श्री हनुमान बडवानल स्तोत्र....... हनुमानजी की प्रार्थना में तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बहुक आदि अनेक स्तोत्र लिखे, लेकिन हनुमानजी की पहली स्तुति किसने की थी? तुलसीदासजी के पहले भी कई संतों और साधुओं ने हनुमानजी की श्रद्धा में स्तुति लिखी है। जब हनुमानजी लंका का दहन कर रहे थे तब उन्होंने अशोक वाटिका को इसलिए नहीं जलाया, क्योंकि वहां सीताजी को रखा गया था। दूसरी ओर उन्होंने विभीषण का भवन इसलिए नहीं जलाया, क्योंकि विभीषण के भवन के द्वार पर तुलसी का पौधा लगा था। भगवान विष्णु का पावन चिह्न शंख, चक्र और गदा भी बना हुआ था। सबसे सुखद तो यह कि उनके घर के ऊपर 'राम' नाम अंकित था। यह देखकर हनुमानजी ने उनके भवन को नहीं जलाया। विभीषण के शरण याचना करने पर सुग्रीव ने श्रीराम से उसे शत्रु का भाई व दुष्ट बताकर उनके प्रति आशंका प्रकट की और उसे पकड़कर दंड देने का सुझाव दिया। हनुमानजी ने उन्हें दुष्ट की बजाय शिष्ट बताकर शरणागति देने का अनुरोध किया था, जिसे प्रभु राम ने स्वीकार कर लिया था। विभीषण ने हनुमानजी की स्तुति में एक स्तोत्र की रचना की है। विभीषण द्वारा रचित इस स्तोत्र को 'हनुमान वडवानल स्तोत्र' कहते हैं। यह स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, शत्रुनाश, दूसरों के द्वारा किये गये पीड़ा कारक कृत्या अभिचार के निवारण, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है। विधि.. सरसों के तेल का दीपक जलाकर 108 पाठ नित्य 41 दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है। विनियोग:- ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषि:, श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं, मम समस्त विघ्न-दोष निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे सकल- राज- कुल- संमोहनार्थे, मम समस्त- रोग प्रशमनार्थम् आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त- पाप-क्षयार्थं श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये। ध्यान:- मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ।। वडवानल स्तोत्र:- ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम सकल- दिङ्मण्डल- यशोवितान- धवलीकृत- जगत-त्रितय वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र उदधि-बंधन दशशिर: कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार- ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद सर्व- पाप- ग्रह- वारण- सर्व- ज्वरोच्चाटन डाकिनी- शाकिनी- विध्वंसन ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दु:ख निवारणाय ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर, माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्र: आं हां हां हां हां ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु शिर:-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय नागपाशानन्त- वासुकि- तक्षक- कर्कोटकालियान् यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा । उपरोक्त हनुमद वडवानल स्तोत्र का निरंतर एक से ग्यारह पाठ करने से सभी समस्याओं का हल निश्चित मिलता है।

