आज का स्पेशल

Anju Mishra Sep 16, 2019

🙏🌹जय श्री कृष्णा 🌹🙏 जय श्री सीताराम 🌹🙏 श्राद्ध पक्ष -: 16 दिनों की हर तिथि में छुपा है राज, हर श्राद्ध से मिलता है खास आशीर्वाद 🌹🙏हर हर महादेव 🙏🌹 पितृ प्रार्थना : हे प्रभु मैंने अपने हाथ आपके समक्ष फैला दिए हैं, मैं अपने पितरों की मुक्ति के लिए आपसे प्रार्थना करता हूं, मेरे पितर मेरी श्रद्धा भक्ति से संतुष्ट हो’। ऐसा करने से व्यक्ति को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।  आइए जानें हर तिथि का महत्व  जो पूर्णमासी के दिन श्राद्धादि करता है उसकी बुद्धि, पुष्टि, स्मरणशक्ति, धारणाशक्ति, पुत्र-पौत्रादि एवं ऐश्वर्य की वृद्धि होती। वह पर्व का पूर्ण फल भोगता है। प्रतिपदा धन-सम्पत्ति के लिए होती है एवं श्राद्ध करनेवाले की प्राप्त वस्तु नष्ट नहीं होती। द्वितीया को श्राद्ध करने वाला व्यक्ति राजा होता है। तृतीया उत्तम अर्थ की प्राप्ति के अभिलाषी को  विहित है। चतुर्थी शत्रुओं का नाश करने वाली और पाप नाशिनी है। पंचमी तिथि को श्राद्ध करने वाला उत्तम लक्ष्मी की प्राप्ति करता है। जो षष्ठी तिथि को श्राद्धकर्म संपन्न करता है उसकी पूजा देवता लोग करते हैं। जो सप्तमी को श्राद्धादि करता है उसको महान यज्ञों के पुण्यफल प्राप्त होते हैं और वह गणों का स्वामी होता है। जो अष्टमी को श्राद्ध करता है वह सम्पूर्ण समृद्धियां प्राप्त करता है। नवमी तिथि को श्राद्ध करने वाला प्रचुर ऐश्वर्य एवं मन के अनुसार अनुकूल चलने वाली स्त्री को प्राप्त करता है। दशमी तिथि को श्राद्ध करने वाला मनुष्य ब्रह्मत्व की लक्ष्मी प्राप्त करता है। एकादशी का श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ दान है। वह समस्त वेदों का ज्ञान प्राप्त कराता है। उसके सम्पूर्ण पापकर्मों का विनाश हो जाता है तथा उसे निरंतर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। द्वादशी तिथि के श्राद्ध से राष्ट्र का कल्याण तथा प्रचुर अन्न की प्राप्ति कही गई है। त्रयोदशी के श्राद्ध से संतति, बुद्धि, धारणाशक्ति, स्वतंत्रता, उत्तम पुष्टि, दीर्घायु तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

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Neha Sharma Sep 16, 2019

*ओम् नमः शिवाय*🌹🌹🙏 *शुभ प्रभात*🌹🌹🙏 *भगवान शिव जन्म-मृत्यु से परे हैं। वे स्वयं ही जन्म-मृत्यु के निर्माता हैं। कालचक्र भी गतिशील होने के लिए उनके आदेश की प्रतीक्षा करता है। सृष्टि का निर्माण और विलय शिव सबसे बड़ा रहस्य है जिसे भगवान शिव ही जानते हैं।* *एक बार मां पार्वती ने शिवजी से सृष्टि के निर्माण और भगवान की अमरता का रहस्य पूछा। मां पार्वती की जिज्ञासा देखकर भगवान भोलेनाथ उन्हें यह रहस्य बताना चाहते थे।* *शास्त्राें में इसे अमर कथा कहा जाता है। शिवजी अमर कथा के लिए एक ऐसे स्थान की तलाश करने लगे जो पूर्णतः गुप्त हो और वहां कोई इसे सुन न सके, क्योंकि जो भी व्यक्ति इस कथा को सुन लेता वह अमर हो सकता था।* *तब भोलेनाथ ने एक गुफा में पार्वती को अमर कथा सुनाई। इसमें सृष्टि का आदि और अंत सबकुछ बताया। यह सृष्टि का सबसे बड़ा रहस्य था।* *कहते हैं कि बीच में मां पार्वती को निद्रा आ गई परंतु शिवजी कथा सुनाते रहे। उस समय गुफा में दो सफेद कबूतर भी थे। वे भगवान भोलेनाथ से यह कथा सुनते रहे। कबूतर बीच-बीच में अपनी ध्वनि से यह जता रहे थे कि कोई उनकी कथा सुन रहा है। इस प्रकार उन्होंने शिवजी से संपूर्ण कथा सुन ली।* *कथा समाप्ति के बाद जब शिवजी ने देखा कि पार्वतीजी तो सो रही हैं.. फिर कथा कौन सुन रहा था? तब उन्हें दोनों कबूतर दिखाई दिए। शिवजी उनका वध करना चाहते थे क्योंकि उनके अमर हो जाने से सृष्टि का संतुलन बिगड़ सकता था।* *इस पर कबूतरों ने उनसे कहा, हे भोलेनाथ, जीवन-मृत्यु के दाता तो आप ही हैं परंतु अगर आप हमें मार देंगे तो आपकी अमर कथा का महत्व समाप्त हो जाएगा। वह असत्य सिद्ध हो जाएगी।* *यह सुनकर शिवजी ने उन्हें प्राणदान दे दिया। कहते हैं कि वे कबूतर आज भी अमर हैं और शिव की कृपा से सदैव अमर रहेंगे। कई श्रद्धालुओं ने उन्हें देखने का भी दावा किया है।* *कितनी पुरानी है गुफा*..... *श्रीनगर से करीब 141 किमी की दूरी पर स्थित अमरनाथ गुफा हजारों वर्ष पुरानी है। ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि यह महाभारत काल से भी ज्यादा प्राचीन है। यह प्राकृतिक गुफा है और इसमें स्वतः बर्फ का शिवलिंग बनता है जो विश्व में अपनी तरह का अनूठा शिवलिंग है।* *यहां आसपास के इलाके में बर्फ गिरती है लेकिन वह भुरभरी होती है जबकि निर्धारित स्थान पर हर साल बनने वाला शिवलिंग बिल्कुल ठोस बर्फ से बनता है। कश्मीर में बहुत प्राचीन काल से ही इस शिवलिंग के प्रति लोगों में गहरी श्रद्धा रही है। कल्हण के ग्रंथ राजतरंगिनी द्वितीय में इसका वर्णन किया गया है। इसके अलावा यहां के राजा भी शिवजी के भक्त रहे हैं।*

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