आज_का_भगवद_चिंतन।

अंबरिष Feb 25, 2021

🙏🌹🦚 आज का भगवद् चिंतन🦚🙏🌹 हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है। जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। अन्तत: यश, अपयश, हार, जीत जीवन, मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है। हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। कुछ लोग हमारी सराहना करेंगे, तो कुछ लोग हमारी आलोचना करेंगे। दोनों ही मामलों में हम फायदे में हैं। एक हमें प्रेरित करेगा और दूसरा हमारे भीतर सुधार लाएगा..!! ओम नमो नारायणाय सिद्ध पुरूषाय ब्रह्मीभूत योगीराज हंसतीर्थ स्वामी महाराजाय नमो नमः 🙏🙌परमपूज्य राजाधिराज योगीराज हंसतीर्थ स्वामी महाराज की जय🙌🙏

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Neeru Miglani Sep 13, 2020

*मैंने ईश्वर से कहा.... ✍✍✍ ● *मैंने ईश्वर से कहा -"मेरी सारी बुराइयाँ दूर कर दो !"* *ईश्वर ने कहा -"नहीं !* *वह इसलिये वहाँ नहीं हैं कि मैं उन्हें हटा दूँ। वह इसलिये वहाँ हैं कि तुम स्वयं उनका प्रतिरोध करो।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा -"मेरा शरीर पूर्ण कर दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *तुम्हारी आत्मा पूर्ण है ; तुम्हारा शरीर तो अस्थायी है , उसे मर जाना है , जल जाना है।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे धैर्य दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *धैर्य कठिनाइयों का परिणाम होता है। वह दिया नहीं जाता , सीखा जाता है।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा -"मुझे ख़ुशी दे दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *मैं आशीर्वाद देता हूँ , ख़ुशी स्वयं तुम पर निर्भर करती है।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे दुःख - दर्द से छुटकारा दिला दो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *दुःख तुम्हें संसार से दूर ले जाते हैं और मेरे निकट लाते हैं।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मेरी आत्मा का विकास करो !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *तुम्हें स्वयं विकसित होना है क्योंकि मैं उसी की मदद करता हूँ , जो स्वयं अपनी मदद करते हैं।"* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे ऐसी चीज़ दो कि मुझे ज़िंदगी से प्यार हो जाये !"* *ईश्वर ने कहा - "नहीं !* *तुम मुझमें दिल लगाओ , ताकि तुम सत, , चित्त और आनंद की अनुभूति कर सको !"* *"प्रार्थना भीख माँगना नहीं है।"* साधना प्रारंभ करने के साथ जब हृदय में 'विवेक' जागता है , तब उपरोक्त ☝️प्रार्थना धीरे - धीरे यह 👇स्वरूप लेने लगती हैं....* ● *मैंने ईश्वर से कहा - "मुझे बिल्कुल अपने जैसा बना दो , ताकि मैं भी औरों से वैसे ही प्रेम कर सकूँ , जैसा आप सबसे करते हैं !"* *ईश्वर ने कहा -"ओह !* *तो आख़िर तुम्हारे अंदर यह 'विवेक' पैदा हो ही गया कि यदि तुम मेरी भाँति पूर्ण बनते हो तो तुम भी औरों से वैसे ही प्रेम कर सकोगे , जैसा मैं सबसे करता हूँ।"* ● *अंततः मैंने ईश्वर से कहा- "हे नाथ !* *तू ही मनुष्य जीवन का वास्तविक ध्येय है।* *हम अपनी इच्छाओं के गुलाम हैं ,* *जो हमारी उन्नति में बाधक है।* *तू ही एकमात्र ईश्वर एवं शक्ति है ,* *जो हमें उस लक्ष्य तक ले चल सकता है।* *ईश्वर ने गदगद होकर कहा -"हाँ , यह मैं अव श्य करूँगा मेरे बच्चे !* *क्योंकि मुझसे ऐसी निः स्वार्थ अपेक्षा रखना तुम्हारा जन्म- सिद्ध अधिकार है और उसे पूरा करना मेरा परम् कर्तव्य !" ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳

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Neeru Miglani Jan 8, 2020

राधे राधे ॥ आज का भगवद चिन्तन॥ प्रकृति अपने नियम से कभी नहीं चूकती। अगर पौधे को आप पानी देते हैं तो वह स्वत: हरा भरा रहेगा और यदि आपने उसकी उपेक्षा शुरू की तो उसे मुरझाने में भी वक्त नहीं लगने वाला है। जिन लोगों ने इस दुनिया को स्वर्ग कहा उनके लिए यही प्रकृति उनके अच्छे कार्यों से स्वर्ग बन गई और जिन लोगों ने गलत काम किये उनके लिए यही प्रकृति, यही दुनिया नरक बन गई। यहाँ खुशबू उनके लिए स्वत: मिल जाती है जो लोग फूलों की खेती किया करते हैं और यहाँ मीठे फल उन्हें स्वत: मिल जाते हैं जो लोग पेड़ लगाने भर का परिश्रम कर पाते हैं। अत: यहाँ चाहने मात्र से कुछ नहीं प्राप्त होता जो भी और जितना भी आपको प्राप्त होता है वह निश्चित ही आपके परिश्रम का और आपके सदकार्यों का पुरुस्कार होता है। ⛳||जय श्री कृष्णा ||⛳

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Neeru Miglani Mar 18, 2020

राधे राधे ॥ आज का भगवद चिन्तन ॥ पदार्थों में समस्या नहीं है हमारे उपयोग करने में समस्या है। कभी-कभी विष की एक अल्प मात्रा भी दवा का काम करती है और दवा की अत्याधिक मात्रा भी विष बन जाती है। विवेक से, संयम से, जगत का भोग किया जाये तो कहीं समस्या नहीं है। संसार का विरोध करके कोई इससे मुक्त नहीं हुआ। बोध से ही इससे ज्ञानीजनों ने पार पाया है। संसार को छोड़ना नहीं, बस समझना है। परमात्मा ने पेड़-पौधे, फल-फूल, नदी, वन, पर्वत, झरने और ना जाने क्या- क्या हमारे लिए नहीं बनाया ? हमारे सुख के लिए, हमारे आनंद के लिए ही तो सबकी रचना की है। संसार की निंदा करने वाला अप्रत्यक्ष में भगवान् की ही निंदा कर रहा है। किसी चित्र की निंदा चित्र की नहीं अपितु चित्रकार की ही निंदा तो मानी जाएगी। हर चीज भगवान् की है, कब, कैसे, कहाँ, क्यों और किस निमित्त उसका उपयोग करना है यह समझ में आ जाये तो जीवन को महोत्सव बनने में देर ना लगेगी। ⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳ 🙏🌿||ऊँ गं गणपतये नमः||🌿🙏

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