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मरघट वाले बाबा 🚩 हनुमान मंदिर दिल्ली के जमुना बाजार में स्थित है जो मरघट वाले बाबा हनुमान के नाम से प्रसिद्ध है। दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास विराजित हनुमान जी के दर्शन को दिल्ली के हजारों लोग प्रतिदिन आते हैं। मंदिर के बारें में बताया जाता है कि यहां भगवान हनुमान साक्षात प्रकट हुए थे इस मंदिर का इतिहास यह है कि जब भगवान हनुमान लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी का पहाड़ लेकर लंका जा रहे थे तो वह दिल्ली के इसी स्थान पर कुछ देर के लिए ठहरे थे। इस मंदिर का नाम मरघट वाले बाबा हनुमान मंदिर इस वजह से विख्यात हुआ, क्योंकि हनुमान जब पहाड़ लेकर जा रहे थे तो उन्होंने नीचे यमुना नदी को बहते हुए देखा और यमुना जी के किनारे कुछ देर के लिए हनुमान जी आराम करना चाहा। लेकिन जब हनुमान नीचे उतरे तो उन्होंने देखा कि यहां तो शमशान घाट है और उनके यहां उतरने से बुरी आत्माओं में हाहाकार मच गया था। यहां उस समय हनुमान की उपस्थिति ने सभी आत्माओं को मुक्ति प्रदान की थी। साथ ही साथ जब भगवान हनुमान ने माता यमुना जी के दर्शन किये तो तब यमुना जी ने भी हनुमान जी को बोला कि आपके दर्शन करने में हर साल आया करुंगी और यहां आपका एक शक्तिशाली मंदिर होगा। हर साल यमुना नदी का जल स्तर बढ़कर मंदिर तक आता है। निर्माण कार्य होने के बाद यमुना जी की धारा मंदिर तक नहीं आ पाई लेकिन यहां के साधुओं का कहना है कि कुछ सालों के अंतराल बाद यहां बाढ़ आती ही आती है और जब यमुना जी का हनुमान जी के दर्शन करने का मन होता है तो वह विशाल रूप लेकर मदिर में आ जाती हैं। मंदिर के सामने आज भी शमशान घाट है और जो आत्मा यहां अंतिम यात्रा में आती है उसे बाबा हनुमान जी पार लगाते हैं।

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"राम कहने से तर जाओगे मीठे बोल बोलो संवर जाओगे - शुभ दिन हो आपका राम कहने से तर जाओगे मीठे बोल बोलो संवर जाओगे, सब की अपनी जिंदगी है यहाँ कोई किसी का नही खाता है, जो दोगे औरों को वही वापस लौट कर आता है। तेरा मेरा करते एक दिन चले जाना है जो भी कमाया यही रह जाना है कर ले कुछ अच्छे कर्म साथ यही तेरे जाना है, रोने से तो आंसू भी पराये हो जाते हैं, लेकिन दो मीठे बोल बोलने और मुस्कुराने से पराये भी अपने हो जाते हैं। इंसानियत दिल में होती है, हैसियत में नही उपर वाला कर्म देखता है वसीयत नही, मीठा बोलो कटु बोलना मत सीखो, बता सको तो राह बताओ पथ भटकाना मत सीखो, हंसा सको तो सबको हँसाना किसी पर हँसाना मत सीखो। जिस दिन आप अपनी हँसी के मालिक ख़ुद बन जाओंगे तब आपको कोई भी नहीं रुला सकता। सहारे इंसान को खोखला कर देते है और उम्मीदें कमज़ोर कर देती है अपनी ताकत के बल पर जीना शुरू कीजिए आपका आपसे अच्छा साथी और हमदर्द कोई नही हो सकता।" - राम नाम कहने से तर जाओगे मीठे बोल बोलो संवर जाओगे - शुभ संध्या वंदन 👣 🌄 🎪 🌷 हो आपका शुभ मंगलवार सबका मंगल हो जय श्री राम 👏 जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी

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"राम कहने से तर जाओगे मीठे बोल बोलो संवर जाओगे - शुभ दिन हो आपका राम कहने से तर जाओगे मीठे बोल बोलो संवर जाओगे, सब की अपनी जिंदगी है यहाँ कोई किसी का नही खाता है, जो दोगे औरों को वही वापस लौट कर आता है। तेरा मेरा करते एक दिन चले जाना है जो भी कमाया यही रह जाना है कर ले कुछ अच्छे कर्म साथ यही तेरे जाना है, रोने से तो आंसू भी पराये हो जाते हैं, लेकिन दो मीठे बोल बोलने और मुस्कुराने से पराये भी अपने हो जाते हैं। इंसानियत दिल में होती है, हैसियत में नही उपर वाला कर्म देखता है वसीयत नही, मीठा बोलो कटु बोलना मत सीखो, बता सको तो राह बताओ पथ भटकाना मत सीखो, हंसा सको तो सबको हँसाना किसी पर हँसाना मत सीखो। जिस दिन आप अपनी हँसी के मालिक ख़ुद बन जाओंगे तब आपको कोई भी नहीं रुला सकता। सहारे इंसान को खोखला कर देते है और उम्मीदें कमज़ोर कर देती है अपनी ताकत के बल पर जीना शुरू कीजिए आपका आपसे अच्छा साथी और हमदर्द कोई नही हो सकता।" - राम कहने से तर जाओगे मीठे बोल बोलो संवर जाओगे - शुभ दिन हो आपका जय श्री राम 👏 जय श्री हनुमान जी नमस्कार 🙏 शुभ प्रभात 👣 🌅 🙏 वंदन नमस्कार 🙏

