श्री जगन्नाथ मंदिर

Puri, Odisha, India

Chapter - 01,  Serial No  381 –385

हमारे जीवन के एकमात्र केंद्र हमारे प्रभु हो जाने चाहिए ।

हमें जीवन में केवल प्रभु को ही रिझाना चाहिए ।

मेरे आश्रय तो केवल मेरे प्रभु ही हैं यह भावना मन में होनी चाहिए और अन्य सारे आश्रयों का मन से त्याग हो जान...

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Chapter - 01,  Serial No  376 –380

एक प्रभु के प्रेम के अतिरिक्त मुझे और कुछ भी नहीं चाहिए इतनी तैयारी जिसकी हो गई उसके लिए प्रभु के दरवाजे तत्काल खुल जाते हैं ।

भक्तिरस में तल्लीन होने के कारण पूजा छूट भी जाये तो भी प्रभु उसका पूरा फल दे देते ह...

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Chapter - 01,  Serial No  111 –115

हमारा किया हुआ भक्ति का साधन हमें प्रभु की कृपा दिलवा कर ही रहता है ।

हमें संसार के किसी संबंध को अपना नहीं मानना चाहिए, केवल प्रभु के साथ ही अपना संबंध को सनातन मानना चाहिए ।

प्रभु की लीलाओं का नित्य चिंतन जी...

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लेख सार : हम प्रभु से प्रार्थना कुछ मांगने के लिए या किसी डर से उबरने के लिए करते हैं । बल्कि सच्‍ची प्रार्थना प्रभु के प्रिय बनने के लिए होनी और प्रभु को अपना प्रिय बनाने के लिए होनी चाहिए । यही प्रार्थना का शिखर है । पूरा लेख नीचे पढ़े -

हर धर्...

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