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भगवान और मनुष्यों के बीच अद्बितीय संबंध का प्रतीक राधा अष्टमी इस साल ६ सितंबर को मनाई जाएगी। कहते हैं इसी दिन राधा जी का जन्म हुआ था। पंडि़त शुभम दुबे बताते हैं कि इस वर्ष राधा अष्टमी का महान पावन व्रत-त्योहार 6 सितंबर शुक्रवार को अनुराधा नक्षत्र में मनाया जाएगा। कहते हैं कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बरसाने में राधा जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को राधाष्टमी के नाम से मनाते हैं। हिंदू धर्म में राधा अष्टमी व्रत का खास महत्व है। मान्यता है कि राधा अष्टमी व्रत रखने से व्यक्ति को कई लाभ होते हैं।   आइए जानते हैं राधा अष्टमी व्रत की विधि राधा अष्टमी व्रत जब-जब श्रीकृष्ण का नाम लिया गया है, ऐसा कभी हुआ नहीं कि राधा जी का नाम ना लिया गया हो। श्रीकृष्ण को आम भक्त राधे-कृष्ण कहकर पुकारते हैं। क्योंकि यह दो शब्द, यह दो नाम एक-दूसरे के लिए ही बने हैं और इन्हें कोई अलग नहीं कर सकता है। राधा अष्टमी का व्रत का महत्व- राधा अष्टमी के नाम से इस व्रत को जाना जाता है। इस व्रत को करने से धन की कमी नहीं होती और घर में बरकत बनी रहती है। इस व्रत को करने से भाद्रपक्ष की अष्टमी के व्रत से महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत भी होती है। कौन हैं राधा जी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बरसाने में राधा जी का जन्म हुआ था उनका जन्म कृष्ण के साथ सृष्टि में प्रेम भाव मजबूत करने के लिए हुआ था। कुछ लोग मानते हैं कि राधा एक भाव है, जो कृष्ण के मार्ग पर चलने से प्राप्त होता है। इसलिए हर वह व्यक्ति जो कृष्ण के प्रेम में लीन होता है, राधा कहलाता है। वैष्णव तंत्र में राधा और कृष्ण का मिलन ही व्यक्ति का अंतिम उद्देश्य होता है। जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे जय श्री राम 👏 जय श्री हनुमान जी जय श्री गणेश जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी जय श्री नैना देव्यै विद्महे नम:👏 🌹 🚩 नमस्कार 🙏 जय श्री राम 👏

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