आयुर्वेद

babita singh Aug 20, 2019

*स्नान कब और कैसे करें घर की समृद्धि बढ़ाना हमारे हाथ में है। सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए हैं। *1* *मुनि स्नान।* जो सुबह 4 से 5 के बीच किया जाता है। . *2* *देव स्नान।* जो सुबह 5 से 6 के बीच किया जाता है। . *3* *मानव स्नान।* जो सुबह 6 से 8 के बीच किया जाता है। . *4* *राक्षसी स्नान।* जो सुबह 8 के बाद किया जाता है। ▶मुनि स्नान सर्वोत्तम है। ▶देव स्नान उत्तम है। ▶मानव स्नान सामान्य है। ▶राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है। . किसी भी मानव को 8 बजे के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . *मुनि स्नान .......* 👉🏻घर में सुख ,शांति ,समृद्धि, विद्या , बल , आरोग्य , चेतना , प्रदान करता है। . *देव स्नान ......* 👉🏻 आप के जीवन में यश , कीर्ती , धन, वैभव, सुख ,शान्ति, संतोष , प्रदान करता है। . *मानव स्नान.....* 👉🏻काम में सफलता ,भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ, परिवार में एकता, मंगलमय , प्रदान करता है। . *राक्षसी स्नान.....* 👉🏻 दरिद्रता , हानि , क्लेश ,धन हानि, परेशानी, प्रदान करता है । . किसी भी मनुष्य को 8 के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . पुराने जमाने में इसी लिए सभी सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे। *खास कर जो घर की स्त्री होती थी।* चाहे वो स्त्री माँ के रूप में हो, पत्नी के रूप में हो, बहन के रूप में हो। . घर के बड़े बुजुर्ग यही समझाते सूरज के निकलने से पहले ही स्नान हो जाना चाहिए। . *ऐसा करने से धन, वैभव लक्ष्मी, आप के घर में सदैव वास करती है।* . उस समय...... एक मात्र व्यक्ति की कमाई से पूरा हरा भरा परिवार पल जाता था, और आज मात्र पारिवार में चार सदस्य भी कमाते हैं तो भी पूरा नहीं होता। . उस की वजह हम खुद ही हैं। पुराने नियमों को तोड़ कर अपनी सुख सुविधा के लिए हमने नए नियम बनाए हैं। . प्रकृति ......का नियम है, जो भी उस के नियमों का पालन नहीं करता, उस का दुष्परिणाम सब को मिलता है। . इसलिए अपने जीवन में कुछ नियमों को अपनायें और उन का पालन भी करें । . आप का भला हो, आपके अपनों का भला हो। . मनुष्य अवतार बार बार नहीं मिलता। . अपने जीवन को सुखमय बनायें। जीवन जीने के कुछ जरूरी नियम बनायें। ☝🏼 *याद रखियेगा !* 👇🏽 *संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।* *सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोएं।* *पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे।* मृत्यु उपरांत एक सवाल ये भी पूछा जायेगा कि अपनी अँगुलियों के नाम बताओ । जवाब:- अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करें :- (1)जल (2) पथ्वी (3)आकाश (4)वायु (5) अग्नि ये वो बातें हैं जो बहुत कम लोगों को मालूम होंगी । 5 जगह हँसना करोड़ों पाप के बराबर है 1. श्मशान में 2. अर्थी के पीछे 3. शोक में 4. मन्दिर में 5. कथा में सिर्फ 1 बार ये message भेजो बहुत लोग इन पापों से बचेंगे ।। अकेले हो? परमात्मा को याद करो । परेशान हो? ग्रँथ पढ़ो । उदास हो? कथाएं पढ़ो। टेन्शन में हो? भगवत् गीता पढ़ो । फ्री हो? अच्छी चीजें करो हे परमात्मा हम पर और समस्त प्राणियों पर कृपा करो...... *सूचना* क्या आप जानते हैं ? हिन्दू ग्रंथ रामायण, गीता, आदि को सुनने,पढ़ने से कैन्सर नहीं होता है बल्कि कैन्सर अगर हो तो वो भी खत्म हो जाता है। व्रत,उपवास करने से तेज बढ़ता है, सरदर्द और बाल गिरने से बचाव होता है । आरती----के दौरान ताली बजाने से दिल मजबूत होता है । ये मैसेज असुर भेजने से रोकेगा मगर आप ऐसा नहीं होने दें और मैसेज सब नम्बरों को भेजें । श्रीमद् भगवद्गीता, भागवत्पुराण और रामायण का नित्य पाठ करें। . ''कैन्सर" एक खतरनाक बीमारी है... बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं ... बहुत मामूली इलाज करके इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है ... अक्सर लोग खाना खाने के बाद "पानी" पी लेते हैं ... खाना खाने के बाद "पानी" ख़ून में मौजूद "कैन्सर "का अणु बनाने वाले '''सैल्स'''को '''आक्सीजन''' पैदा करता है... ''हिन्दु ग्रंथों में बताया गया है कि... खाने से पहले 'पानी' पीना अमृत" है... खाने के बीच मे 'पानी' पीना शरीर की 'पूजा' है ... खाना खत्म होने से पहले 'पानी' पीना "औषधि'' है... खाने के बाद 'पानी' पीना बीमारियों का घर है... बेहतर है खाना खत्म होने के कुछ देर बाद 'पानी' पीयें ... ये बात उनको भी बतायें जो आपको 'जान' से भी ज्यादा प्यारे हैं ... हरि हरि जय जय श्री हरि !!! रोज एक सेब नो डाक्टर । रोज पांच बादाम, नो कैन्सर । रोज एक निंबू, नो पेट बढ़ना । रोज एक गिलास दूध, नो बौना (कद का छोटा)। रोज 12 गिलास पानी, नो चेहरे की समस्या । रोज चार काजू, नो भूख । रोज मन्दिर जाओ, नो टेन्शन । रोज कथा सुनो मन को शान्ति मिलेगी । "चेहरे के लिए ताजा पानी"। "मन के लिए गीता की बातें"। "सेहत के लिए योग"। और खुश रहने के लिए परमात्मा को याद किया करो हरे कृष्ण हरि हरि !!!

