11. ग्यारहवें में मंगल, तीन कुते रखने मुबारिक ह्दोहता, साला, कुता) वर्ना गरीबी का कुता भौंके। 12. बारहवें घर में मंगल, मंगल यहां पर अच्छा होता है। बुध 1. बुध पहले घर में, राजा या हाकिम मगर खुदगर्ज और बदनाम। 2. बुध दूसरे घर में, योगी राजा, ब्र२ ज्ञानी मगर मतलब परस्त। 3. बुध तीसरे घर में, इस घर में बुध के थूकने वाला कोढ़ी कहा है। 4. बुध चौथे घर में, राजयोग या हुनरमन्द होने का कारक। 5. बुध पांचवें घर में खुशहाली का कारक और मुंह से निकला वाक्य उत्तम फल दे। 6. बुध छठे घर में, गुमनाम योगी, दूसरों के लिए राजा। 7 बुध सांतवें घर में, दूसरों को तारने वाला। 8. बुध आठवें घर में, कोढ़ी और आर्थिक नुकसान करने वला। 9. बुध नौवें घर में, कोढ़ी या राजा दूसरे ग्रहों के साथ कोढ़ी अकेला राजा के समान फल में। 10. बुध दसवें घर में, आर्थिक हालत अच्छी दूसरों की खुशामद करने वाला। 11. बुध ग्यारहवें घर में, दौलतमन्द मगर उल्लू जैसा, 34 साल के बाद हीरे जैसा फल दे। 12. बारहवें घर में बुध, स्वभाव का अच्छा किन्तु रात को दुखिया होगा। शनि 1. पहले घर में शनि यदि मन्दा तो तीन गुना बुरा यदि उम्दा तो तीन गुना अच्छा।शनि मन्दा : पहले घर में शनि मन्दा तब होता है जब चौथे, सातवें या दसवें घर में कोई भी शत्रु ग्रह हो या कुण्डली में राहु और केतु मन्दे हों। 2. दूसरे घर में शनि को गुरु शरण में कहा गया है यानी कोई नुकसान नहीं। 3. तीसरे घर में शनि मन्दा हो तो दो गुणा बुरा फल देगा। 4. चौथे घर में शनि ऐसा सॉप जो पानी में रहे जिसमें जहर नहीं होता। 5. पांचवें घर में शनि को बच्चे घर वाला सांप कहा गया है यानी बुरा। 6. छठे घर में शनि किस्मत या लेख की स्याही, एक गुनाह मन्दा ह्माफ)। 7. सातवें घर में शनि को विधाता रूपी कलम कहा है रिजक के लिए उत्तम। 8. आठवें घर को शनि का हैडक्वार्टर कहा है इसलिए अच्छा और बुरा दोनों प्रभाव। 9. नौवें घर में शनि को कलम विधाता कहा है, मकानों व मर्दों के लिए शुभ। 10. दसवें घर में शनि ऐसा कि इन्सान को अपनी किस्मत खुद लिखनी पड़ती हैं 11. ग्यारहवें शनि को लिखे विधाता खुद विधाता यानी अति शुभ। 12. बारहवें घर में शनि कमल विधाता, आराम पसन्द। राहु 1. पहले घर में राहु दौलतमन्दी की निशानी, ऊंचाई पर पहुंचने वाला हाथी, लेकिन सूर्य साथ न हो तो। 2. दूसरे घर में राहु यानी राजा गुरु के अधीन, पंगूड़े की तरह चलती जिन्दगी का कारक। 3. तीसरे घर में राहु, उम्र और दौलत का मालिक, बन्दूक लिए खड़े पहरेदार की तरह। 4. चौथे घर में राहु, धर्मी मगर धन दौलत की आम फिÿ। 5. पांचवें घर में राहु, शरारत करे, औलद गर्क करने वाला। राहु पांचवें के समय जहां सूर्य बैठा हो वह घर शुभ फल देगा। 6. छठे घर में राहु फांसी काटने वाला मददगार हाथी। 7. सातवें घर में राहु चंडाल, लक्ष्मी का सत्यानाश करे। लक्ष्मी का अर्थ स्त्री और दौलत। 8. आठवें घर में राहु कड़वा घुआं मौत का पैगाम। 9. नौवें घर में राहु पागलों का सरताज हकीम मगर बेईमान। 10. दसवें घर में राहु सांप का फन या उसकी मणि यानी या तो अति उत्तम फल दे या बहुत बुरा। 11. ग्यारहवें घर में राहु पिता को गोली मारे मूंह न देखे। 