आध्यात्मिक

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Anil kumar Pandey Jun 26, 2019

🚩🚩।। ऊँ जय गुरूदेवम् ।।🚩🚩 ता-उम्र ऐ गालिब , भूल यही करता रहा । धूल थी चेहरे पर, आइना साफ करता रहा ।। ➖➖➖ होता तो ऐसा ही है , चीज कहीं और रहती है और ढ़ुढ़ते कहीं और हैं । हृदय में ही इतनी गन्दगी भरी पड़ी है कि उसमें रहनें वाले परमात्मा की झलक भी नही दिखाई देती । परिणाम ये कि उसे ढूंढने के लिए वाह्य पूजा-स्थलों का ही चक्कर लोग जीवन भर लगाते रहते हैं । ➖➖➖ जो पल-पल हमारे ही साथ हमारे भीतर मौजुद है और हमें आभास तक नहीं होता , उसको अनुभव करने के लिए हम सभी को अपनी आदतें बदलनी होगी । यदि हमने अपनी आदत नहीं बदलीं तो प्रकृति का परिवर्तनशील नियम एक दिन हमें ही बदल देगी । ➖➖➖ हम खुद को नहीं बदल सके तो लकीरें ही जीवन भर पीटते रह जाएंगे , मिलेगा कुछ भी नहीं । ईश्वर को तो भाग भाग कर पाया नहीं जा सकता । उन्हे पाने के लिए एकदम रूक जाना पड़ेगा और खुद के भीतर अपने ही हृदय में टटोलना और ढुढना पड़ेगा । धूल जब हमारे ही चेहरे पर पड़ी है तो शीशा साफ करके क्या होगा ?....अपना चेहरा ही साफ कर लें तो समस्या खत्म ।

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hari om Jun 26, 2019

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hari om Jun 26, 2019

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