🍎स्वर्ग का सेब🍎 〰️〰️🔸〰️〰️ एक बार स्वर्ग से घोषणा हुई कि भगवान सेब बॉटने आ रहे है सभी लोग भगवान के प्रसाद के लिए तैयार हो कर लाइन लगाकर खड़े हो गए। एक छोटी बच्ची बहुत उत्सुक थी क्योंकि वह पहली बार भगवान को देखने जा रही थी।एक बड़े और सुंदर सेब के साथ साथ भगवान के दर्शन की कल्पना से ही खुश थी।अंत में प्रतीक्षा समाप्त हुई। बहुत लंबी कतार में जब उसका नम्बर आया तो भगवान ने उसे एक बड़ा और लाल सेब दिया। लेकिन जैसे ही उसने सेब पकड़कर लाइन से बाहर निकली उसका सेब हाथ से छूटकर कीचड़ में गिर गया। बच्ची उदास हो गई।अब उसे दुबारा से लाइन में लगना पड़ेगा। दूसरी लाइन पहली से भी लंबी थी।लेकिन कोई और रास्ता नहीं था। सब लोग ईमानदारी से अपनी बारी बारी से सेब लेकर जा रहे थे। अन्ततः वह बच्ची फिर से लाइन में लगी और अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगी।आधी क़तार को सेब मिलने के बाद सेब ख़त्म होने लगे। अब तो बच्ची बहुत उदास हो गई। उसने सोचा कि उसकी बारी आने तक तो सब सेब खत्म हो जाएंगे। लेकिन वह ये नहीं जानती थी कि भगवान के भंडार कभी ख़ाली नही होते।जब तक उसकी बारी आई तो और भी नए सेब आ गए । भगवान तो अन्तर्यामी होते हैं। बच्ची के मन की बात जान गए।उन्होंने इस बार बच्ची को सेब देकर कहा कि पिछली बार वाला सेब एक तरफ से सड़ चुका था। तुम्हारे लिए सही नहीं था इसलिए मैने ही उसे तुम्हारे हाथों गिरवा दिया था। दूसरी तरफ लंबी कतार में तुम्हें इसलिए लगाया क्योंकि नए सेब अभी पेडों पर थे। उनके आने में समय बाकी था। इसलिए तुम्हें अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ी। ये सब अधिक लाल, सुंदर और तुम्हारे लिए उपयुक्त है। भगवान की बात सुनकर बच्ची संतुष्ट हो कर गई इसी प्रकार यदि आपके किसी काम में विलंब हो रहा है तो उसे भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करें। भगवान अपने बच्चों को वही देंगे जो उनके लिए उत्तम होगा। ईमानदारी से अपनी बारी की प्रतीक्षा करने में सबकी भलाई है। *ॐ नमो भगवते वासुदेवाय* 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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" सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता " 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ सोलहवाँ अध्याय:(दैवासुरसंपद्विभागयोग) द्वादश दिवस 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ आत्मसम्भाविताः स्तब्धा धनमानमदान्विताः। यजन्ते नामयज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम्‌ ।।17।। अपने को श्रेष्ठ मानने वाले तथा सदैव घमण्ड करने वाले, सम्पत्ति तथा मिथ्या प्रतिष्ठा से मोहग्रस्त लोग किसी विधि-विधान का पालन न करते हुये कभी-कभी नाममात्र के लिये बड़े ही गर्व के साथ यज्ञ करते हैं। सज्जनों, आसुरी लोग अपने आप को सब क़ुछ मानते हुये, किसी प्रमाण या शास्त्र की परवाह न करते हुये कभी-कभी तथाकथित धार्मिक‌ या याज्ञिक अनुष्ठान करते हैं, चूँकि वे किसी प्रमाण में विश्वास नहीं करते, इसलिये वे अत्यधिक घमंड़ी होते हैं, थोड़ी सी सम्पत्ति तथा झूठी प्रतिष्ठा पा लेने के कारण जो मोह यानी भ्रम उत्पन्न होता है, उसी के कारण ऐसा होता हैं, कभी-कभी ऐसे असुर उपदेशक की भूमिका भी निभाते है और लोगों को भ्रान्त करते है तथा धार्मिक‌ सुधारक या ईश्वर के अवतारों के रूप में प्रसिद्ध हो जाते हैं। आसुरी लोग यज्ञ करने का दिखावा भी करते है या दैवताओं की