12. बारहवें घर में राहु एक शेख चिल्ली की तरह। केतु 1. पहले घर में केतु हो तो इन्सान बड़ा परिवार बनाने वाला ह्बच्चे ज्यादा) 2. दूसरे घर में केतु हो तो इन्सान अच्छा हुक्मरान, मुसाफिर। 3. तीसरे घर में केतु, कुनमुनाने काला कुत्ता मगर नेक दरवेश। 4. चौथे घर में केतु, बच्चों को डराने वाला कुत्ता बच्चों की सेहत खराब।5. पांचवें घर का केतु अपने मालिक की रक्षा करने वला। 6. छठे घर में केतु शेर के कद जैसा खुंखार कुता, दोरंगी दुनियां। 7. सातवें घर में केतु शेर का मुकाबला करने वाला कुत्ता। 8. आठवें घर में केतु, ऐसा इन्सान जो यमराज के कदमों की आहट सुने। 9. नौवें घर में केतु, आज्ञाकारी बेटे की तरह, इन्सान की जुबान समझने वाला। 10. दसवें घर में केतु मंदा यानी अशुभ होता है। 11. ग्यारहवें घर में केतु गीदड़ जैसा डरपोक कुत्ता। 12. बारहवें घर में केतु वाले इन्सान के भाग्य में ऐशो आराम खानदानी। पहले घर के राहु के समय सूर्य का 12 घरों में फल राहु आठवें घर में, बारहवें घर में या मीन राशि में हो तो अशुभ फल देता है। यदि राहु मिथुन या कन्या राशि का हो या छठे घर में हो तो शुभ फल देता है। लेकिन यदि राहु पहले घर में हो और सूर्य किसी भी घर में हो तो सूर्य को खराब करता है। 1. यदि राहु पहले घर में सूर्य के साथ बैठा हो तो ऐसे इन्सान के व्यवसाय के क्षेत्र में उसके अपने दिमाग की खामियों के कारण काफी कष्ट आएंगे उसके साथ कई प्रकार की शरारतें हांगी। 2. दूसरा घर ससुराल का है और धर्म स्थान का भी इसलिए जब राहु पहले घर में हो और सूर्य दूसरे घर में तो इन्सान के ससुराल से संबंध ठीक नहीं होते और इन्सान धर्म विरोधी और पूजा पाठ से नफरत करने वाला होता है। 3. राहु के पहले घ में होने के समय तीसरे घर का सूर्य जातक के भाई बंधुओं पर मुसीबत खड़ी करेगा। 4. पहले घर के राहु के समय यदि सूर्य चौथे में हो तो माता खानदान यानी ननिहाल की तरफ और इन्सान की खुद की आमदनी में रोड़े अटकाने वाला होता है। 5. राहु पहले के समय, सूर्य यदि पांचवें हो जहां कालपुरुष की कुण्डली के अनुसार सिंह राशि होती है, यही राहु सूर्य के अधीन होता है और औलाद पर कोई बुरा असर नहीं डालता। 6. राहु पहले के समय सूर्य यदि छठे घर में हो तो लड़के लड़कियों के ससुराल वालों की तरफ से अशुभ बातें सुनने को मिलेंगी और झूठे लांछन लगेंगे। 7. राहु पहले और सूर्य सातवें के समय अदालती कारोबार और गृहस्थी में अशुभ फल मिलेंगे। 8. राहु पहले के समय अगर सूर्य आठवें घर में हो तो बिना कारण खर्च ज्यादा होगा। आदमी की रोटी कुŸा खाए यानी कमाए कोई और खाए दूसरा। 9. राहु पहले के समय जब सूर्य नौवें घर में हो तो ऐसा इन्सान खुद तो धर्म से लापरवाह होगा ही साथ में बुजतुर्गों के बनाए धर्म स्थान का भी दुरूपयोग करेगा। 10. राहु पहले घर में और सूर्य दसवें में हो तो ऐसे इन्सान को समाज में इज्जत नहीं मिलती। लोग उसके सच पर भी विश्वास नहीं करते। 11. राहु पहले के समय सूर्य ग्यारहवें में हो तो इन्सान इन्साफ करने वाला होगा लेकिन राहु उसके दिमाग में अहंकार भर देगा जो उसकी बर्वादी का कारण बनेगा। 