ऊं-नमः-शिवाय.

सोमवार के दिन इन मंत्रों से करें भगवान शिव को प्रसन्न, होगी हर मनोकामना पूरी सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना का विशेष महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार को विधिवत तरीके से भोलेनाथ की पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं. महिलाएं सौभाग्य प्राप्ति की कामना के साथ सोमवार का व्रत रखती हैं. मान्यता है कि यदि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं तो उन्हें मनचाहे उपयुक्त जीवनसाथी की प्राप्ति होती है. इसके अलावा यदि अविवाहित पुरुष भी यह व्रत करते हैं तो उनके विवाह में आ रही बाधा दूर हो जाती है. भगवान शिव बेहद क्रोध वाले देवता माने जाते हैं लेकिन इसके साथ ही उन्हें सबसे जल्दी प्रसन्न और कृपा होने वाला देवता भी माने जाते हैं. भगवान शिव की भक्ति बिना मन्त्रों के अधूरी है. आइए जानते हैं भगवान शिव के प्रभावशाली मन्त्रों के बारे में. महामृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ शिव जी का मूल मंत्र – ऊँ नम: शिवाय।। भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र- - ओम साधो जातये नम:।। - ओम वाम देवाय नम:।। - ओम अघोराय नम:।। - ओम तत्पुरूषाय नम:।। - ओम ईशानाय नम:।। -ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।। रूद्र गायत्री मंत्र ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।। महामृत्युंजय गायत्री मंत्र – ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्‌ ॐ स्वः भुवः ॐ सः जूं हौं ॐ ॥

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🔹🔸🔹♦️🔵♦️🔹🔸🔹 *🟠👉🏿लालच ही हमारे दु:खों का कारण है।➖* *एक पंडित जी कई वर्षो से काशी में शास्त्रों और वेदों का अध्ययन कर रहे थे।* *उन्हें सभी वेदों का ज्ञान हो गया था।* *पंडित जी को लगा कि अब वह अपने गाँव के सबसे ज्ञानी व्यक्ति कहलायेगे।* *उनके अन्दर घमण्ड आ गया था।* *अगले दिन पंडित जी अपने गाँव जाने लगे।* *गाँव में आते ही एक किसान ने उनसे पूछा, क्या आप हमें बता सकते है, कि हमारे समाज में लोग दु:खी क्यों है ?* *पंडित जी ने कहा, लोगों के पास जीने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।* *अपनी जरुरत पूरी करने के लिए धन नहीं है, इसलिए लोग दु:खी है।* *किसान ने कहा, परन्तु पंडित जी जिन लोगो के पास धन दौलत है, वह लोग भी दु:खी है।* *मेरे पास धन संपत्ति है फिर भी मैं दु:खी हूँ क्यों ?* *पंडित जी को कुछ समझ नहीं आया कि वह किसान को क्या उत्तर दें।* *किसान ने कहा कि, वह आपको अपनी सारी संपत्ति दान कर देगा अगर आप उस के दुःख का कारण पता करके उसे बता दें तो।* *पंडित जी ने उसकी संपत्ति के लालच में कहा, ठीक है मैं कुछ दिनों में ही आपके दुःख का कारण ढूंढ लाऊंगा।* *यह कहकर पंडित जी पुनः काशी चले गए।* *उन्होंने शास्त्रों और वेदों का फिर से अध्ययन किया, परन्तु उन्हें किसान के सवाल का जवाव नहीं मिला।* *पंडित जी बहुत परेशान थे।* *वह सोच रहे थे कि अगर मैं किसान के सवाल का उत्तर नहीं दे पाया तो, लाखो की संपत्ति हाथ से चली जाएगी।* *उनकी मुलाकात एक औरत से हुई, जो रोड पर भीख माँग कर अपना गुजारा करती थी।* *उसने पंडित जी से उनके दुःख का कारण पूछा।* *पंडित जी ने उसे सब कुछ बता दिया।* *उस औरत ने कहा कि, वह उनको उनके सवाल का उत्तर देगी, परन्तु उसके लिए उन्हें उसके साथ कुछ दिन रहना पड़ेगा।* *पंडित जी कुछ देर चुप रहे वह सोच रहे थे कि, वह एक ब्राह्मण हैं, इसके साथ कैसे रह सकते हैं।* *अगर वह इसके साथ रहे तो उनको धर्म नष्ट हो जायेगा।* *पंडित जी ने फिर सोचा कुछ दिनों की बात है, उन्हें किसान के सवाल का उत्तर जब मिल जायेगा वह चले जायेंगे, और किसान की संपत्ति के मालिक बन जायेंगे।* *पंडित जी उसके साथ रहने के लिए तैयार हो गए।* *कुछ दिन तक वह उसके साथ रहे पर सवाल का उत्तर उस औरत ने नहीं दिया।* *पंडित जी ने उससे कहा, मेरे सवाल का उत्तर कब मिलेगा।* *औरत बोली, आपको मेरे हाथ का खाना खाना होगा।* *पंडित जी मान गए।* *जो किसी के हाथ का पानी भी नहीं पीते थे, वह उस गन्दी औरत के हाथ का बना खाना खा रहे थे।* *उनके सवाल का उत्तर अब भी नहीं मिला।* *अब औरत ने बोला उन्हें भी उनके साथ सड़क पर खड़े होकर भीख मांगनी पड़ेगी।* *पंडित जी को किसान के सवाल का उत्तर पता करना था, इसलिए वह उसके साथ भीख मांगने के लिए भी तैयार हो गए।* *उसके साथ भीख मांगने पर भी उसे अभी तक सवाल का उत्तर नहीं मिला था।* *एक दिन औरत ने पंडित जी से कहा कि उन्हें आज उसका झूठा भोजन खाना है।* *यह सुनकर पंडित जी को गुस्सा आया, और वह उस पर चिल्लाये और बोले तुम मुझे मेरे सवाल का उत्तर दे सकती हो तो बताओ।* *वह औरत मुस्कुराई और बोली, पंडित जी यह तो आपके सवाल का उत्तर है।* *यहाँ आने से पहले आप किसी के हाथ का पानी भी नहीं पीते थे।* *मेरे जैसी औरतों को तो आप देखना भी पसंद नहीं करते थे, परन्तु किसान की संपत्ति के लालच में आप मेरे साथ रहने के लिए भी तैयार हो गए।* *पंडित जी इंसान का लालच और उसकी बढ़ती हुई इच्छाएँ ही उसके दुःख का कारण हैं।* *जो उसे वह सब कुछ करने पर मजबूर कर देती हैं, जो उसने कभी करने के लिए सोचा भी नहीं होता।* ----------:::×:::--------- *इतनी मेहरबानी मेरे ईश्वर बनाए रखना,* *जो रास्ता सही हो उसी पर चलाए रखना।* *ना दुखे दिल किसी का मेरे शब्दों से,* *इतना रहम तू मेरे भगवान् मुझपे बनाऐ रखना।।* 🔹🔸🔹♦️🔵♦️🔹🔸🔹

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