पूजा भी करते हैं या अपने निजी ईश्वर की सृष्टि भी कर लेते हैं, सामान्य लोग उनका प्रचार ईश्वर कह कर करते हैं, उन्हें पूजते है और मूर्ख लोग ऐसे पाखंड़ियों को धर्म और अध्यात्म में बढ़ा-चढ़ा मानते हैं, ऐसे लोग संन्यासी का वेश भी धारण कर लेते हैं और उस वेश में सभी प्रकार का अधर्म करते हैं, वास्तव में इस संसार से विरक्त होने वाले पर अनेक प्रतिबन्थ होते हैं, लेकिन ऐसे असुर इन प्रतिबन्धों की परवाह नहीं करते। ऐसे आसुरी लोगों के समक्ष आदर्श मार्ग जैसी कोई वस्तु नहीं, जिस पर चला जाय, इस श्लोक में "अविधिपूर्वकम" शब्द इसीलिये प्रयुक्त ‌हुआ हैं, जिसका अर्थ है विधि-विधानों की परवाह न करते हुये, ये सभी बातें सदैव अज्ञान तथा मोह के कारण होती हैं, सज्जनों, भगवद्गीता मानवीय शास्त्रों की कुंजी हैं, मानव जीवन के सारे सिद्धान्त भगवद्गीता में प्रतिपादित हैं,वेद और उपनिषद् का नवनीत भी भगवद्गीता में आत्मसात् हुआ हैं और मनुष्य से जुड़ा सारा उपदेश समाविष्ट हैं। सज्जनों! वह कंठ ही क्या जिसने गीता का अपने जीवन में गायन न किया, वे कदम ही क्या जो गीता के मार्ग पर न चले, वह वाणी धन्य हो जाती है, जिसे गीता का रसास्वादन हो जाता है, उस वयक्ति का जीवन धन्य है जो सोने से पहले भगवद्गीता जैसे धर्मग्रन्थ का श्लोक श्रवण करने को मिलता हैं, गीता के दिव्य ज्ञान के दो शब्द सुनने-पढ़ने को मिलते हैं, भ्रम में रहने वाले वयक्ति का मानव जीवन असफल हो जाता है, भले ही वह करोड़ों का मालिक क्यो न हो, लेकिन गीताजी के श्लोकों और सूत्रों को दिन-भर अपने चिन्तन और मनन में रखने वालों का मानव जीवन धन्य हो जाता है,भले ही वह श्रमिक ही क्यों न हो। भाई-बहनों, भगवान् करें, आप सभी का भी मनुष्य जन्म सफल हों, विकारो में तो हर आदमी का जीवन गुजर ही रहा है, लेकिन जीवन के ऐश्वर्य-ईश्वर के रसास्वादन में जिनका जीवन गुजरता हैं, ऐसे मनुष्य का प्रत्येक दिन भले ही अमावस्या जैसा अंधकारमय क्यों न हों, असल में वह प्रत्येक दिन पूनम के चन्द्रमा के समान है, पूर्ण रोशनी लिये, दोस्तों! मैं भगवद्गीता की पोस्ट बहुत सारे ग्रूपों में करता हूँ, इसलिये मुझें यह लिखना पड़ रहा है कि अगर हम जाती, वर्ण या विशेष धर्म के चश्मे से गीता से प्रेम रखते है, तो यह गीता के साथ अन्याय हैं, गीता प्रत्येक मानव के लिये हैं। सज्जनों आपमें से अगर कोई भाई या बहन जैन हो और उस नाते गीता को अस्वीकार करते हो, तो ऐसा करके आप गीता को नहीं, अपितु अपने जीवन के अन्तर्सत्यों को अस्वीकार कर बैठोगे, इस्लाम के अनुयायी होने के कारण गीता से परहेज रखोगे, तो कुरान के सन्देशों को समझने में आपसे चूक हुई हैं, जैनत्व, हिन्दुत्व, बौद्धत्व या इस्लाम, ये सब छिलके हैं, दोस्तों! किसी भी फल का महत्व छिलकों में नहीं होता, छिलकों को एक तरफ करो और गूदे को स्वीकार करो, शक्ति गूदे में हैं, छिलकों में नहीं। भाई-बहनों! मनुष्य को छिलके इतने लुभाते है कि भीतर का पदार्थ गौण हो जाता है, अगर हम छिलकों को एक तरफ रख कर भगवद्गीता को सुनेंगे, पढ़ेंगे, गीता का आचमन करेंगे, गीता को ह्रदय में धारण करेंगे, तो हमारा मनुष्य जन्म सफल हो सकता हैं, जीवन में एक महान् चमत्कार घटित हो सकता हैं, यह गीता जीवन में वह अन्तर-रूपांतर कर देगी, जिसके अभाव में हम जन्म-जन्मान्तर एक योनि से दूसरी योनि में भटकते रहे हैं। शेष जारी ... जय श्री कॄष्ण! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय् 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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सूर्य ग्रह से संबंधित जानकारी समस्या और उपाय 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️🔸〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ ज्योतिष में सूर्य को राजा की पदवी प्रदान की गयी है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मा एवं पिता का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य द्वारा ही सभी ग्रहों को प्रकाश प्राप्त होता है और ग्रहों की इनसे दूरी या नजदीकी उन्हें अस्त भी कर देती है। सूर्य सृष्टि को चलाने वाले प्रत्यक्ष देवता का रूप हैं। कुंडली में सूर्य को पूर्वजों का प्रतिनिधि भी माना जाता है। सूर्य पर किसी भी कुंडली में एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने पर उस कुंडली में पितृ दोष का निर्माण हो जाता है। व्यक्ति की आजीविका में सूर्य सरकारी पद का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य प्रधान जातक कार्यक्षेत्र में कठोर अनुशासन अधिकारी, उच्च पद पर आसीन अधिकारी, प्रशासक, समय के साथ उन्नति करने वाला, निर्माता, कार्यो का निरीक्षण करने वाला बनता है. बारह राशियों में से सूर्य मेष, सिंह तथा धनु में स्थित होकर विशेष रूप से बलवान होता है तथा मेष राशि में सूर्य को उच्च का माना जाता है। मेष राशि के अतिरिक्त सूर्य सिंह राशि में स्थित होकर भी बली होते हैं। यदि जातक की कुंडली में सूर्य बलवान तथा किसी भी बुरे ग्रह के प्रभाव से रहित है तो जातक को जीवन में बहुत कुछ प्राप्त होता है और स्वास्थ्य उत्तम होता है। सूर्य बलवान होने से जातक शारीरिक तौर पर बहुत चुस्त-दुरुस्त होता है। कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य शुभ फल देने वाला होता है. सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है। पहला घर सूर्य का ही होता है, इसलिए सूर्य का इस घर में होना अत्यंत शभ फलदायक होता है। ऐसा जातक धार्मिक इमारतों या भवनों का निर्माण और सार्वजनिक उपयोग के लिए कुओं की खुदाई करवाता है। उसकी आजीविका का स्थाई स्रोत अधिकांशत: सरकारी होगा। ईमानदारी से कमाये गये धन में बृद्धि होगी। जातक अपनी आंखों देखी बातों पर ही विश्वास करेगा, कान से सुनी गयी बातों पर नहीं। यदि सूर्य अशुभ है तो जातक के पिता की मृत्यु बचपन में ही हो जाती है। पहले भाव का अशुभ सूर्य और पांचवें भाव का मंगल एक-एक कर संतान की मृत्यु का कारण होता है। उपाय : 〰️〰️ 1. जातक को 24 वर्ष से पहले ही शादी कर लेंनी चाहिए। 2. दिन के समय संबंध न बनाएं, इससे पत्नी बीमार रहेगी और मृत्यु भी हो सकती है। 3. अपने पैतृक घर में पानी के लिए एक हैंडपंप लगवाएं। 4. अपने घर के अंत में बाईं ओर एक छोटे और अंधेरे कमरे का निर्माण कराएं। 5. पति या पत्नी दोनों में से किसी एक को गुड़ खाना बंद कर देना चाहिए। कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ कुंडली के दूसरे भाव का सूर्य यदि शुभ है तो जातक आत्मनिर्भर होगा, शिल्पकला में कुशल और माता-पिता, मामा, बहनों, बेटियो तथा ससुराल वालों का सहयोग करने वाला होगा। यदि चंद्रमा छठवें भाव में होगा तो दूसरे भाव का सूर्य और भी शुभ प्रभाव देगा। आठवें भाव का केतू जातक को अधिक ईमानदार बनाता है। नौवें भाव का राहू जातक को प्रसिद्ध कलाकार या चित्रकार बनता है। नवम भाव का केतू जातक को महान तकनीकी जानकार बनाता है। नवम भाव का मंगल जातक को फैशनेबल बनाता है। यदि सूर्य दूसरे, मंगल पहले और चंद्रमा बारहवें भाव में हो तो जातक की हालत गंभीर हो सकती है और वह हर तरीके से दयनीय होगा। यदि दूसरे भाव में सूर्य अशुभ हो तो आठवें भाव में स्थित मंगल जातक को लालची बनाता है। उपाय : 〰️〰️ 1. किसी धार्मिक स्थान में नारियल का तेल, सरसों का तेल और बादाम दान करें। 2. धन, संपत्ति, और महिलाओं से जुड़े विवादों से बचें। 3. दान लेने से बचें, विशेषकर चावल, चांदी, और दूध का दान नहीं लेना चाहिए। कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ कुंडली के तीसरे भाव का सूर्य अगर शुभ है तो जातक अमीर, आत्मनिर्भर होगा और उसके कई छोटे भाई होंगे। जातक पर ईश्वरीय कृपा होगी और वह बौद्धिक व्यवसाय द्वारा लाभ कमाएगा। वह ज्योतिष और गणित में रुचि रखने वाला होगा। यदि तीसरे भाव में सूर्य अशुभ है और कुण्डली में चन्द्रमा भी अशुभ है तो जातक के घर में दिनदहाडे चोरी या डकैती हो सकती है। यदि पहला भाव पीडित है तो जातक के पडोसियों का विनाश हो सकता है। उपाय : 〰️〰️ 1. मां को खुश रखते हुए उसका आशिर्वाद लें। 2. दूसरों को चावल या दूध परोसें एवं गरीबों को दान दें। 3. सदाचारी रहें और बुरे कामों से बचने का प्रयास करें। कुंडली के चौथे भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ चौथे भाव में यदि सूर्य शुभ है तो जातक बुद्धिमान, दयालु और अच्छा प्रशासक होगा। उसके पास आमदनी का स्थिर श्रोत होगा। ऐसा जातक मरने के बाद अपने वंशजों के लिए बहुत धन और बडी विरासत छोड जाता है। यदि चंद्रमा भी सूर्य के साथ चौथे भाव में स्थित है तो जातक किसी नये शोध के माध्यम से बहुत धन अर्जित करेगा। ऐसे में चौथे भाव या दसवें भाव का बुध जातक को प्रसिद्ध व्यापारी बनाता है। यदि सूर्य के साथ बृहस्पति भी चौथे भाव में स्थित है तो जातक सोने और चांदी के व्यापार से अच्छा मुनाफा कमाता है। यदि शनि सातवें भाव में हो तो जातक को रतौंधी या आंख से संबंधित अन्य रोग हो सकता है। यदि सूर्य चौथे भाव में पीडित हो और मंगल दसवें भाव में हो तो जातक की आंखों में दोष हो सकता है लेकिन उसकी किस्मत कमजोर नहीं होगी। उपाय : 〰️〰️ 1. जातक को चाहिए कि जरूरतमंद और अंधे लोगों को दान दें और खाना बांटें। 2. लोहे और लकड़ी के साथ जुड़ा व्यापार कदापी न करें। 3. सोने, चांदी और कपड़े से सम्बंधित व्यापार लाभकारी रहेंगे। कुंडली के पांचवें भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ यदि सूर्य पांचवें भाव में शुभ है तो निश्चित ही जातक के परिवार तथा बच्चों की प्रगति और समृद्धि होगी। यदि पांचवें भाव में कोई सूर्य का शत्रु ग्रह स्थित है तो जातक को सरकार जनित परेशानियों का सामना करना पडेगा। यदि मंगल पहले अथवा आठवें भाव में हो एवं राहू या केतू और शनि नौवें और बारहवें भाव में हो तो जातक राजसी जीवन जीता है। यदि गुरु नौवें या बारहवें भाव में स्थित है तो जातक के शत्रुओं का विनाश होगा लेकिन यह स्थिति जातक के बच्चों के लिए ठीक नहीं है। यदि पांचवें भाव का सूर्य अशुभ है और बृहस्पति दसवें भाव में है तो जातक की पत्नी जीवित नहीं रहती और चाहे जितने विवाह करें पत्नियां मरती जाएंगी। उपाय : 〰️〰️ 1. ऐसे जातक को संतान पैदा करने में देरी नहीं करनी चाहिए। 2. घर (मकान) के पूर्वी भाग में ही रसोई घर का निर्माण करें। 3. लगातार 43 दिनों तक सरसों के तेल की कुछ बूंदे जमीन पर गिराएं। कुंडली के छठे भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ यदि सूर्य छठे भाव में शुभ हो तो जातक भाग्यशाली, क्रोधी तथा सुंदर जीवनसाथी वाला होता है। यदि सूर्य छठे भाव में हो, चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति दूसरे भाव में हो तो परंपरा का निर्वाह करना फायदेमंद रहता है। यदि सूर्य छ्ठे भाव में हो और सातवें भाव में केतू या राहू हो तो जातक का एक पुत्र होगा और 48 सालों के भाग्योन्नति होगी। यदि दूसरे भाव में कोई भी ग्रह न हो तो जातक को जीवन के 22वें साल में सरकारी नौकरी मिलने के योग बनते हैं। यदि सूर्य अशुभ हो तो जातक के पुत्र और ननिहाल के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड सकता है। जातक का स्वास्थ भी ठीक नहीं रहेगा। उपाय : 〰️〰️ 1. कुल परम्परा और धार्मिक परम्पराओं कड़ाई से पालन करें अन्यथा परिवार की प्रगति और प्रसन्नता नष्ट हो जायेगी। 2. घर के आहाते (परिसर) में भूमिगत भट्टियों का निर्माण कदापि न करें। 3. रात में भोजन करने के बाद रसोई की आग और स्टोव आदि को दूध का छिड़काव करके बुझाएं। 4. अपने घर के परिसर में हमेशा गंगाजल रखें और बंदरों को गुड़ और चना खिलाएं। कुंडली के सातवें भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ सातवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ है और यदि बृहस्पति, मंगल अथवा चंद्रमा दूसरे भाव में है तो जातक सरकार में मंत्री जैसा पद प्राप्त करता है। बुध उच्च का हो या पांचवें भाव में हो अथवा सातवां भाव मंगल का हो तो जातक के पास आमदनी का अंतहीन श्रोत होगा। यदि सातवें भाव में स्थित सूर्य हानिकारक हो और बृहस्पति, शुक्र या कोई और अशुभ ग्रह ग्यारहवें भाव में स्थित हो तो तथा बुध किसी भी भाव में नीच हो तो जातक की मौत किसी मुठभेड में परिवार के कई सदस्यों के साथ होती है। सातवें भाव में हानिकारक सूर्य हो और मंगल या शनि दूसरे या बारहवें भाव में स्थित हो तथा चंद्रमा पहले भाव में हो तो जातक को कुष्ट या ल्यूकोडर्मा जैसे चर्म रोग हो सकते हैं। उपाय : 〰️〰️ 1. ऐसे जातक नमक का उपयोग कम मात्रा में करें। 2. किसी भी काम को शुरू करने से पहले मीठा खाएं और उसके बाद पानी जरूर पियें। 3. भोजन करने से पहले रोटी का एक टुकड़ा रसोई घर की आग में डालें। 4. काली अथवा बिना सींग वाली गाय को पालें और उसकी सेवा करें, सफेद गाय ना पालें। कुंडली के आठवें भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ आठवें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो उम्र के 22वें वर्ष से सरकार का सहयोग मिलता है। ऐसा सूर्य जातक को सच्चा, पुण्य और राजा की तरह बनाता है। कोई उसे नुकसान पहुंचाने में सक्षम नहीं होता। यदि आठवें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो दूसरे भाव में स्थित बुध आर्थिक संकट पैदा करेगा। जातक अस्थिर स्वभाव, अधीर और अस्वस्थ्य रहेगा। ऐसा जातक ईमानदार होता है किसी की भी बातों में आ जाता है, जिससे कभी-कभी उसे नुकसान भी होता है। उपाय : 〰️〰️ 1. ऐसे जातक को चाहिए कि वह घर में कभी भी सफेद कपड़े न रखे। 2. जातक का घर दक्षिण मुखी न हो. उत्तरमुखी घर अत्यधिक फायदे पहुंचाने वाला हो सकता है। 3. हमेशा किसी भी नये काम को शुरू करने से पहले मीठा खाकर पानी पिना फायदेमंद होगा। 