12. राहु के पहले घर के समय अगर सूर्य बारहवें में हो तो रात को आराम करने के समय कोई न कोई मुसीबत खड़ी करे। यानी इन्सान को रात को आराम के वक्त कोई न कोई बुरी खबर, जो उसके खुद के जीवन से संबंधित हो, मिलेगी या जीवन में किसी न किसी तरह की खबरें जो बुरी हों मिलेंगी। वर्षफल के अनुसार बारह घरों में केतु का फल जब कभी भी सफर सौ दिन से ज्यादा का होगा तो वर्षफल के अनुसार केतु के फल देखने को मिलेंगे। समुद्री जहाज या किश्ती द्वारा किए गए सफर का मालिक चंद्रमा है। हवाई जहाज से किए हुए सफर का कारक या मालिक बृहस्पति है। बस, मोटरकार, रेलगाड़ी आदि के सफर का कारक या मालिक शुÿ है। लेकिन हर तरह के सफर का हुक्म केतु की ओर से ही मिलता है। 1. वर्षफल के अनुसार केतु यदि पहले घर में हो तो सफर के लिए बिस्तर बंध जाएगा लेकिन यात्रा न हो पाएगी। यदि इन्सान सफर पर चला भी जाता है तो शीघ्र वापिस आए। यह हालत और भी पक्की होती है जब सातवां घर खाली हो। 2. वर्षफल के अनुसार दूसरे घर का केतु उन्नति देकर यात्रा करवाता है यानी यात्रा और उन्नति दोनों एक साथ होगी। यदि उन्नति नहीं तो यात्रा भी नहीं। यह बात और भी पक्की हो जाती है यदि आठवां घर उस समय खाली हो। 3. वर्षफल के अनुसार तीसरे घर का केतु मित्रों व रिश्तेदारों से अलग करे बशर्ते नौवां घर खाली हो। 4. वर्षफल के अनुसार चौथे घर का केतु यात्रा नहीं करवाता और यदि होती है तो मंदी यात्रा नहीं होगी लेकिन घर नं. 10 ठीक होना चाहिए। 5. वर्षफल के अनुसार पांचवें घर का केतु जगह यानी शहर परिवर्तन नहीं करवाता लेकिन जहां इन्सान पहले काम करता हो उस इमारत में तबदीली करवाता है। यह परिवर्तन अशुभ नहीं होगा अगर बृहस्पति ठीक हो तो। 6. वर्षफल के अनुसार अगर केतु छठे घर में हो तो सफर का बन्दोवस्त होकर रुक जाएगा अगर नं 9 में कोई न कोई ग्रह बैठा हो। 7. केतु नम्बर 7 घर में होने से मजबूरी की हालत में सफर करना पड़ता है। अपने जद्दी घर बार की तरफ शहर का परिवर्तन होता है और यात्रा का परिणाम भी ठीक होता है यदि घर नं एक में शुभ ग्रह हों। 8. वर्षफल के अनुसार केतु घर नं. 8 में हो तो यदि यात्रा होगी भी तो खुशी की नहीं होगी। इच्छा के विरुद्ध यात्रा करनी पड़ेगी यदि घर नं. 11 में केतु के शत्रु ग्रहों में चंद्र और मंगल हों। इन चीजां का बुरा असर पुत्र, कानों, रीढ़ की हड्डी जोड़ों आदि पर हो सकता है। चंद्र का उपाय करें। 15 दिन लगातार कुते को दूध पिलाए। मन्दिर में दूध का दान करें। 9. केतु घर नं. 9 में हो, तो अपनी इच्छा से अपने जद्दी घर बार की तरफ यात्रा होगी। यह यात्रा शुभ होगी बशर्ते घर नं. 3 अशुभ न हो रहा हो। 10. वर्षफल के अनुसार केतु नं. 10 में होने के समय यात्रा अचानक होगी। अगर कुण्डली में शनि शुभ हो तो यात्रा से दो गुना लाभ और यदि शनि अशुभ हो तो हानि होगी इनके अलावा यदि आठवां घर मन्दा हो तो यात्रा भी मन्दी ही होगी। 11. वर्षफल के समय केतु ग्यारहवें में हो तो यात्रा का हुक्मनामा ऊपर से नीचे नहीं पहुंचेगा। दिखावटी हलचल होकर यात्रा टल जायेगी। 12. वर्षफल में केतु यदि बारहवें घर में हो तो इन्सान अपने परिवार के साथ ही सुख से रहेगा। उन्नति हो सकती है। यदि किसी कारणवश यात्रा करनी भी पड़ जाए तो शुभ रहेगी। इसी समय यदि घर नं. 