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Daksha Aug 20, 2019

👉🏻 बांगडी, पैजण आणी जोडवी केवळ सौभाग्याचे वान नसुन आरोग्यासाठी फायदेशीर आहे. 👉🏻 सोन्याचे दागिने उष्णता आणी चांदीचे दागिने थंड परिणाम देतात. कंबरेच्या वरिल भागात सोन्याचे दागिने आणी कंबरेच्या खालील भागात चांदीचे दागिने घातले पाहिजेत. हा नियम पाळल्याने शरीरातील उष्णता आणी शितलतेचे संतुलन राहते. ● बांगडी घालण्याचे फायदे ● 1) बांगडी मनगटावर घासली जाते त्यामुळे हाताच रक्तसंचार वाढतो. 2) हे घर्षण उर्जा निर्माण करते यामुळे अशक्तपणा जाणवत नाही. 3) बांगडी घातल्याने श्वासासंबंधी व ह्रद्यासंबंधी आजार होण्याची शक्यता कमी होते. 4) बांगडी घातल्याने मानसिक संतुलन उत्तम ठेवण्यास मदत होते. 5) तुटलेली बांगडी घालुन नये, याने नकारात्मक उर्जा वाढते. ● जोडवी घालण्याचे फायदे ● 1) विवाहित स्त्रिया पायातल्या तीन बोटांमध्ये जोडवी घालतात. हा दागिना केवळ श्रृंगाराची वस्तु नाही. 2) दोन्ही पायांत जोडवी घातल्याने शरीरातील " *Hormonal System* " योग्यरित्या कार्य करत. 3) जोडवी घालण्याने " *Thyroid* " चा धोका कमी होतो. 4) जोडवी " *Acupressure* " उपचार पद्धतीवर कार्य करतात ज्यामुळे शरीरातील खालील अंगाचे मज्जासंस्था आणी स्नायु मजबूत होतात. 5) जोडव्यांमुळे एका विशिष्ट रक्तवाहिनीवर दाब निर्माण होत असल्यामुळे गर्भाशयाला रक्तपुरवठा सुरळीतपणे चालू राहतो. या प्रकारे, जोडवी स्त्रियांची गर्भधारणा क्षमता निरोगी ठेवते व मासिक पाळी ही नियमित होते. ● पैजण घालण्याचे फायदे ● 1) पैजण पायातुन निघणारी शारीरिक विद्युत उर्जा शरिरात संरक्षित ठेवते. 2) पैजण स्त्रीयांचे पोट आणी त्यांच्या शरीरातील खालील भागातील " *Fat's* " कमी करण्यात मदत होते. 3) वास्तुशास्त्रानुसार पैजणातून येणा-या स्वराने नकारात्मक उर्जा दूर होते. 4) चांदीच्या पैजणामुळे पायाचे घर्षण होऊन पायाचे हाड मजबूत होते. 5) पायातील पैजणामुळे महिलांची इच्छा-शक्ती मजबूत होते. याच कारणामुळे स्त्रिया स्वतःच्या आरोग्याची काळजी न घेता कुटुंबाच्या सगळ्या गरजा पुर्ण करण्यात दिवस घालवून देते.6) पायात सोन्याचे पैजण घालू नये. याने शारीरिक उष्णतेचे संतुलन बिघडून आजार होण्याची शक्यता असते. 🙏🏻 धन्यवाद 🙏🏻 Plz हा मेसेज स्त्रियांसाठी जास्तीत जास्त share करा