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धार्मिक समाचार 👍🚩 "कोर्ट में हुआ सिद्ध, मंदिर तोड़ हुआ था बाबरी मस्जिद का निर्माण! Talentedindia 20 Aug. 2019 14:54 रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद (Ramjanmabhoomi-Babri Masjid) विवाद पर आज शीर्ष न्यायालय (Supreme court) में फिर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान यह दावा किया गया कि बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) का निर्माण राम भगवान के मंदिर को तोड़कर किया गया था। साथ ही इसके कई सबूत भी पेश किए गए, जिसके बाद यह कहा जा रहा है कि अयोध्या मे राम मंदिर का निर्माण होकर रहेगा। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को सर्वोच्च अदालत में हुई सुनवाई में यह साबित किया गया कि बाबरी मस्जिद पर संस्कृत में लिखा हुआ था और मुसलमानों को संस्कृत से कोई लेना देना नहीं था। रामलला के वकील के इस दावे पर जस्टिस बोबडे ने पूछा कि वो स्लैब कहां मिले थे? उन्होंने कहां से पता लगा कि स्लैब वहां से आ रही है? इसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस शिलालेख को भी लेकर चैलेंज किया गया है? इसके बाद पर सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि स्लैब पर उत्कीर्ण कंटेंट के अनुवाद या इस शिलालेख की प्रमाणिकता को चैलेंज नहीं किया गया है बल्कि सवाल इस पर उठाया गया है कि ये स्लैब विवादित जमीन से मिला है या नहीं। रामलला के बकिल ने पाञ्चजन्य के एक रिपोर्टर की रिपोर्ट पढ़ी, जिसमें बताया गया है कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया तो जो स्लैब वहां से गिर रही थीं, उनमें संस्कृत भाषा में कुछ लिखा हुआ था, जिसकी रिपोर्ट ने तस्वीरें भी ली थी, जिन्हें बाद में पुलिस ने जब्त कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा, “क्या से सब ASI के द्वारा इकट्ठा किया गया था?” इसके बाद वैद्यनाथन ने बताया कि ये ASI रिपोर्ट में नहीं था, ASI काफी बाद में आई। उन्होंने ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए मगरमच्छ, कछुओं का भी जिक्र किया और कहा कि इनका मुस्लिम कल्चर से मतलब नहीं था। 1114 AD से 1155 AD तक 12वीं शताब्दी में साकेत मंडल का राजा गोविंदचंद्र था, तब अयोध्या ही उसकी राजधानी हुआ करती थी। यहां विष्णु हरि का बहुत भव्य मंदिर था, पुरातत्वविदों ने इसकी पुष्टि भी की है, जिसे भी तोड़ दिया गया है। शीर्ष अदालत में हुई इस बहस के बाद सोशाल मीडिया पर कई लोगों ने फिर अयोध्या मे राम मंदिर बनेगा का नारा लगाना शुरू कर दिया है। जय श्री राम 👏 जय श्री हनुमान जी नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 नमस्कार 🙏 🌃 🎪 🚩 🌠 ✨ नमस्कार 🙏