2 और 6 शुभ हों तो इसका शुभ फल और भी अच्छा हो जाएगा। लाल किताब के उपायों का आधार व व्याख्या 1. उपाय द्वारा ग्रह को नष्ट करना : मान लें कि आठवें स्थान में अशुभ शुÿ है, तो उसको नष्ट करने के लिए शुÿ की वस्तु ज्वार को वीरान जगह पर दबा देना चाहिए। इस से वर्षफल में आठवें घर के अशुभ शुÿ का प्रभाव खत्म हो जाएगा। 2. उपाय द्वारा ग्रह हो अपने से दूर करना : यदि बारहवें घर में वर्षफल के अनुसार अशुभ मंगल हो तो चलते पानी में गुड़ की रेवडि़यां बहाने से अशुभ मंगल का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। 3. उपाय द्वारा ग्रह के बुरे स्वभाव को बदलना : इसमें न तो ग्रह को नष्ट किया जाता है, न मारा जाता है, बल्कि उसके अशुभ स्वभाव को बदला जाता है। जैसे वर्षफल या कुण्डली में पांचवें घर में राहु हो तो वह लड़के की पैदाइश में बाधा का कारक होता है, लेकिन लड़की के लिए उसका बुरा असर नहीं होता। इसलिए राहु को नष्ट करना या अपने से दूर करना लड़की के लिए अशुभ साबित हो सकता है। यहां पर राहु के स्वभाव को बदलना ठीक रहेगा। चान्दी का ठोस हाथी घर में रखने से राहु का बुरा प्रभाव समाप्त हो जाएगा और उसका शुभ प्रभाव कायम रहेगा। 4. शुभ ग्रह को स्थापित करना : मान लें कि दूसरे घर में चंद्रमा हो तो चंद्रमा की कारक वस्तु, चावल, दूसरी कारक चीज मां के हाथों से लेकर अपने पास रखें, शुभ साबित होगी। 5. अशुभ ग्रहों के झगड़े को समाप्त करना : अगर छठे घर में सूर्य और शनि हों, तो उन दोनों के झगड़े से पैदा होने वाले अशुभ प्रभाव को समाप्त करने के लिए छठे घर के ग्रह बुध की कारक वस्तु को स्थापित करना चाहिए। क्योंकि बुध सूर्य और शनि दोनों का मित्र है इसलिए उनमें झगड़ा नहीं होने देगा। बुध की कारक वस्तु है फूलों वाला पौधा, उसे घर में लगाना चाहिए। 6. कान पकड़ कर कसम खिलाना : शनि को पांचवें घर में बच्चे घर वाला सांप कहा गया है। इसलिए शनि की कारक वस्तु बादाम को मन्दिर ले जाकर वहां रख कर शनि को कसम दिलवा दी जाती है कि वह शरारत न करे। आधे बादाम घर लाकर रखे जाते हैं और अगले वर्ष उन्हें पानी में बहा दिया जाता है। जब आम उपाय काम न करे तो उपाय 43 दिन तक लगातार करना चाहिए। सूर्य : चलते पानी में गुड़ बहाएं। मंगल बद : गुड़ की रेवडि़यां चलते पानी में बहाएं। चंद्र : पानी या दूध का बर्तन रात को सिरहाने रखें, प्रातः कीकर की जड़ में डालें। शनि : तेल का छाया पात्र दान करें। प्रातः समय तेल की मालिश करें। शुÿ : गोदान करें या ज्वार-चरी गाय को खिलाएं। मंगल नेक : मीठा भोजन दान करें। बुध : तांबे के पैसे में सुराख करके 43 दिन दरिया में बहाएं। राहु : मूली सिरहाने रख कर सोए, सुबह दान करें। तुला दान करें, कोयला बहाएं। केतु : कुत्तों को रोटी का टुकड़ा डालें। उपाय करने के विशेष नियम : 1. सभी उपाय दिन ह्सूर्योदय के बाद सूर्यास्त से पहले) के समय करें। 2. बारिश वाले दिन या बादल छाये हों तो उपाय नहीं किया जाता। 3. एक दिन में केवल एक ही उपाय हो सकता है। 4. किसी और के लिए उसके खून का रिश्तेदार भी उसके लिए उपाय कर सकता है।

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