आरती*

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Swamini Oct 7, 2021

आरती: जय जय जगदंबे (रेणुका माता) | जय जय जगदंबे | श्री अंबे | रेणुके कल्पकदंबे | जय जय || धृ || अनुपम स्वरुपाची तुझी धाटी | अन्य नसे या सृष्टी | तुज सम रूप दुसरे, परमेष्टी | करिता झाला कष्टी | शशीरस रसरसला ,वदनपुटी | दिव्य सुलोचन दृष्टी | सुवर्ण रत्नांच्या, शिरी मुकुटी | लोपती रविशशी कोटी | गजमुखी तुज स्तविले हेरंबे | मंगल सकळारंभे || जय जय || १ || कुमकुम चिरी शोभे मळवटी | कस्तुरी टिळक लल्लाटी | नासिक अति सरळ, हनुवटी | रुचिरामृत रस ओठी | समान जणू लवल्या, धनुकोटी | आकर्ण लोचन भ्रुकुटी | शिरी नीट भांगवळी, उफराटी | कर्नाटकची घाटी | भुजंग नीळरंगा, परी शोभे | वेणी पाठीवर लोंबे || जय जय || २ || कंकणे कनकाची मनगटी | दिव्य मुद्या दश बोटी | बाजूबंद जडे बाहुबटी | चर्चुनी केशर उटी | सुगंधी पुष्पांचे हार कंठी | बहु मोत्यांची दाटी | अंगी नवी चोळी, जरीकाठी | पीत पितांबर तगटी | पैंजण पदकमळी, अति शोभे | भ्रमर धावती लोभे || जय जय ||३ || साक्षप तू क्षितिच्या तळवटी | तूचि स्वये जगजेठी | ओवाळीत आरती, दिपताटी | घेऊनी कर संपुष्टी | करुणामृत हृदये, संकटी | धावसी भक्तांसाठी | विष्णूदास सदा, बहुकष्टी | देशील जरी नीजभेटी | तरी मग काय उणे, या लाभे | धाव पाव अविलंबे || जय जय || ४ ||

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Swamini May 26, 2021

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