🎎🐚गणेश जी ने किसे दिया था गीता का ज्ञान🐚🎎 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 💐🐚🚩ॐ श्री गणेशाय नमः🚩🐚💐 ✳️🌲🌹शुभ बुधवार🌹🌲✳️ 🌺🌲🌻सुप्रभात🌻🌲🌺 🌻दिनांक :-- 13 -11 -2019 🙏गणेश जी की कृपा से आपका बुधवार के दिन शुभ और मंगलमय हो🙏 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 🎎गणेश जी ने किसे दिया था गीता का ज्ञान🎎 🌹 श्री कृष्ण ने महाभारत में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. यह तो हम सब जानते हैं, 💐 पर क्या आप यह जानते हैं कि शिव पुत्र गणेश ने भी किसी को गीता का ज्ञान दिया था. आइये जानते हैं कि गणेश जी ने किसे गीता का उपदेश दिया. ⚛️ श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का पाठ पढ़ाया था. गीता का एक उपदेश गणपति ने भी किसी को दिया था. दोनों के उपदेश में लगभग सारे विषय समान ही थे. कुछ अलग था तो वह उनके मन की स्थ‍िति और परिस्थि‍ति थी. 🎪 महाभारत में जहां श्रीकृष्ण अर्जुन को उनका कर्तव्य याद दिलाया था, वहीं गणेश गीता में गणपति ने यह उपदेश युद्ध के बाद राजा वरेण्य को दिया था. 🌹क्या कहा था गणेश जी ने गीता में🌹 ******************************* 🐚'गणेशगीता' के 11 अध्यायों में 414 श्लोक हैं.🐚 गणेशगीता के पहले अध्याय 'सांख्यसारार्थ' में गणपति ने राजा वरेण्य को योग का उपदेश दिया और शांति का मार्ग बतलाया. 💐इसके दूसरे अध्याय में गणेश जी ने राजा को कर्म के मर्म का उपदेश दिया. इस अध्याय का नाम है 'कर्मयोग' 💮 तीसरे अध्याय में गणेश जी ने राजा वरेण्य को अपने अवतार धारण करने का रहस्य बताया. 🍑 गणेशगीता में योगाभ्यास तथा प्राणायाम से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण बातें बतलाई गई हैं. 🥀 छठे अध्याय 'बुद्धियोग' में भगवान गणपति राजा वरेण्य को समझाते हैं कि अपने सत्कर्म के प्रभाव से ही मनुष्य में ईश्वर को जानने की इच्छा जागृत होती है. जिसका जैसा भाव होता है, उसके अनुरूप ही मैं उसकी इच्छा पूर्ण करता हूं. अंतकाल में भगवान को पाने की इच्छा करने वाला भगवान में ही लीन हो जाता है. मेरे तत्व को समझने वाले भक्तों का योग-क्षेम मैं स्वयं वहन करता हूं. 🎎 गणेशगीता में भक्तियोग का वर्णन भी है. इसमें भगवान गणेश ने राजा वरेण्य को अपने विराट रूप का दर्शन कराया. 🎭 नौवें अध्याय में क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का ज्ञान तथा सत्व, रज, तम तीनों गुणों का परिचय दिया गया है. ⚛️ दसवें अध्याय में दैवी, आसुरी और राक्षसी तीनों प्रकार की प्रकृतियों के लक्षण बतलाए गए हैं. इस अध्याय में गजानन कहते हैं कि काम, क्रोध, लोभ और दंभ ये चार नरकों के महाद्वार हैं, अत: इन्हें त्याग देना चाहिए तथा दैवी प्रकृति को अपनाकर मोक्ष पाने का यत्न करना चाहिए. 🚩अंतिम ग्यारहवें अध्याय में कायिक, वाचिक तथा मानसिक भेद से तप के तीन प्रकार बताए गए हैं. 💐 गणेशगीता का ज्ञान पाने के बाद राजा वरेण्य राजगद्दी त्यागकर वन में चले गए. वहां उन्होंने गणेशगीता में कथित योग का आश्रय लेकर मोक्ष पा लिया. 🌹 गणेशगीता में लिखा है कि जिस प्रकार जल, जल में मिलने पर जल ही हो जाता है, उसी तरह श्रीगणेश का चिंतन करते हुए राजा वरेण्य भी ब्रह्मालीन हो गए. 🚩🐚🌺ॐ गणपतये नमः🌺🐚🚩 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔

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🕉🚩💐ॐ गणपतये नमः💐🚩🕉 🔱🌿🌹ॐ नमः शिवाय🌹🌿🔱 🍑🌿🌷जय श्री कृष्ण🌷🌿🍑 🌋🌲🌸शुभ बुधवार🌸🌲🌋 🌻🐚💠सुप्रभात💠🐚🌻 🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋🎋 🎎॥ सिद्धि विनायक मंत्र ॥ 🎎 ************************* 🌹ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रे सर्व विघ्न प्रशमनाय सर्व राज्य वश्यकरणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा ।।