आयुर्वेद

Ravi pandey Jun 17, 2019

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 9 शेयर

आयुर्वेद के अनुसार🌿🌿🌿 खरबूजे से स्वास्थ्य लाभ ख़रबूज़ा एक फल है। यह पकने पर हरे से पीले रंग के हो जाते है, हलांकि यह कई रंगों मे उपलब्ध है। मूल रूप से इसके फल लम्बी लताओं में लगते हैं। गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंड़ा रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है। हमारा शरीर ठंड़ा रहे इसलिए हम तरह-तरह के तरीकों को अपनाते हैं। खरबूजे की कई किस्में बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। 1. मानसिक विकृतियां जिन व्यक्तियों को मस्तिष्क के ज्ञानतंतुओं की विकृति से उन्माद, पागलपन और हिस्टीरिया जैसी विकृति हो, तो उसके लिए खरबूजे का सेवन अत्यंत लाभप्रद है| कई प्रकार के रक्त रोगों का शमन भी खरबूजे के नित्य सेवन से हो जाता है| 2. मूत्र-संस्थान के रोग खरबूजा (बागपत का मीठा) नित्य खाने से मूत्र-संस्थान की शुद्धि होती है, जिससे मूत्र साफ आता है तथा कब्ज नष्ट होता है और दस्त साफ आकर पेट की अच्छी सफाई हो जाती है| 3. स्मृति-दौर्बल्य खरबूजे की मिंगी को सुखाकर, छीनकर रख लें| इसको पीसकर और दूध में मिलाकर ठंडाई की भांति सेवन करने से दिमाग को शक्ति और शांति मिलती है| चक्कर आना, स्मृति-दौर्बल्य तथा अनिद्रा का रोग इस प्रयोग से सहज ही दूर हो जाता है| 4. अन्य शारीरिक रोग जलोदर और पीलिया में खरबूजा बहुत उपयोगी हैं| यह पेट की गर्मी को निकालकर, ठंडक प्रदान करता है| गुर्दे के रोगों को मिटाता है| गुर्दे में अटकी पथरी को मूत्र के साथ निकाल देता है| सीने का दर्द और यकृत की सूजन दूर करता है| मुंह के छालों में भी लाभदायक है तथा गले की जलन को दूर करने में समक्ष है| सादर आभार 🌿🌹🙏🌹🌿 जनहित में जारी 🌹👨‍👨‍👦👨‍👨‍👦👨‍👨‍👦🌹

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर

दिनांक 16/06/2019 आयुर्वेद के अनुसार🌿🌿🌿 शीघ्रपतन के लिए उपचार पुरुष द्वारा स्त्री को संतुष्ट किए बिना उद्वेग के चरम क्षणों में स्खलित हो जाना, शीघ्रपतन कहलाता है| इसका मुख्य कारण हीन भावना तथा आत्मविश्वास की कमी होता है| ऐसे व्यक्ति को मन में कामुकता का विचार नहीं रखना चाहिए| 1. छुहारा और गाय का दूध प्रतिदिन सुबह के समय दो छुहारे चबाकर ऊपर से आधा किलो गाय का दूध पीना चाहिए| 2. ईसबगोल, खसखस, मिश्री और दूध ईसबगोल, खसखस और मिश्री – सब 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सेवन करें| ऊपर से दूध पी जाएं| 3. प्याज और शहद दो चम्मच प्याज के रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह के समय खाली पेट लेना चाहिए| 4. तुलसी और घी तुलसी के पौधे की जड़ का चूर्ण चौथाई चम्मच घी में मिलाकर लें| 5. कौंच, दूध, मिश्री और तालमखाना कौंच के बीज तथा तालमखाना – दोनों के 5-5 ग्राम चूर्ण दूध या मिश्री के साथ सेवन करें| 6. चाय, लहसुन और दूध प्रतिदिन चाय के साथ लहसुन की 10 बूंदें सेवन करें| ऊपर से आधा किलो दूध पिएं| लहसुन सेक्स सम्बंधी सभी प्रकार के रोगों के लिए रामबाण है| 7. मूली मूली के बीजों को तेल में मिलाकर औटा लें| फिर इस तेल से लिंग की मालिश करें| 8. बबूल, पानी और दूध बबूल के चार-पांच पत्ते तथा 5 ग्राम गोंद पानी में भिगोकर मसल डालें| फिर उनको पानी सहित पी जाएं| ऊपर से दूध का सेवन करें| शीघ्रपतन का कारण **************** स्त्री से अधिक सम्भोग करने, हस्तमैथुन की आदत, पुष्टिकारक भोजन की कमी, जननेन्द्रिय सम्बंधी रोग, मदिरापान तथा अन्य नशीली चीजों का सेवन शीघ्रपतन रोग के कारण बन जाते हैं| शीघ्रपतन की पहचान ***************** पुरुष स्त्री से सम्भोग करने से पहले या कुछ ही समय बाद वीर्यापात कर बैठता है| शीघ्रपतन के कारण पुरुष को स्त्री के सामने लज्जित होना पड़ता है, क्योंकि स्त्री संतुष्ट नहीं हो पाती| धीरे-धीरे व्यक्ति की शारीरिक शक्ति भी क्षीण हो जाती है| वह स्त्री से प्यार करने, उसे चिपटाने या चुम्बन लेने मात्र से ही स्खलित हो जाता है| ऐसे पुरुषों की स्त्रियों को बहुत कष्ट उठाने पड़ते हैं| कई बार वे अन्य पुरुषों से अवैध सम्बंध स्थापित कर लेती हैं| सादर प्रणाम 🌿🙏🙏🌿 जनहित में जारी 🌿🌹👨‍👨‍👦🌹🌿

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर