प्रभु का चिंतन तभी संभव होता है जब हमारा ध्‍यान हमारी चिंता से हटता है क्‍योंकि खुद की चिंता और प्रभु का चिंतन एक समय में एक साथ हो ही नहीं सकते ।
हरि बोलो

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Shai Radha krishan mundir

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