अष्टमुखी_श्रीपशुपतिनाथ_महादेव

७५ साल पहले शिवना की कोख से निकले थे पशुपतिनाथ, १५०० साल पुरानी है प्रतिमा अष्टमुखी पशुपतिनाथ की प्रतिमा का सौंदर्य अपने-आप में अनूठा है। नेपाल के पशुपतिनाथ में चार मुख की प्रतिमा है, जबकि मंदसौर में प्रतिमा अष्टमुखी है। 75 बरस पहले शिवना की कोख से निकली प्रतिमा विश्व प्रसिद्ध है। 19 जून 1940 को शिवना नदी से बाहर आने के बाद 21 साल तक भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा नदी के तट पर ही रखी रही। प्रतिमा को सबसे पहले स्व. उदाजी पुत्र कालू जी धोबी ने चिमन चिश्ती की दरगाह के सामने नदी के गर्भ में दबी अवस्था में देखा था। प्रतिमा को नदी से बाहर निकलने के बाद चैतन्य आश्रम के स्वामी प्रत्याक्षानंद महाराज ने 23 नवंबर 1961 को इसकी प्राण प्रतिष्ठा की। 27 नवंबर को मूर्ति का नामकरण पशुपतिनाथ कर दिया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण हुआ। सावन में यहां एक लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। मुख्य आकर्षण पूरे माह होने वाला मनोकामना अभिषेक है। 101 फीट ऊंचे मंदिर के शिखर पर 100 किलो वजनी कलश स्थापित है, जिस पर 51 तोला सोने की परत चढ़ाई गई है। प्रतिमा का इतिहास माना जाता है कि प्रतिमा का निर्माण विक्रम संवत 575 ई. में सम्राट यशोधर्मन की हूणों पर विजय के आसपास का है। संभवत: मूर्तिभंजकों से रक्षा के लिए इसे शिवना नदी में दबा दिया गया था। अनुमान के अनुसार अज्ञात कलाकार ने प्रतिमा के ऊपर के चार मुख पूरी तरह बना दिए थे, जबकि नीचे के चार मुख निर्माणाधीन थे। ऐसी है प्रतिमा पशुपतिनाथ की तुलना काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ से की जाती है। मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ प्रतिमा अष्टमुखी है। जबकि नेपाल स्थित पशुपतिनाथ चारमुखी हैं। प्रतिमा में बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था व वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं। इसमें चारों दिशाओं में एक के ऊपर एक दो शीर्ष हैं। प्रतिमा में गंगावतरण जैसी दिखाई देने वाली सफेद धारियां हैं। प्रतिमा की विशेषता : मुख- 08, ऊंचाई - 7.3 फीट, गोलाई - 11.3 फीट, वजन - 64065 किलो 525 ग्राम। अष्टमुख की विशेषता प्रतिमा के आठों मुखों का नामांकरण भगवान शिव के अष्ट तत्व के अनुसार है। हर मुख के भाव व जीवन काल भी अलग-अलग हैं। 1 - शर्व, 2 - भव, 3 - रुद्र, 4 - उग्र, 5 - भीम, 6 - पशुपति, 7 - ईशान और 8 महादेव।

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