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Prince Trivedi Aug 20, 2019

*🌐💎World Mosquito Day 2019: मच्छर से जुड़े इस दिन का इतिहास और महत्व☺🌎* हर वर्ष 20 अगस्त को दुनिया भर में विश्व मच्छर दिवस (World Mosquito Day) मनाया जाता है। यह दिन मच्छरों के बारे में शोध का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन 1897 में ब्रिटिश चिकित्सक सर रोनाल्ड रॉस (Sir Ronald Ross) ने पाया कि मादा मच्छर मनुष्यों के बीच मलेरिया का संचार करती हैं। कहा जाता है कि किसी अन्य आपदा के मुकाबले इंसानों को सबसे अधिक नुकसान मच्छरों ने पहुंचाया है। *🐝🐝इतिहास और महत्व🐝🐝* आज जब विज्ञान और चिकित्सा का क्षेत्र काफी उन्नत हो गया है ऐसे में अब किसी स्वास्थ्य समस्या का कारण और समाधान का पता लगाना काफी आसान हो गया है। मच्छरों के काटने से होने वाली जानलेवा बीमारी मलेरिया (Malaria) मनुष्यों और अन्य जीवों को प्रभावित करती है। 20 अगस्त, 1897 को सर रोनाल्ड रॉस (Sir Ronald Ross) ने मलेरिया और मच्छरों के बीच की कड़ी की खोज की। तब से इस दिन को विश्व मच्छर दिवस (World Mosquito Day) के रूप में मनाया जाता है जिसका उद्देश्य बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन को द लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (The London School of Hygiene and Tropical Medicine) द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाता है। कार्यक्रम में मलेरिया के बारे में बातचीत और चर्चा आयोजित की जाती है। इस घातक बीमारी के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं। इसके साथ ही सर रॉस और उनके बाद इस काम को आगे बढ़ाने वाले कई अन्य वैज्ञानिकों को भी श्रद्धांजलि दी जाती है। मच्छर दुनिया के सबसे घातक जानवरों की सूची में शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार मच्छर अपनी संक्रामक बीमारियों के कारण दुनिया में दस लाख से अधिक मौतों के कारक हैं। डेंगू, पीला बुखार, एन्सेफलाइटिस कुछ ऐसी बीमारियां हैं जो मच्छरों के कारण होती हैं। विश्व मच्छर दिवस का उद्देश्य इन कीड़ों के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करना है। *🐝🐝मच्छरों के बारे में कुछ तथ्य…🐝🐝* –  मच्छर एक बार में अपने डंक से 0.1 मिलीलीटर तक खून चूस लेते हैं। –  मादा मच्छर की आयु नर मच्छर से कुछ ज्यादा यानी लगभग 2 महीने होती है। –  ये अपने वजन से तीन गुना ज्यादा खून एक बार में चूस पाते हैं। –  मलेरिया से दुनियाभर में प्रतिवर्ष 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है। –  अफ्रीकी देशों में मच्छरजनित बीमारियों से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। 🐝🐝🐝🐝🐝🐝🐝🐝

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jitendra Aug 20, 2019

☘☘🙏🙏स्वस्थ्य रहे निरोग रहों 🙏🙏☘☘परिवार में उत्तम स्वास्थ्य हेतु सभी सदस्य निम्न नियमों का पालन करें। ध्यान रहे ये नियम स्वस्थ व्यक्तियों के लिए दिए जा रहे हैं जिससे उनका स्वास्थ्य अक्षुण्ण बना रहे। रोग की परिस्थिति में नियमों में यथासम्भव बदलाव किया जा सकता हैः- ► सुबह जल्दी उठो और ३- ४ मील (४- ६ किलोमीटर) रोज टहलो। संभव हो तो शाम को भी थोड़ा टहलो। ► भोजन के साथ पानी कम से कम पीओ। दोपहर के भोजन के घंटे भर बाद पानी पियें ।। भोजन यदि कड़ा और रूखा हो तो २- ४ घूंट पानी अवश्य पियें। ► रात्रि जागरण से वात की वृद्धि होती है,जिससे शरीर रुक्ष होता है।बैठे बैठे थोड़ी झपकी लेना स्वास्थ के लिए अच्छा है। ► दिन में 2 बार मुँह में जल भरकर, नैत्रों को शीतल जल से धोना नेत्र दृष्टि के लिए लाभकारी है। ► नहाने से पूर्व, सोने से पूर्व एवं भोजन के पश्चात् मूत्र त्याग अवश्य करना चाहिए। यह आदत आपको कमर दर्द, पथरी तथा मूत्र सम्बन्धी बीमारियों से बचाती है। ► भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए। ► स्वास्थ्य चाहने वाले व्यक्ति को मूत्र, मल, शुक्र, अपानवायु, वमन, छींक, डकार, जंभाई, प्यास, आँसू नींद और परिश्रमजन्य श्वास के वेगों को उत्पन्न होने के साथ ही शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए। ► कुछ लोगों की यह धारणा है कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाना पड़ता है, लेकिन हाल ही में जर्मनी में हुए शोधों से पता चला है कि यह धारणा सही नहीं है। इस शोध के मुताबिक 10 मिनट का व्यायाम भी आपको तरोताजा बनाये रखने के लिए काफी है। हो सकता है कि 10 मिनट के व्यायाम से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम न हो, लेकिन 10 मिनट की एक्सरसाइज आपमें जोश भर देगी और आप सारा दिन खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा यानी 10 मिनट की एक्सरसाइज आपके काम करने की क्षमता को बढ़ायेगी।

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