🌹 🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋 👏हे भगवान गणेश आप हमारे हर क्षेत्र में सफलता ले आएं , यही मै कामना करता हूँ । आप को मेरा बारम्बार प्रणाम 🙏 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 🎭आप और आपके पूरे परिवारपर सिद्धि विनायक💐 🏵दुखहर्ता गणपति महाराज की कृपा दृष्टि सदा 🌺 👏 बनी रहे और सभी मनोकामना पूर्ण हो 🌸 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🌹आपका बुधवार के दिन शुभ गणेशमय 🎡 🍑शांतिमय अतिसुन्दर और मंगलमय हो🙏 🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂 🕉🚩💐 ॐ वक्रतुण्डाय नमः 💐🚩 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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🎎🌲🐚पापकुंशी एकादशी 🐚🌲🎎 🚩🌿🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🌿🚩 🚩🐚🔔ॐ गणपतये नमः🔔🐚🚩 🌋🌿🍑शुभ बुधवार🍑🌿🌋 💐🌲🌻सुप्रभात🌻🌲💐 🎨 दिनांक :- 9-10-19 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 🎎 पापकुंशी एकादशी :-- ********************* 🚩 आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी दशहरे के बाद आने वाली एकादशी को होता है पापांकुशा एकादशी व्रत। इस एकादशी का नाम पापकुंशी इसलिए पड़ क्योंकि इस दिन व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। 🐚 इस एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। पापरूपी हाथी को इस व्रत के पुण्यरूपी अंकुश से वेधने के कारण इसका नाम पापांकुशा एकादशी हुआ। इस व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। रात्रि जागरण कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। रात्रि में भगवान विष्णु की मूर्ति के समीप ही शयन करना चाहिए। द्वादशी तिथि को सुबह ब्राह्माणों को अन्न का दान और दक्षिणा देने के बाद यह व्रत समाप्त किया जाता है। इस व्रत से एक दिन पहले दशमी के दिन गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल तथा मसूर का सेवन नहीं करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से व्रती, बैकुंठ धाम प्राप्त करता है। 🎎 कथा :- 🎭 एक समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था। वह बड़ा क्रूर था। उससे बहुत से पाप हुए थे। जब उसकी मृत्यु का समय नजदीक आया तो वह महर्षि महर्षि अंगिरा के आश्रम में गया। उसने महर्षि से प्रार्थना की कि मुझसे जीवन में बहुत पाप हुए हैं। हमेशा लोगों की बुरा किया है। इसलिए अब कोई ऐसा उपाय है जिससे मैं अपने सारे पाप धो सकूं और मोक्ष को प्राप्त करूं। 👏 उसकी प्रार्थना पर हर्षि अंगिरा ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करके को कहा। महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया। 🚩🌲🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🌲🚩 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

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🎎🌲🐚पापकुंशी एकादशी 🐚🌲🎎 🚩🌿🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🌿🚩 🚩🐚🔔ॐ गणपतये नमः🔔🐚🚩 🌋🌿🍑शुभ बुधवार🍑🌿🌋 💐🌲🌻सुप्रभात🌻🌲💐 🎨 दिनांक :- 9-10-19 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 🎎 पापकुंशी एकादशी :-- ********************* 🚩 आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी दशहरे के बाद आने वाली एकादशी को होता है पापांकुशा एकादशी व्रत। इस एकादशी का नाम पापकुंशी इसलिए पड़ क्योंकि इस दिन व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। 🐚 इस एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। पापरूपी हाथी को इस व्रत के पुण्यरूपी अंकुश से वेधने के कारण इसका नाम पापांकुशा एकादशी हुआ। इस व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। रात्रि जागरण कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। रात्रि में भगवान विष्णु की मूर्ति के समीप ही शयन करना चाहिए। द्वादशी तिथि को सुबह ब्राह्माणों को अन्न का दान और दक्षिणा देने के बाद यह व्रत समाप्त किया जाता है। इस व्रत से एक दिन पहले दशमी के दिन गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल तथा मसूर का सेवन नहीं करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से व्रती, बैकुंठ धाम प्राप्त करता है। 