4. यदि संभव हो तो किसी जलती हुई चिता में तांबे के सिक्के डालें और बहती नदी में गुड़ बहाएं । कुंडली के नौवें भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ नवमें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो जातक भाग्यशाली, अच्छे स्वभाव वाला, अच्छे पारिवारिक जीवन वाला और हमेशा दूसरों की मदद करने वाला होगा। यदि बुध पांचवें घर में होगा तो जातक का भाग्योदय 34 साल के बाद होगा। यदि नवें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो जातक बुरा और अपने भाइयों के द्वारा परेशान किया जाएगा। सरकार से अरुचि और प्रतिष्ठा की हानि हो सकती है। ऐसा जातक भाई के साथ सुखी नहीं रहेगा। उपाय : 〰️〰️ 1. उपहार या दान के रूप में चांदी की वस्तुएं कभी स्वीकार न करें. अपितु चांदी की वस्तुएं दान करें। 2. ऐसे जातक को पैतृक बर्तन और पीतल के बर्तन नहीं बेचना चाहिए। 3. अत्यधिक क्रोध और अत्यधिक कोमलता से बचें रहना चाहिए। कुंडली के दसवें भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ दसवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ हो तो सरकार से लाभ और सहयोग मिल सकता है। जातक का स्वास्थ्य अच्छा और वह आर्थिक रूप से मजबूत होगा। जातक को सरकारी नौकरी, वाहनों और कर्मचारियों का सुख मिलता रहेगा। ऐसा जातक हमेशा दूसरों पर शक करता है। यदि दसवें भाव में स्थित सूर्य हानिकारक हो और शनि चौथे भाव में हो तो जातक के पिता की मृत्यु बचपन में हो जाती है। सूर्य दसवें भाव में हो और चंद्रमा पांचवें घर में हो तो जातक की आयु कम होगी। यदि चौथे भाव में कोई ग्रह न हों तो जातक सरकारी सहयोग और लाभ से वंचित रह जाएगा। उपाय : 〰️〰️ 1. ऐसे जातक को चाहिए कि कभी भी काले और नीले कपड़े न पहनें। 2. किसी नदी या नहर में लगातार 43 दिनों तक तांबें का एक सिक्का डालना अत्यंत शुभ फल देगा। 3. जातक का मांस मदिरा के सेवन से बचें रहना फायदेमंद होगा। कुंडली के ग्यारहवें भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ यदि ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य शुभ है तो जातक शाकाहारी और परिवार का मुखिया होगा। जातक के तीन बेटे होंगे औए उसे सरकार से लाभ मिलेगा। ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ नहीं है और चंद्रमा पांचवें भाव में है। और सूर्य पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो यह जातक की आयु को कम करने वाली होती है। उपाय : 〰️〰️ 1. ऐसे जातक को चाहिए कि वह मांसहार और शराब के सेवन से बचे। 2. जातक को रात में सोते समय बिस्तर के सिरहने बादाम या मूली रखकर सोना चाहिए। 3. दूसरे दिन उस बादाम या मूली को मंदिर में दान करने से आयु और संतान सुख मिलता है। कुंडली के बारहवें भाव में सूर्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ यदि बारहवें भाव में स्थित सूर्य शुभ हो तो जातक 24 साल के बाद अच्छा धन कमाएगा और जातक का पारिवारिक जीवन अच्छा बितेगा। यदि शुक्र और बुध एक साथ हो तो जातक को व्यापार से लाभ मिलता है और जातक के पास आमदनी के नियमित स्रोत होते हैं। यदि बारहवें भाव का सूर्य अशुभ हो तो जातक अवसाद ग्रस्त, मशीनरी से आर्थिक हानि उठाने वाला और सरकार द्वारा दंडित किया जाने वाला होगा। यदि पहले भाव में कोई और पाप ग्रह हो तो जातक को रात में चैन की नींद नहीं आएगी। उपाय : 〰️〰️ 1. जातक को हमेशा अपने घर में एक आंगन रखना चाहिए। 2. ऐसे जातक को चाहिए कि वह हमेशा धार्मिक और सच्चा बने। 3. ऐसे जातक को अपने घर में एक चक्की रखना चाहिए। 4. अपने दुश्मनों को हमेशा क्षमा करें। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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