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"राम मंदिर निर्माण को लेकर मुस्लिमों ने की बड़ी बात, कहा- हम भी चाहते हैं कि... मेरठ। मुस्लिम भी चाहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो। इस संबंध में वह लगातार बैठकें कर रहे हैं और हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा में नफरत के बीज बोने वालों के खिलाफ नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच महिला प्रकोष्ठ की राम मंदिर निर्माण को लेकर बैठक हुई। इसमें उन्होंने एक सुर में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया। मंदिर के विरोध में नहीं रहे दोनों मुस्लिम संगठनों की बैठक के बाद पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य राष्ट्रीय संयोजक अफजाल, इस्लाम अब्बास के साथ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका शाहीन परवेज उपस्थित रही। सभी ने एक सुर से राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया। अफजाल ने कहा कि मुस्लिम कभी भी राम मंदिर के विरोध में नहीं रहे। राम मंदिर निर्माण के लिए आज भी मुस्लिमों का समर्थन हिन्दू भाइयों को है। राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना रूख स्पष्ट कर दिया है। इस मामले में अब प्रतिदिन सुनवाई भी हो रही है। अब सब कुछ स्पष्ट हो गया है। राम मंदिर के नाम पर हो रही राजनीति संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। राम मंदिर पर राजनीतिक दलों ने हिन्दू-मुस्लिमों को बांटने का काम किया है। दोनों समुदाय के बीच दरार डालने का काम किया गया था, लेकिन दोनों ही भाईचारे और प्रेमभावना से साथ रहे। आज भी दोनों समुदाय एक हैं और राम मंदिर का निर्माण चाहते हैं। राम मंदिर पर मुस्लिमों का रुख स्पष्ट मुस्लिम राष्ट्रीय मंच महिला प्रकोष्ठ की शाहीन परवेज ने कहा कि आज राम मंदिर के प्रति मुस्लिमों का रूख स्पष्ट है। मुस्लिम कहीं से भी राम मंदिर के विरोध में नहीं हैं। हम सभी मिलजुलकर राम मंदिर का निर्माण चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मौकापरस्त और कट्टरवादी लोग नफरत का बीज बो रहे हैं। भाजपा सरकार ने जिस प्रकार धारा 370 को हटाकर अपने वादे को पूरा किया, उसी प्रकार अब राम मंदिर बनवाने का वादा पूरा करने का भी समय आ गया है। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। जय श्री राम 👏 जय श्री हनुमान जी जय श्री सिता माता की 🙏 🌷 🌷 👏 "क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन, जानिए इस से जुड़ा इतिहास रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे भारत वर्ष में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ये त्यौहार काफी प्राचीन समय से मनाया जा रहा है। इस त्यौहार का काफी महत्व है। लेकिन इस बात को काफी कम लोग जानते होंगे कि आखिर ये त्यौहार क्यों मनाया जाता है? आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। रक्षाबंधन का इतिहास धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिशुपाल का वध करते समय भगवान कृष्ण के बाएं हाथ की उंगली कट गई थी। इस से उन्हें खून बहने लगा और इसे देख कर द्रौपदी काफी दुखी हुई। उसने अपनी साड़ी से एक टुकड़ा काट के श्रीकृष्ण की ऊँगली पर बहना बंद हो गया। तभी से कृष्ण भगवान उन्हें अपनी बहन मनने लगे। जब पांडव द्रौपदी को जुए में हार गए और दुर्योधन उनका चीरहरण कर रहे थे तब भगवान कृष्ण ने एक भाई का फर्ज निभाते हुए द्रौपदी के मान सम्मान की रक्षा की। कैसे मनाया जाता है ये त्यौहार इस दिन भाई बहनों के लिए तरह-तरह के गिफ्ट खरीदते हैं और कई अपनी बहनों को दक्षिणा देकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। बहनें भी इस दिन भाइयों के लिए गिफ्ट खरीदती है। बहनें राखी, रुमाल, मिठाई आदि सामान भाई के कलाई पर राखी बांधती है और उस से कई सारे वादे भी लेती है। रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना ए नमस्कार 🙏

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