🎎 कथा :- 🎭 एक समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था। वह बड़ा क्रूर था। उससे बहुत से पाप हुए थे। जब उसकी मृत्यु का समय नजदीक आया तो वह महर्षि महर्षि अंगिरा के आश्रम में गया। उसने महर्षि से प्रार्थना की कि मुझसे जीवन में बहुत पाप हुए हैं। हमेशा लोगों की बुरा किया है। इसलिए अब कोई ऐसा उपाय है जिससे मैं अपने सारे पाप धो सकूं और मोक्ष को प्राप्त करूं। 👏 उसकी प्रार्थना पर हर्षि अंगिरा ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करके को कहा। महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया। 🚩🌲🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🌲🚩 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

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🌸🌲🎎शुभ गणेश उत्सव🎎🌲🌸 🐚🌿🌹ॐ गणपतये नमः🌹🌿🐚 🌋🌿🌷जय श्री कृष्ण🌷🌿🌋 🏵🌳🌻शुभ बुधवार🌻🌳🏵 🎐🍀🌋शुभसंध्या🌋🍀🎐 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 🐚प्रथम पूज्यनी भगवान श्री गणेश जी आप सभी की मनोकामना पूर्ण करे और आपका बुधवार का संध्या काल शुभ और मंगलमय हो🙏 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 ********************************************* 🎎 कैसे गणेशजी की सवारी बना चूहा ,जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथा :- ********************************************* 🐚आज गणेश चतुर्थी का त्यौंहार पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा हैं। सभी भक्तगण अपने घरों में गणपति जो को स्थापित करते हैं और उनकी सेवा करते है। आज के दिन गणेश जी के साथ उनकी सवारी मूषक अर्थात चूहा भी रखा जाता हैं जो कि बहुत ही शुभ माना जाता हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर चूहा कैसे गणपति जी की सवारी बना। आज हम आपको इससे जुड़ी पौराणिक कथा की जानकारी देने जा रहे हैं कि किस तरह चूहा गणेश जी की सवारी बना। 🎭बहुत समय की बात है, एक बहुत ही भयंकर असुरों का राजा था – गजमुख। वह बहुत ही शक्तिशाली बनना और धन चाहता था। वह साथ ही सभी देवी-देवताओं को अपने वश में करना चाहता था इसलिए हमेशा भगवान् शिव से वरदान के लिए तपस्या करता था। शिव जी से वरदान पाने के लिए वह अपना राज्य छोड़ कर जंगल में जा कर रहने लगा और शिवजी से वरदान प्राप्त करने के लिए, बिना पानी पिए भोजन खाए रातदिन तपस्या करने लगा। 🎎कुछ साल बीत गए, शिवजी उसके अपार तप को देखकर प्रभावित हो गए और शिवजी उसके सामने प्रकट हुए। शिवजी नें खुश हो कर उसे दैविक शक्तियाँ प्रदान किया जिससे वह बहुत शक्तिशाली बन गया। सबसे बड़ी ताकत जो शिवजी नें उसे प्रदान किया वह यह था की उसे किसी भी शस्त्र से नहीं मारा जा सकता। असुर गजमुख को अपनी शक्तियों पर गर्व हो गया और वह अपने शक्तियों का दुर्पयोग करने लगा और देवी-देवताओं पर आक्रमण करने लगा। 🎭मात्र शिव, विष्णु, ब्रह्मा और गणेश ही उसके आतंक से बचे हुए थे। गजमुख चाहता था की हर कोई देवता उसकी पूजा करे। सभी देवता शिव, विष्णु और ब्रह्मा जी के शरण में पहुंचे और अपनी जीवन की रक्षा के लिए गुहार करने लगे। यह सब देख कर शिवजी नें गणेश को असुर गजमुख को यह सब करने से रोकने के लिए भेजा। 🐚गणेश जी नें गजमुख के साथ युद्ध किया और असुर गजमुख को बुरी तरह से घायल कर दिया। लेकिन तब भी वह नहीं माना। उस राक्षक नें स्वयं को एक मूषक के रूप में बदल लिया और गणेश जी की और आक्रमण करने के लिए दौड़ा। जैसे ही वह गणेश जी के पास पहुंचा गणेश जी कूद कर उसके ऊपर बैठ गए और गणेश जी ने गजमुख को जीवन भर के मुस में बदल दिया और अपने वाहन के रूप में जीवन भर के लिए रख लिया। बाद में गजमुख भी अपने इस रूप से खुश हुआ और गणेश जी का प्रिय मित्र भी बन गया। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🚩🐚🌹जय श्री गणेश🌹🐚🚩 🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐🎐

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